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छत्तीसगढ़ में धान खरीदी पर संकट, केंद्र सरकार ने चावल खरीदने से किया इनकार

Mamta Lanjewar | News18 Chhattisgarh
Updated: October 26, 2019, 2:00 PM IST

बीजेपी (BJP) का कहना है कि क्या केंद्र से पूछकर राज्य सरकार ने अपना घोषणा पत्र तैयार किया था. मालूम हो कि छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने वाली है. वहीं इसके पहले केंद्र की एक चिट्ठी से इस पर संशय के बादल छाने लगे है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में धान खरीदी (Paddy Purchase) पर संकट मंडरा रहा है. छत्तीसगढ़ सरकार के किसानों को धान का बोनस देने और  2500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदे जाने के विरोध में केन्द्र ने राज्य से चावल लेने से मना कर दिया है. केन्द्र के इस निर्णय के बाद कांग्रेस (Congress) ने केंद्र को नसीहत दी है कि वह धमकाए नहीं. तो वहीं बीजेपी (BJP) का कहना है कि क्या केंद्र से पूछकर राज्य सरकार ने अपना घोषणा पत्र तैयार किया था. मालूम हो कि छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने वाली है. वहीं इसके पहले केंद्र की एक चिट्ठी से इस पर संशय के बादल छाने लगे है.

सरकार ने तय किया था ये लक्ष्य

बता दें कि राज्य सरकार ने इस बार 87 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है. बताया गया है कि पिछले साल तक केन्द्र सरकार छत्तीसगढ़ से अरवा और उसना चावल मिलाकर 24 लाख मीट्रिक टन चावल खरीद रही थी, जिसे राज्य सरकार 32 लाख टन करने की मांग कर रही थी. लेकिन केन्द्र सरकार ने खरीदी का कोटा बढ़ाने की बजाय खरीदी पर ही रोक लगा दी है. छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी से पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी. इसमें धान खरीदी के लिए 2500 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तय करना अगर केंद्र के लिए संभव न हो तो राज्य सरकार को इस मूल्य पर खरीदी के लिए केंद्र सरकार से सहमति देने का अनुरोध किया गया था. विकेंद्रीकृत खाद्यान्न उपार्जन योजना के तहत यह सहमति देने की गुजारिश की गई था.

सीएम भूपेश बघेल ने लिखी थी चिट्ठी

सीएम भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) ने खत में अतिरिक्त उत्पादन वाले अरवा और उसना चावल को केंद्रीय पूल में मान्य करने का भी अनुरोध किया था. मुख्यमंत्री ने कहा था कि धान खरीदी के लिए समय कम है. इसलिए किसानों के हित में जल्द आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाने चाहिए. उन्होंने लिखा था कि राज्य सरकार हर साल लगभग 80 से 85 लाख मीट्रिक टन धान खरीदती है. सरकार ने इस बार 87 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है.

केंद्र सरकार ने की ये  बात

वहीं, धान खरीदी शुरू होने से पहले ही केन्द्र ने चिट्ठी लिखकर कहा है कि यदि राज्य सरकार इसी तरह किसानों को बोनस देगी तो वो धान नहीं खरीदेगी. इस पत्र ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि राज्य में लगभग 38 लाख मीट्रिक टन धान की खपत होती है. इससे ऊपर खरीदी जाने वाली लगभग 49 लाख मीट्रिक टन धान का सरकार क्या करेगी, इसे लेकर चिंता बढ़ गई है. इससे अरवा और उसना मिलाककर लगभग 34 लाख मीट्रिक टन चावल बनेगा. अब अगर केन्द्र सरकार इसे नहीं लेगी तो फिर इस चावल का वह क्या करेगी,  ये एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.
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राजनीति भी जोरों पर 

धान खरीदी मामले में अब राजनीति भी शुरू हो गई है. इस मसले पर कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि धान खरीदी को लेकर केंद्र सरकार धमका रही है. पत्र भेजकर कह रही है कि अगर बोनस दिया गया तो चावल नहीं खरीदेंगे. ये रवैया किसान विरोधी. हमारी सरकार 2500 रुपए क्विंटल ही धान खरीदगी. तो वहीं बीजेपी सांसद सुनील सोनी का कहना है कि क्या राज्य सरकार ने केंद्र से पूछकर अपना घोषणा पत्र तैयार किया था? केंद्र सरकार के पास केवल छत्तीसगढ़ नहीं बल्कि और भी राज्यों की जिम्मेदारी है.

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First published: October 26, 2019, 1:31 PM IST
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