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BJP में शामिल हुआ यह पूर्व IAS तो कांग्रेस बोली- पाप धोने वाली वाशिंग मशीन बनी भाजपा

पूर्व आईएएस जीएस मिश्रा ने बीजेपी की सदस्यता ली.

पूर्व आईएएस जीएस मिश्रा ने बीजेपी की सदस्यता ली.

CG Politics: राजनीतिक दल में शामिल होना या दल-बदल चुनावी सीजन में देखने को मिलता है, मगर छत्तीसगढ़ में चुनाव के दो-ढाई साल पहले पूर्व IAS अधिकारी जीएस मिश्रा के बीजेपी में शामिल होने की खबर ने हलचल तेज कर दी है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में 15 सालों तक राज करने के बाद सत्ता से बेदखल हुए बीजेपी ने लगता है साल 2023 के चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. छत्तीसगढ़ के पूर्व आईएएस गणेश शंकर मिश्रा के बीजेपी का दामन थामने को भी पार्टी की इसी जुगत से जोड़ कर देखा जा रहा है. हालांकि प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी इसको लेकर हमलावर है.

पूर्व आईएएस गणेश शंकर मिश्रा ने जैसे ही बीजेपी का दामन थामा, कांग्रेस की तरफ से हमले शुरू हो गए. कांग्रेस ने ना केवल बीजेपी को लोगों के पाप धोने वाली वाशिंग मशीन करार दिया, बल्कि रेडियस वाटर घोटाले से भी जीएस मिश्रा का नाम जोड़ दिया. कांग्रेस संचार प्रमुख शैलेष त्रिवेदी ने कहा कि चाहे जीएस मिश्रा हों या फिर ओपी चौधरी, दोनों ने बीजेपी में जाकर अपने पाप धोए हैं. बीजेपी एकमात्र ऐसी पार्टी है जहां हर तरह के पापियों के पाप धोए जाते हैं.

शैलेष त्रिवेदी के इस बयान से सूबे की राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस पर पलटवार करते हुए नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने सरकार के एक प्रमुख अधिकारी का नाम लिए बगैर ही कहा कि दागदार अधिकरियों को कैसे एक्सटेंशन दिया जा रहा है और कैसे काम कराया जा रहा है, जनता इससे भलिभांति जानती है. साथ ही यह भी कहा कि उनकी जानकारी में यह बिल्कुल भी नहीं हैं कि जीएस मिश्रा का नाम किसी भ्रष्टाचार से जुड़ा हो.

आपको बता दें कि गणेश शंकर मिश्रा के बीजेपी में जाने के बाद सियासी हलचल तेज होने के पीछे उनका नाम और प्रतिष्ठा भी एक कारण है. स्वतंत्रा संग्राम सेनानी पंडित लखन लाल मिश्र के पुत्र गणेश शंकर मिश्रा ने अपने 36 साल के शासकीय सेवाकाल में अपने कार्यों से खूब प्रशंसा बटोरी है. रायपुर नगर निगम के अंतिम प्रशासक के तौर पर मिश्रा ने 5 महीने के अंदर ही पूरे शहर का कालाकल्प कर दिया था. रायपुर का घड़ी चौक उन्हीं की देन है. इतना ही नहीं रसूखदार कब्जेधारियों से शहर के 5000 से अधिक बेजा कब्जा मुक्त कराने को लेकर भी उनका जिक्र होता है.

इधर, छत्तीसगढ़ की राजनीति को करीब से देखने वाले जानकारों का कहना है कि बीजेपी सत्ता वापसी की तलाश में अपने ही नेताओं पर भरोसा नहीं कर रही है. राजनीतिक विश्लेषक उचित शर्मा ने कहा कि बीजेपी ने जिनके भरोसे 15 साल तक सरकार चलाई, लगता है पार्टी को अब उन पर भरोसा नहीं रह गया है. उन्होंने कहा कि इस तरह के पूर्व अधिकारियों के आने-जाने से कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा.

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