BJP में छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष के लिए दिल्ली दौड़ तेज, कांग्रेस ने जताई ये उम्मीद
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BJP में छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष के लिए दिल्ली दौड़ तेज, कांग्रेस ने जताई ये उम्मीद
BJP ने राज्यसभा चुनाव के लिए 8 राज्यों में 9 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की.

बीजेपी आलाकमान छत्‍तीसगढ़ में किसे प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बिठाएगी यह अभी तक तय नहीं हो पाया है. वहीं, बीजेपी (BJP) के वरिष्ठ नेता दिल्ली दरबार में भी कई बार अपनी हाजरी लगा चुके हैं.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में बीजेपी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष पद की कुर्सी पर कौन बैठेगा, यह अभी तक तय नहीं हो पाया है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता दिल्ली दरबार में भी कई बार अपनी हाजरी लगा चुके हैं. बावजूद इसके अभी तक आलाकमान ने अपनी अंतिम मुहर नहीं लगाई है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी भी रहे हैं तो वह अच्छी तरह से जानते हैं कि यहां पर किसे बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाया जाए. बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए जिन नामों की चर्चा है, उनमें सबसे आगे पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री विष्णुदेव साय बताए जा रहे हैं.

विष्णुदेव साय पहले भी बीजेपी के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं. इसके बाद राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय और दुर्ग सांसद विजय बघेल के नामों की चर्चा है. पार्टी के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य रामविचार नेताम, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, नारायण चंदेल, बिलासपुर सांसद अस्र्ण साव का नाम भी शामिल है. दूसरी तरफ, कांग्रेस ने बीजेपी पर प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय न कर पाने पर तंज कसा है.

'विपक्ष की भूमिका में असफल'
छत्तीसगढ़ पीसीसी महामंत्री शैलेष नितिन त्रिवेदी कहते हैं कि बीजेपी विपक्ष की भूमिका निभा पाने में असफल रही है. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विकास तिवारी कह रहे हैं कि बीजेपी का आदिवासी चेहरा खुल कर सामने आ रहा है. लगातार प्रदेश में संपन्‍न हुए विधानसभा चुनाव, नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में सुपड़ा साफ होने के बाद पूर्व सीएम रमन सिंह धरम लाल कौशिक ने ठीकरा आदिवासी नेता विक्रम उसेंडी पर फोड़ दिया है. अगर हार ही प्रदेश अध्यक्ष के बदलाव का पैमाना है तो विधानसभा की करारी हार के पूर्व सीएम और तत्ताकालीन प्रदेश अध्यक्ष नेता प्रतिपक्ष को दोनों को संयास ले लेना चाहिए. इसके अलावा कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने मांग की है कि आदिवासी नेतृत्व विक्रम उसेंडी को अपना कार्यकाल पूरा करने का मौका दिया जाना चाहिए.



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