सवर्णों को आरक्षण देने का फैसला केवल 'जुमलेबाज सरकार' का चुनावी हथकण्डा: कांग्रेस

मोदी कैबिनेट ने सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण देने का निर्णय कर लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एक बड़ा दांव चला है. इसको लेकर देशभर से प्रतिक्रियाओं का दौर शुरु हो गया है.

Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: January 8, 2019, 6:14 PM IST
सवर्णों को आरक्षण देने का फैसला केवल 'जुमलेबाज सरकार' का चुनावी हथकण्डा: कांग्रेस
प्रतीकात्मक तस्वीर
Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: January 8, 2019, 6:14 PM IST
आमचुनाव वाले इस साल में मोदी कैबिनेट ने दस फीसदी आरक्षण देने का निर्णय लेकर सवर्णों का साधने की कोशिश तो जरूर की है, मगर मोदी कैबिनेट के फैसले पर आवश्यक संविधान संसोधन को कब तक मुहर लगेगी और यह धरातल पर कब तक लागू होगा इस पर संशय की स्थिति बनी हुई है. दरअसल राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्यों में सवर्णों के आंदोलन ने विधानसभा चुनाव को काफी हद तक प्रभावित किया. इसके बाद लिए गए इस निर्णय को लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है.

साथ ही मोदी कैबनिट ने उन्ही बात को दोहराया है जिसे नरसिम्हा राव की सरकार 1991 में कह चुकी है. दरअसल नरसिम्हा राव सरकार ने मंडल कमीशन के बाद 1991 में ही सवर्णोंको दस फीसदी आरक्षण देने का निर्णय लिया था, जिसे 1992 में असंवैधानिक करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. अब करीब 28 साल बाद कमोबेश उसी तरह के निर्णय पर सवर्ण समाज से जुड़े लोग इसे एक मात्र चुनावी जुमला करार दे रहे है.

 

दरअसल देश में पहले से ही ओबीसी को 27, एससी को 15 और एसटी को 7.5 फीसदी आरक्षण दिए जाने का प्रावधान है. मोदी कैबिनेट ने धारा 16 और 17 के तहत तय मापदंडों के अनुसार सवर्णों को शिक्षा और नौकरी में 10 फीसदी आरक्षण देने का निर्णय लिया है. वहीं बात अगर छत्तीसगढ़ की करें तो यहां एसटी को 32, ओबीसी को 14 और एससी को 12 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान है. अब ऐसे में मोदी कैबिनेट के इस फैसले को संवैधानिक मंजूरी कब तक मिलेगी यह तो वक्त की गर्त में छुपा है. मगर इतना तो जरूर हैं कि मोदी कैबिनेट के इस निर्णय को कांग्रेस ने आड़े हाथों लिया है.

 

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार प्रमुख शैलेष नितिन त्रिवेदी का कहना है कि आरक्षण देने के फैसले से जुमलेबाज केंद्र सरकार केवल चुनावी हथकंडा अपना रही है. इसपर किसी को विश्वास नहीं है. पिछले चुनाव में भी ऐसे कई वादे किए गए थे लेकिन वे पूरे नहीं हुए. उनके इस चुनावी झासे में अब जनता नहीं आएगी. तो वहीं कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि आरक्षण देने का फैसला केवल लोकसभा चुनाव के देखते हुए लिया गया है. केंद्र सरकार की मंशा आरक्षण देने की कभी थी ही नहीं. अगर ऐसा होता तो ये फैसले बहुत पहले ही आ जाता.

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