छत्तीसगढ़ में पक्षियों की गणना का कार्य पूरा, 400 से ज्यादा पक्षियों के प्रजातियों का बसेरा

राजधानी रायपुर में बर्ड काउंट इंडिया ने छत्तीसगढ़ में पक्षियों की गणना का कार्य पूरा कर लिया है. बता दें कि वनांचल क्षेत्रों में आज भी पक्षियों का परम्परागत गुलेल से शिकार हो रहा है. राज्य के वनों में 400 से भी ज्यादा पक्षियों के प्रजातियों का बसेरा है, जिसे अच्छी खबर कही जा सकती है.

Yugal Tiwari | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: March 13, 2018, 1:01 PM IST
Yugal Tiwari | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: March 13, 2018, 1:01 PM IST
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बर्ड काउंट इंडिया ने छत्तीसगढ़ में पक्षियों की गणना का कार्य पूरा कर लिया है. बता दें कि वनांचल क्षेत्रों में आज भी पक्षियों का परम्परागत गुलेल से शिकार हो रहा है. राज्य के वनों में 400 से भी ज्यादा पक्षियों के प्रजातियों का बसेरा है, जिसे अच्छी खबर कही जा सकती है.

बहरहाल, वन विभाग और बर्ड काउंट इंडिया के बीच पक्षियों की गणना को लेकर मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) यानि समझौता करार हुआ था. मामले में पक्षी वैज्ञानिक सोहेल कादीर ने बताया कि राज्य के गठन के बाद पहली बार राज्य के वनों में पाए जाने वाली पक्षियों की गणना की गई है. इसमें 400 से भी ज्यादा प्रजातियों के पक्षियों का बसेरा छत्तीसगढ़ के वनों में पाया गया है, जो प्रदेश के लिए एक अच्छी खबर है.

वहीं मामले में शोधकर्ता सी. नायडू ने बताया कि दक्षिण बस्तर, सरगुजा, जशपुर आदि क्षेत्रों में पक्षी जंगलों में ज्यादा पाए गए हैं. हालांकि इन क्षेत्रों में परम्परागत गुलेल से पक्षियों का शिकार भी हो रहा है. 150 से ज्यादा प्रजातियों के पक्षी प्रवासी है, जो शर्दियों के मौसम में आते हैं. इसमें सबसे ज्यादा पानी में रहने वाले पक्षी हैं.

शोधकर्ताओं को राज्य में रहने वाले 75 फीसदी प्रजातियों के पक्षी मिले हैं. गांव हो या शहर गुलेल आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, जो आए दिन यहां पक्षियों के लिए काफी घातक साबित हो रहा है. इससे बड़े ही आसानी से पक्षियों का शिकार कर उनके अस्तित्व को खतरे में डाला जा रहा है. ऐसे में अब वन विभाग और पक्षी प्रेमी पक्षियों को बचाने के लिए सामाज में जागरूकता लाने की बात कह रहे हैं.

प्रधान मुख्य वन संरक्षक आर. के. सिंह ने बताया कि बर्ड काउंट इंडिया ने प्रदेश के सभी 27 जिलों में गणना का कार्य किया है. अब वन विभाग पक्षियों के लिए सस्थागत व्यवस्था बनाने का प्रयास और योजना बनाने की बात कही जा रही है.

बहरहाल, पक्षियों के संरक्षण के कई फायदे हैं. खास तौर पर पक्षी किसानों के मित्र होते हैं. धर्म और शास्त्रों में पक्षियों के विषय में काफी कुछ उल्लेख भी है. बता दें कि राज्य में 12 दुर्लभ प्रजातियों के पक्षियों गणना करने वालो को मिले हैं.
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