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Eid ul Fitr 2020: मस्जिद नहीं अब घर से पढ़ी जाएगी चाश्त की नमाज, हुई ये अपील
Raipur News in Hindi

Mamta Lanjewar | News18 Chhattisgarh
Updated: May 21, 2020, 5:44 PM IST
Eid ul Fitr 2020: मस्जिद नहीं अब घर से पढ़ी जाएगी चाश्त की नमाज, हुई ये अपील
लॉकडाउन के नियमों का पालन करने की नसीहत दी गई है. (फ़ाइल तस्वीर)

हालांकि न्यूज 18 से खास बातचीत में रिजवी ने कहा कि इस बार ईद की नमाज नहीं हो पाएगी क्योंकि इसे मस्जिद या ईदगाह में करना जरूरी होता है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisagrh) में कोविड 19 के रोकथाम के लिए जारी लॉकडाउन (Lockdown) के बीच मुस्लिम समाज में चिंता इस बात को लेकर थी कि इस बार ईद की नमाज कैसे की जाए क्योंकि अभी की स्थिति में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भी जरूरी है. यही वजह है कि रमज़ान के पवित्र माह का अलविदा जुमा, शबे कद्र और ईदुल फ़ित्र की नमाज के सम्बन्ध में शहर के सभी मस्जिदों के ईमाम हजरात, मुतवल्ली हजरात के साथ छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सलाम रिजवी ने एक बैठक की.

इस बैठक में यह निर्णय लिया गया की सभी मुसलमान अपने-अपने घरों में रह कर नमाज़ अदा करेंगे. मस्जिद, दरगाह, और कब्रस्तान में भीड़ जमा नहीं करेंगे. हालांकि न्यूज 18 से खास बातचीत में रिजवी ने  कहा कि इस बार ईद की नमाज नहीं हो पाएगी क्योंकि इसे मस्जिद या ईदगाह में करना जरूरी होता है.  साथ ही इसके बाद एक खास तरह का प्रवचन जिसे ख़ुदबा कहते हैं होना जरूरी होता है. यही वजह  है कि लोग ईद की नमाज के बदले घर से चाश्त की नमाज पढ़ेंगे.

जाहिर तौर पर इस बैठक में बहुत ही अहम फैसला लिया गया की प्रतिवर्ष की भांति  इस वर्ष नमाज़ मस्जिदों में न पढ़कर अपने अपने घरों में पढ़ा जाएगा. सलीम रिजवी ने न्यूज 18 से कहा कि उन्होंने बचपन से आज तक ईद की नमाज मस्जिद में ही पढ़ी थी. वहीं उनके बुजुर्गों ने भी ऐसा समय कभी नहीं देखा था. हालांकि अब कोरोना के संक्रमण को देखते हुए ऐसा करना जरूरी है. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सभी मुसलमान शबे कद्र, अलविदा जुमा और ईदुल फितर की नमाज में भी लॉकडाउन के नियमों का पूरी तरीके से पालन करें.



ऐसे पढ़ी जाएगी नमाज



बैठक में ईदुल फितर की नमाज के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई. इस दौरान मुफ्ती हजरात ने शरीअत की रौशनी में बताया कि लॉकडाउन के दौरान ईद की नमाज घर में नहीं पढ़ सकते हैं. लॉकडाउन और धारा-144 लागू है. ऐसी सूरत में ईद की नमाज हम लोगों पर वाजिब नहीं है. ईद की नमाज की कज़ा भी नहीं है. मुफ्ती हजरात ने बताया कि जुमा की नमाज के बदले नमाजे जोहर तो उसका बदल है. लेकिन ईद की नमाज पर कोई बदल नहीं है. ईद की नमाज न पढ़ सके तो बेहतर यह है कि वह चाश्त की नमाज सूरज निकलने के बीस मिनट के बाद से लेकर ज़वाल के पहले तक अदा कर सकता है. दो रकाअत चाश्त की नमाज का तरीका नफिल नमाज के जैसा है. चाश्त नमाज कम से कम दो रकाअत और ज्यादा से ज्यादा 12 रकाअत है.

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First published: May 21, 2020, 5:42 PM IST
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