छत्तीसगढ़ी में पढ़ें : छत्तीसगढ़ म फिल्म निर्माण के अपार संभावना, बनही फिल्म-सिटी

छत्तीसगढ़ी में पढ़ें.

छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी, गृह, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ताम्रध्वज साहू जी ह छत्तीसगढ़ म पर्यटन, संस्कृति-संरक्षण अउ फिल्म सिटी निर्माण के दिशा म गंभीरता से काम करत हें.

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छत्तीसगढ़ के संस्कृति अउ कला के संगे संग छ्त्तीसगढ़ी भाखा के विकास बर जरूरी हे के. छत्तीसगढ़ी म फिल्म निर्माण ल बढ़ावा मिले. वातावरण अनुकूल हे. इहां नदिया, पहाड़, अउ विशाल वन क्षेत्र म झरना, पुरातात्विक मन्दिर, खोह (गुफा), प्राकृतिक विविधता, जैव विविधता, सांस्कृतिक विविधता से भरल पूरल जनजीवन हे के. फिल्म बर बहुत अकन लोकेशन हे, जेन शानदार दृश्य से मन ल तिरथे, अउ मोहित करथे. छत्तीसगढ़ परदेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी, गृह, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ताम्रध्वज साहू जी ह छत्तीसगढ़ म पर्यटन, संस्कृति-संरक्षण अउ फिल्म सिटी निर्माण के दिशा म गंभीरता से काम करत हें. अंतर्राष्ट्रीय सिरपुर बौद्ध महोत्सव अउ शोध संगोष्ठी म प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल ह अपन उदबोधन म किहिस के सिरपुर, डोंगरगढ़ अउ मैनपाट ल बौद्ध नगरी के रूप म विकसित करे बर योजना के संगे-संग काम करके हमला अपन संस्कृति के धरोहर ल सकेल के रखना हे.

115 एकड़ म फिल्म सिटी

संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य के अनुसार छत्तीसगढ़ के कला, संस्कृति अउ परम्परा ल बढ़ावा दे बर नवा रायपुर अटल नगर म फिल्म सिटी के निर्माण करे जही. एखर बर 115 अक्कड़ जमीन के चिन्हारी करे गे हे. एखर संगे-संग नवा फिल्म नीति के रूपरेखा तियार करे जात हे. राज्य शासन स्तर म जल्दी निर्णय करे के संभावना हे. खबर के अनुसार नवा-रायपुर अटल नगर के सेक्टर-39 के तहत खंडवा गाँव में जमीन चिन्हित होय हे.

फिल्म उद्योग ल बढ़ावा

खबर के अनुसार फिल्म सिटी बने ले फिल्म उद्योग ल बढ़ावा मिलही. ओखर संगे संग संगीत स्कूल, कला केन्द्र, गायन, वादन, अभिनय, साउंड आदि के परसिक्षन सुविधा के व्यवस्था घलो होही. एखर ले स्थानीय कलाकार मन ल प्रशिक्षण लेय बर बाहिर जाय के जरूवत नइ परही. कलाकार मन एकाग्र हो के फिल्म निरमाण म जुट सकत हें. ये परयास बड़ रंग लाही. स्थानीय कलाकार मन के अलावा फिल्म निर्माण से जुड़े सबो परकार के कलाकार मन अपन कला-कौशल के विकास करे बर एक अच्छा माहौल मिलही.

रोजगार के अवसर

लोक कलाकार, साहित्यकार, शिल्पकार, सहित फिल्म निर्माण प्रक्रिया से जुड़े छोटे-बड़े बुता करइया मन ल रोजगार के अवसर मिलही. छत्तीसगढ़ राज्य के फिल्म निर्माता सहित दुसर राज्य के फिल्म निर्माता मन ये सुविधा ल देख के फिल्म-सिटी डाहर खिंचाहीं. खबर के अनुसार संस्कृति विभाग ह राज्य सरकार ल नि:शुल्क भूमि आबंटन कराय बर लिखा-पढी करे हे.

लोककला के इन्द्रधनुषी रंग

छत्तीसगढ़ म प्रतिभाशाली कलाकार मन के कमी नइ हे. लोककला के इहाँ इन्द्रधनुषी रंग हे. कलाकार मन म कला के प्रति भारी उत्साह हे. अच्छा फ़िल्मी वातावरण मिले ले उनकर प्रतिभा अउ निखरही.कला म नवा चमक-दमक आही. उन ल छत्तीसगढ़ी भाखा के मान अउ छत्तीसगढ़ी संस्कृति के मरियादा के धियान रखे बर परही. लगन अउ समर्पण से नवा रद्दा बनही.

कहि देबे संदेश

छत्तीसगढ़ के फ़िल्मी यात्रा ल सफलता अउ असफलता के संगे संग करीब पचास बरस होवत हे. मनु नायक के छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘कहि देबे संदेश’ ह पहिली छत्तीसगढ़िया फिल्म आय. ये फिल्म म छत्तीसगढ़ी गीत म संदेश होय के सेती एखर नाव ‘कहि देबे संदेश परिस. परेम के पटकथा उपर ये फिल्म फ़िल्माय गे हे. जेन ह खूब विवादित अउ चर्चित होइस. तत्कालीन म.प्र.सरकार ह ए फिल्म ल टैक्स-फ्री कर दिस.

झन मारो गुलेल...

ओखर बाद ‘घर द्वार’ फिल्म अइस. एखर निर्माता मुंबई (पहले बंबई) ले कलाकर, संगीतकार, अउ गायक लान के अपन फिल्म बनइस. सुप्रसिद्ध गायक मो.रफी अउ गायिका सुमन ‘घर द्वार’के गीत ल स्वर दिस. गीत के बोल रिहिस ..सुन-सुन मोर मया पीरा के संगवारी रे ..गोंदा फुलगे मोर राजा....अउ झन मारो गुलेल... आदि गीत बहुत लोकप्रिय होइस. ओखर बाद ‘छइहाँ भूइंया’ ‘राजा छत्तीसगढ़िया’, ‘लैला टीप-टाप’, ‘हंस झन पगली फंस जबे ‘आदि अनेक छत्तीसगढ़ी फ़िल्म बनिस. कुछ चलिस, कुछ नइ चलिस.

जाजल्यदेव’ अउ ‘बालार्जुन’ उपर ऐतिहासिक फिल्म बने

फिल्म-सिटी बने ले फिल्म बनाय बर जरूरी लागत बर फायनेंसर खोजे बर परही. कलाकार मन के कलात्मक निखार जरूरी हे. छत्तीसगढ़ी भाखा दिल ल छूथे. मन मोह लेथे. ओखर मिठास बने राहय. फिल्म के हर पक्ष लुभावना होय. सरकार ल शुरुआती पांच दस साल ले छूट दे बर लागही. प्रदेश के छत्तीसगढ़ी फिल्म प्रदर्शन बर सिनेमा-घर ल आदेशित करे के जरूअत हे. सिनेमाघर म छत्तीसगढी फिल्म ल जादा महत्व तभे मिलही. छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्माण के अपन इतिहास हे. छत्तीसगढ़ी म ऐतिहासिक फिल्म ले एक अच्छा शुरुआत करे जा सकत हे. डॉ. गणेश खरे द्वारा लिखित दु ऐतिहासिक उपन्यास ‘जाजल्यदेव’ अउ ‘बालार्जुन’ उपर बहुत अच्छा फिल्म बन सकत हे. इ दुनों उपन्यास हिंदी म हे ओखर छत्तीसगढ़ी म अनुवाद करके अच्छा शुरुआत करे जा सकत हे. छत्तीसगढ़ी फिल्म जनता ल आकर्षित करे एखर बर जनता के मन म विश्वास जगाय बर परही.

( डिसक्लेमर- ये लेखक के अपने विचार हैं.)

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