कांग्रेस-बीजेपी को सता रहा भितरघातियों और बागियों का डर

कांग्रेस-बीजेपी को सता रहा भितरघातियों और बागियों का डर
कांग्रेस-बीजेपी को सता रहा भितरघातियों और बागियों का डर

दूसरे चरण के मतदान की उलटी गिनती शुरू हो गई है, लेकिन आज भी राजनीतिक दलों के लिए उन्हीं के बागी प्रत्याशी मुसीबत बने हुए हैं.

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छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण के मतदान की उलटी गिनती शुरू हो गई है, लेकिन आज भी राजनीतिक दलों के लिए उन्हीं के बागी प्रत्याशी मुसीबत बने हुए हैं. चुनावी समर में सत्ता से पहले टिकट की लालसा करीब-करीब सभी नेताओं को होती है. ऐसे में जब किसी नेता को टिकट नहीं मिलता, तो उसका बागी या भितरघाती होना स्वभाविक होता है. ऐसा ही कुछ नजारा छत्तीसगढ़ में दिखाई दे रहा है. छत्तीसगढ़ की राजनीति गलियारों में बात चाहे बीजेपी की हो या फिर कांग्रेस की, दोनों ही दलों को भितरघातियों से लेकर बागियों का भय सता रहा है.

बीजेपी के निष्कासित नेताओं के नाम कुछ प्रकार हैं. बसना से प्रत्याशी संपत अग्रवाल, रायगढ़ से प्रत्याशी विजय अग्रवाल, मनेंद्रगढ़ से प्रत्याशी लखन श्रीवास्तव, जांजगीर से व्यासनारायण कश्यप, जशपुर से प्रदीप नारायण सिंह, कुनकुरी से कमलेश्वर नायक और बागबहरा से भेखलाल साहू का नाम शामिल है. वहीं कांग्रेस से निष्कासित सुमन वर्मा चंद्रपुर से प्रत्याशी हैं.

भले ही बीजेपी में ऐसे निष्कासित नेताओं की सूची लंबी है, जो चुनावी मैदान में बतौर निर्दलीय बीजेपी का समीकरण बिगाड़ रहे हैं, लेकिन कांग्रेस में भितरघातियों की संख्या तमाम सियासी समीकरण को बिगाड़ने के लिए काफी है.



बीजेपी का मिशन 65 प्लस और कांग्रेस के 15 सालों से सत्ता का वनवास समाप्ति की तैयारियों की राह में निष्कासित नेताओं से लेकर बागी नेताओं तक रोड़े अटका रहे हैं. बहरहाल, देखना होगा इन तमाम परिस्थियों के बीच जनता जनार्दन किसे सिरमौर बनाती है. किसका मिशन पूरा होता है.
 

 

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