CM की बहू को अस्पताल में VIP ट्रीटमेंट देते वक्त जोखिम में थी दूसरी गर्भवतियों की जान!

जिस सरकारी अस्पताल में सीएम डॉ. सिंह की बहू को प्रसूति के दौरान फाइव स्टार सुविधाएं मिलीं, उसी में गरीब परिवार की गर्भवती महिलाओं की जान से खिलवाड़ किया जा रहा था.

News18India
Updated: November 14, 2017, 7:40 PM IST
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भले ही खुद को प्रदेश का आम आदमी बताते हैं और अपनी बहू ऐश्वर्या सिंह की डिलीवरी के लिए रायपुर के एक सरकारी अस्पताल को चुनकर उन्होंने इसकी मिसाल भी दी. इसके चलते पूरे प्रदेश में सीएम डॉ. रमन सिंह की खूब प्रशंसा भी की गई, लेकिन जिस सरकारी अस्पताल में सीएम की बहू को प्रसूति के वक्‍त वीआईपी ट्रीटमेंट मिला, उसी वक्त सामान्य और गरीब परिवार की गर्भवती महिलाओं की जान के साथ अस्पताल प्रशासन खिलवाड़ करता नजर आया.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के बेटे और भाजपा सांसद अभिषेक सिंह की पत्नी ऐश्वर्या ने रायपुर के डॉ. भीमराव अम्बेडकर शासकीय अस्पताल में 11 नवंबर 2017 को बेटी को जन्म दिया. सूबे के मुख्यमंत्री होने के बावजूद डॉ. सिंह ने अपनी पुत्रवधु की डिलीवरी एक सरकारी अस्पताल में करवाकर पूरे राज्य के नेताओं और मांत्रियों के समक्ष एक मिसाल कायम की.

सूत्र बताते हैं कि जिस सरकारी अस्पताल की दूसरी मंजिल को मुख्यमंत्री की बहू ऐश्वर्या की डिलीवरी के लिए सारी सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण कर उस मंजिल पर किसी का भी प्रवेश निषेध कर दिया गया. उसी अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर सामान्य वार्ड में अस्पताल प्रशासन महिलाओं की जान के साथ खिलवाड़ करता नजर आया. इस संबंध में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें अम्बेडकर अस्पताल में जिस वक्त सीएम की बहू को डिलीवरी के लिए भर्ती कराया गया था. उसी वक्त दूसरी गर्भवती महिलाओं की जान के साथ खिलवाड़ करते दिखाया गया है.

आंबेडकर शासकीय अस्पताल के वार्ड-3 में एक ही बेड पर दो गर्भवती महिलाओं को भर्ती कर दिया गया.
समरीन देवांगन और दुर्गा फरिहार नाम की उन दोनों महिलाओं की डिलीवरी एक-दो दिन बाद हुई. दोनों को सावधानीपूर्वक चिकित्सा सुविधाएं देने की बजाय अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें एक ही बेड पर सुला दिया.

अस्पताल में एक बेड पर लेटी दो गर्भवती महिलाएं.


आलम यह था कि जब दोनों एक साथ बेड पर लेटतीं तो एक-दूसरे के धक्के से गर्भ को नुकसान पहुंचने का खतरा हो जाता. समरीन ने बताया कि ऐसी परिस्थिति आने पर दोनों में से किसी एक को नीचे लेटना पड़ता था. अस्पताल के डॉक्टरों को बार-बार बताने पर भी कोई मदद नहीं मिली. उल्टा अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि ऐसे ही सोओ.

अस्पताल के वार्ड-3 के हर बेड की स्थिति लगभग एक जैसी ही थी. हर बेड पर 2-2 गर्भवती महिलाओं को सुलाया गया था. इसके अलावा इसी वार्ड से लगे हुए वार्ड-4 का हाल भी ऐसा ही देखने को मिला. इस वार्ड में डिलीवरी के बाद महिलाओं को लाकर रखा जाता है. इस वार्ड में भी लगभग हर बेड पर 2-2 महिलाओं को एक साथ रखा गया.

इसी वार्ड में भर्ती निशा परवीन ने बताया कि डिलीवरी के बाद काफी दर्द हो रहा था. एक बेड पर दो-दो महिलाओं को लाकर रखा गया, जिससे तकलीफ और बढ़ गई. लगभग यही हाल दूसरी महिलाओं का भी था.

अम्बेडकर शासकीय अस्पताल, रायपुर के अ​धीक्षक विवेक चौधरी का कहना है कि यह सही है कि एक बेड पर दो-दो महिलाएं हैं. महिलाओं को तकलीफ भी हो रही है, लेकिन क्या करें 700 मरीजों की जगह है और अस्पताल में 1200 मरीज भर्ती हैं. मुख्यमंत्री की बहू के लिए पूरे अस्पताल की दूसरी मंजिल को फाइव स्टार सुविधाओं में तब्दील करने के सवाल पर अधीक्षक विवेक ने कहा कि कोई एक मरीज ऐसा बता दीजिए, जिसे इलाज न मिला हो और यह तो बड़े गर्व की बात है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हम पर विश्वास जताया.
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