ऐतिहासिक धरोहरों की होगी डिजिटल एंट्री, पुरातत्व विभाग तैयार कर रहा डाटा बेस

Surendra Singh | News18 Chhattisgarh
Updated: September 5, 2019, 7:19 PM IST
ऐतिहासिक धरोहरों की होगी डिजिटल एंट्री, पुरातत्व विभाग तैयार कर रहा डाटा बेस
पुरातात्विक धरोहरों की डिजिटल कुंडली बनाने में विभाग जुट गया है.

100 से ज्यादा प्रतिमाओं की नंबरिंग के बाद उनका सेंट्र्ल डाटा बेस (Central Data Base) बनाया जाएगा. इसके लिए इन सभी प्रतिमाओं (Statues) को चिंहांकित कर लिया गया है.

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मध्य भारत में बसे छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) अंचल ने अनगिनत पीढ़ियों से क्षेत्र की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों को सहेज कर रखा है. ये धरोहर इस क्षेत्र की पहचान है जो देश-विदेश के सैलानियों (Tourists) को अपनी ओर आकर्षित करती रही है. सूबे में मौजूद प्राचीन ऐतिहासिक प्रतिमा, स्मारक और धरोहरों को अब सहेजने के लिए पुरातत्व विभाग (Archaeology Department) ने एक नया प्लान तैयार किया है. अब इन पुरातात्विक धरोहरों (Archaeological heritage) की डिजिटल कुंडली (Digital Entry) बनाने में विभाग जुट गया है. जानकारी के मुताबिक 100 से ज्यादा प्रतिमाओं की नंबरिंग के बाद उनका सेंट्र्ल डाटा बेस (Central Data Base) बनाया जाएगा. इसके लिए इन सभी प्रतिमाओं (Statues) को चिंहांकित कर लिया गया है.



तैयार हो रहा सेंट्रल डाटा बेस

पुरातत्व विभाग के उपसंचालक राहुल सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में फिलहाल दो जगहों पर उत्खनन पुरातत्व विभाग द्वारा किया जा रहा है, जिसमें रीवा और जमरांव का इलाका शामिल है. अब विभाग सभी पुरातात्विक धरोहरों की डिजिटल एंट्री करने की तैयारी में है. एंट्री करने का काम पुरातत्व विभाग ने शुरू कर दिया है. आर्कोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की गाइडलाइन के मुताबिक संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की तरफ से प्रतिमाओं के साथ प्राचीन धरोहरों की नंबरिंग करने के साथ उनका सेंट्रल डाटा बेस बनाया गया है.

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प्रतिमाओं के साथ प्राचीन धरोहरों की नंबरिंग करने के साथ उनका सेंट्रल डाटा बेस बनाया गया है.


पुरातात्विक धरोहरों की होगी नंबरिंग

बता दें कि, इसके अलावा प्रदेश में स्मारकों को संरक्षित करने की भी पूरी तैयारी की जा रही है. फिलहाल राज्य स्तर पर 58 संरक्षित स्मारक हैं और 45 स्मारक स्थल ऐसे है जिसे केन्द्र शासन ने संरक्षित किया है. पुरातत्व विभाग के उपसंचालक राहुल सिंह का कहना है कि सुरक्षा दायरे में ऐसी प्रतिमाओं को शामिल किया गया है जो डेढ़ हजार साल तक पुरानी है. ये प्रतिमाएं खुदाई के बाद जामीन की कोख से बाहर निकाली गई है. प्रदेश में ऐतिहासिक दुर्लभ प्रतिमाओं में 23वें तीर्थकर पाश्वनाथ की प्रतिमा, धनपुर फरसपाल ऐतिहासिक गणेश प्रतिमा, प्राचीन टीला स्थित बुद्ध प्रतिमा, रतनपुर महामाया देवी प्रतिमा, समेत कई प्रतिमाओं को शामिल किया गया है.
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First published: September 5, 2019, 6:24 PM IST
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