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छत्तीसगढ़ में पढ़ें: आठ आखर के पढ़ई, पोंगादास जब बदलगे

सांकेतिक फोटो.

सांकेतिक फोटो.

फुतकी (धूल) म खेले त कृष्ण भगवान कस लगे. महतारी के मया छलके तब दाई ह जसोदा दाई(माता) कस जनाय. काखर मया नान-नान लइका मन बर नइ होही. इही उमर म लइका मन बर सब से जादा मया उमड़थे.

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पोंगादास साक्षात् पोंगा हे. ओखर रोना-गाना, हँसना, गोठियाना सब पोंगा बाजे कस लगथे. नानकुन रिहिस तभे ले ओखर दाई ह ओला रोवत जान-सुन के कभू-कभू बहुत खिसिया जाय. घुसिया के कहि परे ये टूरा पोंगा होगे हे. पोंगा हो जाना मतलब लाउडीस्पिकर हो जाना. कभू-कभू हलाकान हो के ओखर दाई ओला कस के बजा घलो देय. ददा ह हँसवाय त टूरा ह अइसे हाँसे के रोवत कस लागे. मया करे के बेरा घर भर के मन ओला पोंगा बेटा कहें. ओखर बोली नरी- भर्राय कस लगे. फुतकी (धूल) म खेले त कृष्ण भगवान कस लगे. महतारी के मया छलके तब दाई ह जसोदा दाई(माता) कस जनाय. काखर मया नान-नान लइका मन बर नइ होही. इही उमर म लइका मन बर सब से जादा मया उमड़थे.

ब्रह्मा के लकीर
पोंगादास के ददा खुद चार आखर (अक्षर) पढ़े रिहिस. अपन पोंगा टूरा ल स्कूल म जब भरती करे बर गिस तब मास्टर जी टूरा के नाव पूछिस. ओखर ददा हर मास्टरजी ल बतइस के ये टूरा हर पैदा होते साठ किकिया के रोइस. अउ रोतेच राहय. दाई-ददा पाछू रिहिन पारा के मन ओखर नाव धर दिन पोंगादास. स्कूल के जनम रजिस्टर म घलो पोंगादास लिखागे. तब से ओखर नाव परमानेंट पोंगादास होगे. पहिली त स्कूल म भरती करे के बेरा जनम तिथि बर कोनो परमान-पत्र के जरूवत नइ परे. जेन जनम तिथि अउ नाव दाई-ददा मन बता दें या गुरू किरपा जइसे हो जाय तेंन जनम तिथि अउ नाव ब्रह्मा के लकीर बरोबर हो जाय.

आठ आखर के पढ़ई
पोंगादास के ददा चार आखर पढ़े रिहिस. खुद पोंगादास आठ आखर पढ़ के खेती किसानी के चकरी म फंसगे. फेर ओखर मन म उतार चढ़ाव आज तक हे. पढ़ लिख के गुरूजी नहीं तो बाबू अउ वुहू नहिं त पटवारी जी तो बने जा सकत रिहिस. फेर सब समे-समे के बात आय. कोनो कतको गोहार पारे. कखरो तकदीर के लेखा मेटे नइ मिटे. पोंगादास ह बड़ जुगाडू मनखे बनगे. ओला अपन सुवागत-सत्कार कराय के बड़ संउख रहिथे. ओखर बर ओहा बड़ उदीम करथे. चंदा दे के अपन नाव ल जुड़वा लेथे. फूल-हार देख के मन उत्साहित होथे. माइक देख के ओला खूब बोलासी-बोलासी लगथे. माइक म बोल नइ पाय सो बात धन्यवाद या जय जोहार म खतम हो जथे. कहीं न कहीं ओखर दबे भावना जोर मारथे. आजकल तो पथरा ल घलो पढाय के समे आगे हे.

घुरवा कस होगे
गाँव म गणेश पूजा, दुर्गा पूजा, काली माता के पूजा, माता-सेवा, जंवारा, दसेरा आदि म विशेष अतिथि बन के कार्यक्रम शोभा बढ़ाय बर पोंगादास नइ चुके. स्कूल के हर कार्यक्रम म ओखर योगदान होथे. फेर फूल-हर देख के ओखर मन ललचा जथे. एक दिन खबरीलाल ओला किहिस-भाई पोंगाजी पाछू जनम म तेंहा जरूर नेता-वेता रहे होबे. पोंगादास हाँसत-हाँसत किहिस-आप जइसे बड़े गियानी मन के संगत म मेंहा बहुत कुछ सिखत जावत हों. पोंगादास ल कतको झन जुगाड़दास कहि के ओखर खिल्ली उड़ाय. पोंगादास ल कखरो बियंग बान नइ लगे. ओहा हँस के बिगरे बोल ल सुधार लेवय. ओहा घुरवा कस होगे रिहिस. कभू रिसाय नइ दिखे. घर के उतार-चढाव ओखर मुख ल मलीन नइ कर पाय. मीठ बोले. कभू-कभू खिसियाय तब घर वाले मन ल लगे जइसे जीभ म फ़ांस गड़गे होय. फेर घर के बाहिर के मनखे बर ओखर नाराजगी लोगन नइ देख पांय. जिनगी के खेला अइसना घलो होथे.

गाँठ नइ हे
पोंगादास कखरो संग मै-मैं, तू-तू म नइ करे. ओला विचलित करे बर गाँव म कतको झन खूब उपाय करिन. पोंगादास अपन संग नता-गोता जोड़ डरिस. कोनो ल ममा, कोनों ल भांचा कोनों ल कका, कोनो ल भतीजा, बेटा-बेटी, छोटे दाई, बड़े दाई, मोसी, नोंनी, मामी ,काकी, फूलदाई आदि कहि के उनकर मान बढ़इस. एक दिन खबरीलाल ओला किहिस पोंगादास तोर म नेता बने के लक्षण दिखथे. अइसे कर तेंहाँ नेता बन जा. तोला(तुम्हें) अपन सुवागत-सत्कार के बड़ चिंता रहिथे. ओखर बर बड़ उदीम घलो करथस. थे. चंदा दे के अपन नाव ल जुड़वा लेथस, सब ठीक हे. फूल-हार देख के तेंहा उत्साहित हो जथस. माइक देख के खूब बोलासी आथे. फेर बोल नइ पावस. बोल पाना बानी (वाणी) के तपस्या होथे. मेंहा कथों पंचायत चुनाव लकठा हे. सरपंच चुनाव लड़ ले. तोर कखरो संग गाँठ नइ हे. तेंहा पक्का चुनाव जीत जबे. पोंगादास खबरीलाल के गोठ ल सुन के हँस परिस. पोंगादास किहिस-खबरी भइया आज के समे म पइसा बोलथे. पइसा जेखर तीर होथे तेंने बाजी मारथे. एक बात अउ हे के आज के मतदाता के उपर कतेक भरोसा करबे ? कहूँ धंसगेंव त हाहा, हीही होही. चार पइसा जोरे हंव तहू ह बोहा जही !! लइक मन के पढाय-लिखाय बर काम आही.

सुंदर व्यवहार के जीत
खबरीलाल किहिस-समे ल कोनो नइ जाने. समे ह उठाथे अउ गिराथे. बस अपन करम करते जाव. अच्छा करम के अच्छा फल मिलथे. बुरा करम के बुरा फल होथे. इही दुनिया के सच आय. फुलोय फुग्गा फूट जथे, ओसक जथे. मौक़ा अच्छा आवत हे. चुनाव जरूर लड़ना. बाकी सब भगवान उपर छोड़ देना. ओहा सबके खबर रखथे. समे अइस पोंगादास सरपंच के पद बर चुनाव लड़ीस. हाथ जोरिस. अपन बात किहिस अउ चुनाव जीत के सरपंच होगे. पइसा फूंकइया मन चुनाव हारगें. लोकतंत्र के इही तो कमाल हे. खबरीलाल किहिस- तोर फूल-हार परेम जिंदाबाद हे. ये तोर सुंदर व्यवहार के जीत हे. शक्ति (पावर) के घमंड नाश कर देथे येखर धियान रखना. पोंगादास ह खबरीलाल सहित जनता ल परनाम करिस. स्वतन्त्रता दिवस के दिन पंचायत म झंडा फहराइस. सब ग्राम प्रतिनिधि मन ल खुद फूल-हार पहिनइस. पंचायत म एकता अउ सुनता ले सब काम होय लागिस

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