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फंस गई कांग्रेस! BJP ने पूछा- जब शराबबंदी करना है तो कमेटी की क्या जरूरत?
Raipur News in Hindi

Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: February 18, 2020, 7:32 PM IST
फंस गई कांग्रेस! BJP ने पूछा- जब शराबबंदी करना है तो कमेटी की क्या जरूरत?
शराबबंदी का वादा कांग्रेस को भारी पड़ता दिख रहा है. (File Photo)

मगर बीजेपी और जोगी कांग्रेस की बेरूखी ने शराबबंदी पर निर्णय लेने पर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी है. बता दें कि सत्ताधारी दल कांग्रेस अपने घोषणा पत्र में राज्य में पूर्ण शराबबंदी को बड़ा मुद्दा बनाया था.

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रायपुर. शराबबंदी (Liquor Ban) के नाम पर प्रदेश में राजनीति जारी है. शराबबंदी को लेकर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और विधायक सत्यनारायण शर्मा (Satyanarayan Sharma) की अध्यक्षता में गठित कमेटी में बीजेपी (BJP) विधायकों को शामिल होने के लिए सरकार की ओर से तीसरा पत्र (Letter) भेजा गया. इससे पहले सरकार द्वारा भेजे गए दो पत्रों का बीजेपी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया और ना केवल बीजेपी बल्कि जोगी कांग्रेस (JCC J) के विधायकों को भी कमेटी में शामिल करने के लिए सरकार ने तीसरा पत्र भेजा है. सरकार कमेटी के सुझाव पर शाबबंदी का निर्णय लेना चाहती है और यहीं कारण है कि कमेटी का कोरम पूरा करने के लिए सरकार की ओर से पूरी कोशिश की जा रही है. मगर बीजेपी और जोगी कांग्रेस की बेरूखी ने शराबबंदी पर निर्णय लेने पर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी है. बता दें कि सत्ताधारी दल कांग्रेस अपने घोषणा पत्र में राज्य में पूर्ण शराबबंदी को बड़ा मुद्दा बनाया था.






शराबबंदी के नाम पर सरकार का भोंडा मजाक है- बृजमोहन अग्रवाल


शराबबंदी के लिए गठित कमेटी में शामिल होने के लिए सरकार द्वारा बीजेपी को भेजे गए तीसरे पत्र का जवाब देते हुए पूर्व मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता बृजमोहन अग्रवला (Brijmohan Agrawal) ने कहा कि सरकार की नीयत ही शराबबंदी की नहीं है. अगर सरकार को शराबबंदी ही करना है तो तो फिर कमेटी बनाने की क्या जरूरत है. साथ ही यह भी कहा कि सरकार शराबबंदी का वादा कर सत्ता तक पहुंचने में कामयाब होने वाली कांग्रेस की सरकार अब खराबबंदी के नाम पर प्रदेशवासियों से बड़ा मजाक कर रही है.






बीजेपी नेता बृजमोहन अग्रवला ने कहा कि सरकार की नीयत ही शराबबंदी की नहीं है.


 


नए वित्तीय वर्ष में 49 दुकानें बंद करने का निर्णय


पूर्ण शराबबंदी का वादा कर सत्ता में आने वाली कांग्रेस की सरकार ने नए वित्तीय वर्ष में महज 49 अंग्रेजी शराब दुकानें बंद करने का निर्णय लिया है. हालांकि पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने 50 शराब दुकान बंद किया था. 49 शराब दुकान बंद करने की जानकारी देते हुए वरिष्ठ मंत्री मो. अकबर ने कहा कि शराबबंदी के मामले पर विपक्ष का साथ नहीं मिल पा रहा है, विपक्ष के लोग केवल हल्ला मचाते है. कमेटी में शामिल होने के लिए बार-बार आमंत्रित किया जा रहा है मगर उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है.





विरेंद्र पाण्डेय की मानें तो जीएसटी लागू होने के बाद राज्य सरकार के लिए पूर्ण शराबबंदी का निर्णय लेना कठिन कार्य हैं



 क्या सच में होगी शराबबंदी



जिस शराब को लेकर विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस सदन से लेकर सड़क तक संग्राम करती थी, सरकार में आने के सवा साल बाद भी सरकार इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पा रही है. सरकार के जिम्मेदारों से जब भी शराबबंदी को लेकर सवाल पूछा जाता है तो सरकार का रटा-रटा जवाब की हमारा घोषणा पत्र पांच सालों के लिए है एक सालों के लिए नहीं, समय रहते उचित निर्णय लिया जाएगा. मगर पूर्व विधायक और वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष  विरेंद्र पाण्डेय की मानें तो जीएसटी लागू होने के बाद राज्य सरकार के लिए पूर्ण शराबबंदी का निर्णय लेना कठिन कार्य हैं क्योंकि सरकार जहां एक ओर सरकार की राजस्व प्राप्तियां कम होते जा रही है,  वहीं दूसरी ओर शराब से सालाना पांच हजार करोड़ रूपए के करीब कमाई होती है, जिसे त्यागना सरकार के लिए लोहे के चने चबाने जैसा है और यहीं प्रमुख कारण है कि शराबबंदी पर संशय की स्थिति बनी हुई है.








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First published: February 18, 2020, 7:32 PM IST
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