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मीना खलखो हत्याकांड: आदिवासी लड़की को किसने मारा? पढ़ें- बेरहमी, लापरवाही और लाचारी के 'दस्तावेज'

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में साल 2011 में आदिवासी लड़की मीना खलखो की बेरहमी से हत्या का मामला पूरे देश में चर्चा का विषय था. न्यूज 18 क्रिएटिव.

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में साल 2011 में आदिवासी लड़की मीना खलखो की बेरहमी से हत्या का मामला पूरे देश में चर्चा का विषय था. न्यूज 18 क्रिएटिव.

2 राज्यों की सीमा पर बसा एक गांव, 16 साल की आदिवासी लड़की शाम को सहेली के घर जाने के लिए निकलती है, लेकिन रातभर नहीं लौटती. सुबह लड़की के परिवार वालों को पता चलता है कि उनकी बेटी नक्सलियों के संगठन से जुड़ी थी. देर रात पुलिस से मुठभेड़ में लड़की बुरी तरह घायल हुई, अस्पताल ले जाते समय मर गई. परिजनों द्वारा पुलिस वालों पर ही रेप कर बेरहमी से हत्या का आरोप लगाना. राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का घटना स्थल पर दौरा, विपक्ष का हंगामा, सरकार की किरकिरी, जांच आयोग का गठन, पुलिस वालों पर हत्या का संदेह, सीआईडी जांच, 3 पुलिस वालों पर नामजद एफआईआर और फिर वारदात के करीब 11 साल बाद सबूतों के अभाव में आरोपी बरी. पढ़ने में किसी फिल्म की स्क्रिप्ट की तरह लगने वाली ये कहानी, कहानी नहीं बल्कि हकीकत है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा पर बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के करचा गांव की तस्वीर 10 साल में काफी कुछ बदली बदली नजर आती है. गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क, पंचायत भवन, स्कूल देखकर लगता है कि विकास धीरे-धीरे ही सही, लेकिन गांव तक पहुंच रहा है. चांदो पुलिस थाना क्षेत्र के इस गांव में मीना खलखो के घर का पता आसानी से कोई भी बता देता है. खपरैल की छत वाले कच्चे मकान में दरवाजे के पास फूटी हुई मटकियां टंगी हैं.

द्वार पर ही बैठे मीना के पिता बुद्धेश्वर उरांव सरगुजिया बोली में कहते हैं, ‘साहब! पुलिस वालों ने ही मीना को मारा था. मीना अपनी सहेली कीर्ति के घर साइकिल से गई थी. रात में वापस नहीं आई. सुबह एक साहब आए और बताया कि मीना को पुलिस वाले मार दिए हैं. हमें बलरामपुर चीरघर ले जाया गया. वहां हमने शव देखा. छाती से कमर तक उसे कई गोलियां लगी थीं. गुप्तांग पर चोट के निशान थे. मीना को रातभर पुलिस वालों ने रोककर रखा था. उसके साथ बलात्कार किया और उसके बाद उसे गोली मारी.’ बुद्धेश्वर की बातें और कोर्ट में दिए उनके दिए बयान को यदि पढ़ें तो न के बराबर ही अंतर नजर आता है.
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आरोपी बरी हो गए और पता भी नहीं चला
घटना को याद करते हुए बुद्धेश्वर कहते हैं, ‘बलरामपुर, अंबिकापुर, रायपुर तक पुलिस पूछताछ, कोर्ट में बयान के लिए कई चक्कर लगाए. मीना की मौत के बाद सरकार ने दो बार 2 लाख और एक बार 3 लाख रुपये दिए थे. ज्यादातर पैसे कोर्ट, पुलिस और कोर्ट में बयान के लिए आने-जाने में ही खर्च हो गए. रायपुर यहां से 500 किलोमीटर से ज्यादा दूर है. कई गाड़ियां बदलनी पड़ती हैं. कोर्ट में भी मैंने बताया था कि पुलिस वाले बलात्कार करके मारे हैं. नक्सली से उसका कोई लेना-देना नहीं था.’

… लेकिन कोर्ट ने तो पुलिस वालों को बरी कर दिया? इस पर बुद्धेश्वर कहते हैं, ‘हां साहब तीन दिन पहले मीडिया वाले एक और साहब आए थे. उनसे ही पता चला कि पुलिस वाले छूट गए हैं. हमको सरकार की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई.’ बता दें कि रायपुर जिला कोर्ट की द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शोभना कोष्टा की अदालत ने बहुचर्चित मीना खलखो हत्याकांड मामले में अपना फैसला दे दिया है. 5 अप्रैल 2022 को इस मामले में फैसला सुनाया गया, जिसके आदेश की कॉपी मई के तीसरे सप्ताह में सार्वजनिक हुई.
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लाचारी: खाने के लाले हैं, और कितना लड़ेंगे?
बातचीत के बीच में ही मीना की मां कोतियारी भी आ जाती हैं. पुलिस वालों को बरी करने के फैसले के खिलाफ क्या ऊपरी अदालत में जाएंगे? इस पर कोतियारी कहती हैं, ‘हमसे नहीं हो पाएगा साहब! इतने साल तक पुलिस और अदालत के चक्कर लगाकर परेशान हो गए हैं.’ घर के अंदर से मुर्गे और बाहर बंधी बकरी की आवाज के बीच बुद्धेश्वर कहते हैं, ‘हमारे पास पैसा कहां है. खेती मजदूरी करते हैं. उससे कितना कमाएंगे. मीना के भाई को स्कूल में चपरासी बनाए हैं, उसको कितना पैसा मिलता है? उसका भी परिवार का खर्चा है. कोर्ट-कचहरी का खर्चा कहां उठा पाएंगे. हम पढ़े-लिखे नहीं हैं, हमको तो पता भी नहीं है कि अब मीना को न्याय के लिए कहां जाना होगा.’

इतने में रुंधे आवाज में कोतियारी कहती हैं, ‘मीना घर का पूरा काम कर लेती थी. अगर होती तो अब तक हम उसकी शादी कर दिए होते. उसके बच्चे भी हो गए होते. उन लोगों ने मार दिया. मीना की यादों को सहेजने के नाम पर हमारे पास उसकी कॉपी, किताब के अलावा एक बस एक छोटी फोटो है.’ वहीं मौजूद सारी बातें सुन रहे मीना के भाई रवींद्र कहते हैं, ‘कहां जाना होगा. कलेक्टर साहब को आवेदन देने से हो जाएगा? अब आगे क्या करना होगा?’

बेरहमी: 6 जुलाई 2011 की रात क्या हुआ?
7 जुलाई 2011 की सुबह तत्कालीन सरगुजा वर्तमान में बलरामपुर जिले के चांदो पुलिस थाना क्षेत्र के चेडरा नाले के किनारे एक लड़की घायल अवस्था में मिली. अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई. लड़की की पहचान पास के ही करचा गांव के आदिवासी परिवार की मीना खलखो उम्र 16-17 वर्ष के रूप में हुई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मृतका के बाएं स्तन, नाभि के नीचे, निजी अंग पर भी गंभीर चोट थी और एक से अधिक गोली मारी गई थी. पोस्टमार्टम 7 जुलाई की दोपहर करीब 2 बजे हुआ. पोस्टमार्टम होने से 8 से 10 घंटा पहले ही लड़की की मौत हो चुकी थी. लड़की के निजी अंगों से वीर्य के अंश भी मिले.
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तत्कालीन चांदो पुलिस थाना प्रभारी निकोदिम खेस ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि नक्सली लीडर बीरसाय के नेतृत्व में नक्सलियों की एक बड़ी टीम के झारखंड से उनके थाना क्षेत्र में प्रवेश और बड़ी वारदात की साजिश का इनपुट मिला था. इस सूचना के आधार पर 6 जुलाई 2011 की रात को टीम सर्च के लिए निकली. चेडरा नाले के पास नक्सलियों ने उनकी टीम पर हमला कर दिया. दोनों ओर से फायरिंग की गई और फिर नक्सली भाग गए. इसके बाद उजाला होने पर सर्चिंग की गई तो लड़की घायल अवस्था में मिली, उसके पास नक्सल सामग्री भी बरामद हुई. लड़की ने बयान में बीरसाय की टीम में शामिल होना बताया.

हंगामा, जांच आयोग और रिपोर्ट
मीना खलखो हत्याकांड छत्तीसगढ़ पुलिस पर लगे उन गंभीर आरोपों में शामिल है, जिसमें फर्जी मुठभेड़ के लिए राज्य सरकार की राष्ट्रीय स्तर पर खूब किरकिरी हुई. इस मामले में विपक्षी दल कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल से लेकर कई मानवाधिकार संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता घटना स्थल पर पहुंचे. विधानसभा से लेकर संसद तक मामले को उठाया गया. मामले की गंभीरता और हंगामा बढ़ता देख तब डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने मृतका के परिवार वालों को मुआवजा व एक सदस्य को सरकारी नौकरी का ऐलान किया. साथ ही जुलाई की इस घटना के बाद 29 अगस्त को इस मामले में न्यायाधीश अनीता झा के नेतृत्व में एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया.

तब मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की एक टीम ने भी घटना की फैक्ट फाइंडिंग की थी. उस टीम की सदस्य व आदिवासियों पर अत्याचार मामलों को हाई कोर्ट में गंभीरता से उठाने वाली अधिवक्ता रजनी सोरेन बताती हैं, ‘हम लोगों ने घटना स्थल, चश्मदीदों से बातचीत कर तब ही बता दिया था कि थाना प्रभारी का नक्सलियों के साथ मुठभेड़ का दावा फर्जी है. मीना खलखो के साथ ज्यादती कर बेरहमी से उसकी हत्या पुलिस वालों ने ही की है.’ हालांकि इस मामले के करीब 4 साल बाद साल 2015 में न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट आई. इसमें भी मुठभेड़ के दावे को फर्जी पाया गया और मीना खलखो की हत्या पुलिस वालों द्वारा किया जाना पाया गया.
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लापरवाही: जुर्म हुआ, लेकिन तथ्य कहां हैं?
न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट को आधार बनाकर राज्य सरकार फिर हरकत में आई. हत्याकांड में जांच का जिम्मा राज्य पुलिस की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीआईडी को सौंप दिया. महिला आईपीएस नेहा चंपावत के नेतृत्व में जांच शुरू की गई. 6 जुलाई 2015 को मामले में नामजद एफआईआर दर्ज की गई. आरक्षक धर्मदत्त धानिया और आरक्षक जीवनलाल रत्नाकर पर हत्या करने और तत्कालीन चांदो थाना प्रभारी निकोदिम खेस पर हत्या के साक्ष्य छुपाने के आरोप लगे. साक्ष्य छिपाने में सहयोग के लिए 13 अन्य पुलिस वालों पर भी जुर्म दर्ज किया गया, लेकिन उन्हें नामजद नहीं किया गया. लंबी जांच-पड़ताल के बाद सीआईडी ने राजधानी रायपुर की विशेष कोर्ट में चालान पेश किया. प्रकरण की सुनवाई के दौरान आरोपियों के खिलाफ सीआईडी ने करीब 35 गवाह पेश किए. जबकि आरोपियों ने बचाव में अपनी ओर से कोई गवाह पेश नहीं किया.

रायपुर जिला कोर्ट की द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शोभना कोष्टा ने मामले में सभी आरोपी पुलिस वालों को बरी कर दिया. 5 अप्रैल 2022 को दिए अपने इस फैसले में अदालत ने अहम टिप्पणी भी की. अदालत ने कहा, ‘इस प्रकरण में विवेचना के समय से ही विवेचना की कार्रवाई निम्न स्तर की रही है. विवेचना कार्रवाई के दौरान अभियोजन ने यह स्थापित नहीं किया है कि मृतका मीना खलखो की हत्या आरोपीगण को आवंटित शस्त्र एवं उन्हें प्रदत्त गोली के लगने से हुई है. अभियोजन ने मात्र साक्षियों की संख्या को अधिक दर्शाया है, परंतु विवेचना के दौरान कथित अपराध से संबंधित तथ्यों को स्थापित करने में वह पूर्णत: असफल रहा है. अभियोजन की लापरवाही के कारण इस प्रकरण में साक्ष्य का पूर्णत: अभाव रहा है, जिससे अभियुक्त संदेह के घेरे में आने पर भी दोषसिद्धि की ओर नहीं जा पा रहे हैं.’ बता दें कि प्रकरण में दोष मुक्त करार दिए गये हरियाणा के रहने वाले धर्मदत्त धानिया इन दिनों एनएसजी, गुड़गांव में तैनात हैं. दूसरे आरोपी जीवनलाल रत्नाकर, प्रधान आरक्षक रामानुजगंज में कार्यरत हैं. एक अन्य आरोपी तत्कालीन थाना प्रभारी निकोदिम खेस का जुलाई 2021 में निधन हो चुका है.
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मीना खलखो को किसने मारा?
मीना खलखो हत्याकांड को शुरू से ही कवर कर रहे छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार आलोक प्रकाश पुतुल कहते हैं कि इस मामले में फैसले की कॉपी को बारीकी से पढ़ना चाहिए. फैसले की कॉपी पढ़ने पर पता चलता है कि जांच में अभियोजन की ओर से ये तो बताया गया कि हत्या हुई है, लेकिन हत्या जिस बंदूक से हुई, वो किसे अलॉट थी? मृतका के शरीर से मिली गोलियां पुलिस की थीं या नक्सलियों की? मृतका के निजी अंगों पर वीर्य के अंश मिलना, लेकिन फॉरेंसिक जांच में पुरुष डीएनए की पुष्टि न होना. कई ऐसे तथ्य हैं, जिन्हें अभियोजन की ओर से साबित न कर पाना सवाल खड़े करते हैं. इस पूरे प्रकरण में बड़ा सवाल अब भी यही है कि आखिर मीना खलखो को किसने मारा? क्योंकि इसका जवाब अदालत के फैसले में भी नहीं है.

तथ्यों से छेड़छाड़, जांच पर सवाल
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में मानवाधिकार मामलों की पैरवी करने वाले अधिवक्ता डिग्री चौहान कहते हैं, ‘आदिवासी युवती मीना खलखो हत्याकांड में सबूतों के अभाव अथवा पुलिसिया जांच में लापरवाही के कारण आरोपी दोषमुक्त हुए. असल में यह मानव अधिकारों के प्रति राज्य सरकार की गैरजवाबदेही और प्रशासनिक तंत्र की विफलता दर्शाता है. जब संदेही और आरोपी ही राज्य की पुलिस हो, तब उसी जांच एजेंसी द्वारा स्वयं की जांच स्वयं द्वारा किया जाना ही अपने आप में कई सवालों को जन्म देता है. होना यह चाहिए था कि राज्य के नियंत्रण से बाहर किसी विशेष जांच दल द्वारा जांच कार्रवाई की जानी थी. इस मामले में पुलिस का अपने को निर्दोष साबित करने के लिए तथ्यों से छेड़छाड़ और गवाहों के भयादोहन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.’

ये भी पढ़ें:- मीना खलखो हत्याकांड: हत्या के आरोपी पुलिसवालों को बरी करते वक्त कोर्ट ने क्या कहा?

पीयूसीएल के प्रदेश अध्यक्ष की भी जिम्मेदारी संभाल रहे डिग्री का कहना है, ‘अब सरकार को चाहिए कि इस मामले की तुरंत अपील याचिका दायर करे. साथ ही जांच में पुलिस की लापरवाही भूमिका को लेकर एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल गठित करे.’ छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा, ‘मीना खलखो हत्याकांड में कोर्ट के फैसले की जानकारी मिली है. नियमानुसार आगे क्या कदम उठाने हैं, इस पर सरकार विचार करेगी.’

Tags: Chhattisgarh news, News18 Hindi Originals

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