Lockdown में घरेलू हिंसा : ऐसी छोटी-छोटी वजहों से हो रहे झगड़े कि जान कर आप भी रह जाएंगे हैरान...
Raipur News in Hindi

Lockdown में घरेलू हिंसा : ऐसी छोटी-छोटी वजहों से हो रहे झगड़े कि जान कर आप भी रह जाएंगे हैरान...
लॉकडाउन के दौरान बिहार में घरेलू हिंसा के मामले बढ़े (प्रतीकात्मक फोटो)

छत्तीसगढ़ की जानी मानी मनोविज्ञानी और काउंसलर डॉ. अंबा सेठी कहती हैं कि 'पहले पति-पत्नी या परिवार के अन्य सदस्यों की व्यस्तता और एक दूसरे को समय न दे पाने के लिए झगड़े होते थे, लेकिन लॉकडाउन में एक दूसरे के साथ ज्यादा समय बीताने के कारण झगड़े हो रहे हैं. ऐसे में हमें सोचना चाहिए कि जब घर में खुश नहीं हैं तो दुनिया में कहां खुश रह सकते हैं.'

  • Share this:
रायपुर. लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा (Domestic violence) के मामले बढ़े हैं. छोटी-छोटी बात पर महिलाएं हिंसा की शिकार बन जा रही हैं. खुर्शीपार में एक छोटे भाई ने अपनी बड़ी बहन को महज इसलिए पीट दिया कि उसने मांगने पर प्याज नहीं दिया था. इसी तरह एक सरकारी शिक्षक बिना किसी बात के अपनी पत्नी से मारपीट करता था.

केस स्टडी 1 : खुर्शीपार वाले मामले में छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दुर्ग जिले के खुर्शीपार पुलिस (Police) थाना के प्रभारी सुरेन्द्र उइके कहते हैं - '30 अप्रैल को थाने में एक महिला का फोन आया. उनकी शिकायत थी कि उन्हीं के छोटे भाई ने उनके साथ मारपीट की है. मारपीट का कारण सुनकर हम हैरान थे. शिकायत में महिला ने बताया कि छोटे भाई ने चिकन पकाने के लिए उससे ज्यादा प्याज की मांग की, प्याज कम होने से उसने देने से मना कर दिया. इसी बात पर छोटे भाई ने उनके साथ मारपीट की, जिसमें उन्हें चोट भी आई. जांच के बाद 1 मई को आरोपी छोटे भाई के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया.'

केस स्टडी 2 : बिलासपुर हाई कोर्ट (Bilaspur High Court) में अधिवक्ता व समाजसेवी प्रियंका शुक्ला ने न्यूज 18 से बताया - '1 मई की शाम को उनके पास कॉल आई कि मोपका के अरपा विहार में रहने वाला एक सरकारी शिक्षक अपनी पत्नी को मार रहा है. पत्नी को खून की उल्टियां हो रही हैं. जब हम वहां पहुंचे तो पता चला कि दहेज और बच्चा न होने का ताना देकर पहले से ही पति और उसके परिवार वाले महिला को तंग करते थे, लेकिन लॉकडाउन में घर में ज्यादा समय तक रहने के कारण ये हिंसा और भी बढ़ गई. मामले की शिकायत पुलिस थाने में कर दी गई है.'



चुप्पी तोड़ अभियान
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरिफ शेख कहते हैं - 'लॉकडाउन के कारण घरेलू हिंसा की शिकार हो रही महिलाएं अपनी शिकायत लेकर थाने तक नहीं आ पा रही हैं. इसलिए रायपुर पुलिस की ओर से चुप्पी तोड़ अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत वाट्सऐप, कॉल, ईमेल समेत अन्य माध्यमों से शिकायत दर्ज की जा रही है. न सिर्फ महिलाएं बल्कि घरेलू हिंसा के शिकार हो रहे पुरुष भी शिकायत कर रहे हैं. प्रकरण की गंभीरता के आधार पर जल्दी से जल्दी उसे हल किया जा रहा है.'

हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए यह हेल्‍पलाइन सुबह 10 से रात 10 बजे तक काम कर रही है.
सांकेतिक फोटो.


..तो कहा- अलग करवा दीजिए
रायपुर पुलिस के चुप्पी तोड़ अभियान की मॉनिटरिंग कर रहीं एएसपी अमृता सोरी न्यूज 18 से आंकड़े बताते हुए कहती हैं - 'हमने 29 अप्रैल से ये अभियान शुरू किया है और 3 मई तक 170 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं. हर शिकायत पर हमारी टीम प्रतिक्रिया देती है और जरूरत के आधार पर कार्रवाई की जाती है. ज्यादातर मामलों में मामूली बातों पर ही लोग झगड़ रहे हैं.'

एक केस का जिक्र करते हुए एएसपी सोरी कहती हैं- 'पुरानी बस्ती रायपुर से एक 60 वर्षीय महिला की कॉल आई, वे और उनके पति दोनों ही प्रोफेसर हैं. लॉकडाउन के कारण दोनों का अब पूरा समय घर पर बीत रहा है. ऐसे में चिड़चिड़ाहट बढ़ गई है. महिला का कहना था कि उनके पति बार बार विवाद करते हैं. इसलिए 17 मई तक या जब तक लॉकडाउन है, तब तक उनकी किसी होटल या कहीं और अलग रहने की व्यवस्था कर दी जाए.' अमृता बताती हैं कि 'रायपुर में ही जनवरी 2020 से 14 मार्च तक 130 प्रकरण दर्ज किए गए. जबकि लॉक​डाउन के शुरुआती 40 दिनों में 60 प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं.'

COVID-19 Alert, Corona Virus, Chhattisgarh Police, lockdown, photo being viral, छत्तीसगढ़ पुलिस, पोस्टर, कोरोना वायरस, कोविड, अलर्ट, लॉकडाउन, Women locked in blockade, महिलाओं ने की नाकाबंदी, रायपुर, stay at home: the story of women, घर में रहना, लॉकडाउन' में जिंदगी
News 18 Creative.


घरेलू हिंसा और छत्तीसगढ़
महिला हेल्पलाइन (181) के माध्यम से छत्तीसगढ़ में दर्ज शिकायतों की संख्या पर गौर करें तो 25 जून 2016 से 23 अप्रैल 2020 तक 8 हजार 872 ​शिकायतें दर्ज हुईं. इनमें अकले 2 हजार 990 मामले घरेलू हिंसा से जुड़े हैं. 181 महिला हेल्पलाइन व सखी वन स्टॉप सेंटर रायपुर की अधीक्षक प्रीति पांडेय ठाकुर बताती हैं कि '1 जनवरी से 2020 से 30 अप्रैल तक घरेलू हिंसा की 77 शिकायतें दर्ज की गई हैं. कई मामलों में तो पीड़िता के साथ गंभीर रूप से मारपीट की गई. सखी सेंटर में महिला हिंसा के अन्य 70 शिकायतें भी इस बीच दर्ज की गईं.'

दु:ख के कारणों का पता लगाएं?
छत्तीसगढ़ की जानी मानी मनोविज्ञानी और काउंसलर डॉ. अंबा सेठी कहती हैं कि 'पहले पति-पत्नी या परिवार के अन्य सदस्यों की व्यस्तता और एक दूसरे को समय न दे पाने के लिए झगड़े होते थे, लेकिन लॉकडाउन में एक दूसरे के साथ ज्यादा समय बीताने के कारण झगड़े हो रहे हैं. ऐसे में हमें सोचना चाहिए कि जब घर में खुश नहीं हैं तो दुनिया में कहां खुश रह सकते हैं.'

समझाने के अंदाज में डॉ. सेठी कहती हैं- 'कई बार हमको गुस्सा दूसरे लोगों पर रहता है, लेकिन निकलता​ किसी और पर है. कई लोगों को नशे की आदत थी, लेकिन लॉकडाउन में उनकी जरूरत पूरी नहीं हुई. इसलिए परिवार वालों पर गुस्सा निकाल रहे हैं. कई मामलों में दफ्तर का तनाव होने के कारण गुस्सा वहां नहीं निकाल पा रहे हैं, तो घरों में ही उसे निकाल रहे हैं. थोड़ा धैर्य व शांत मन से लोगों को सोचना चाहिए कि उनके अंदर गुस्सा किस बात को लेकर है. अंदर से दु:खी होने का असर बाहर दिखता हैं. अंदर के दु:ख का कारण पता लगते ही उससे निजात पाने का हल निकलेगा. इससे आपसी तनाव भी नहीं होगा.'

ये भी पढ़ें:
छत्तीसगढ़: अफसरों के ​इस निर्णय से फैला संक्रमण का दायरा, ग्रीन जोन बनेगा कोरोना का हॉटस्पॉट?

Lockdown 2.0: 'मजदूर हूं... लेकिन रोटी ही नहीं परिवार से भी प्यार है साहब'
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज