अजित जोगी ने एक-दो नहीं, बल्कि 7 बार दिया था मौत को चकमा
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अजित जोगी ने एक-दो नहीं, बल्कि 7 बार दिया था मौत को चकमा
इस बार जिंदगी की जंग हार गए अजीत जोगी

अपने जीवन काल में 7 बार मौत को मात देने वाले महारथी छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी (Ajit Jogi) का आज निधन हो गया.

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रायपुर. अपने जीवनकाल में 7 बार मौत को मात देने वाले महारथी एक सफल ब्यूरोक्रेट और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री (Former Chief Minister of Chhattisgarh) अजीत जोगी (Ajit Jogi) आज मौत से जंग हार गए. अदम्य जीजीविषा वाले अजीत जोगी का संकट से पुराना नाता रहा है. उन्होंने अपने जीवन में कई बार मौत से लोहा लिया और जीत कर लौटे लेकिन इस बार वो हार गए. उनके जीवन में सात बार ऐसे मौके आए जब मौत उनके पास से गुजर गई.

कई बार मौत से दो-दो हाथ
रिपोर्ट के मुताबिक अपनी शादी के दो सप्ताह पूर्व रीवा में कलेक्टर (Collector in Rewa) कॉन्फ़्रेंस के बाद अजीत जोगी सिनेमा देखने गए उसी दौरान वह पुष्प टॉकीज की दूसरी मंजिल से गिर गये थे, जिससे उनके दायें हाथ की कलाई टूट गई थी लेकिन वो बच गए. एक बार की बात है कि वो सीधी जिले में कलेक्टर थे.सीधी जिले के एक गांव में बाढ़ आयी और तत्कालीन कलेक्टर अजीत जोगी जीप सहित बह गए थे. लेकिन उन्हें अभी बहुत कुछ करना बाकी था इसलिए मौत को डाज देकर वो निकल आए. साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद इंदौर में राजवाड़े में लगी आग को बुझाते समय एक लकड़ी की बल्ली अजीत जोगी के सिर पर गिरने ही वाली थी, लेकिन संयोग से वो वहां बच गए और ठीक एक वर्ष बाद 1985 में इंदौर के बल्लभनगर में एक पेट्रोलियम डिपो हुआ करता था. एक दिन अचानक पेट्रोलियम डिपो में आग लग गई और अजीत जोगी जो कलेक्टर इंदौर (Collector Indore) थे, जान-माल का नुकसान रोकने के लिए खुद ही पेट्रोलियम डिपो में लगी आग को काबू करने के लिए कूद गये और आग बुझाने में लग गए लेकिन इस बार भी काल उनका बाल बांका न कर सका.

गर्दन की हड्डियां टूटी
साल 2004 में महासमुंद लोकसभा चुनाव के दौरान अजीत जोगी की क्वालिस गाड़ी रात 3 बजे मैनपुर के पास एक पेड़ से टकरा गई. इस गंभीर दुर्घटना में उनकी गर्दन के पास की हड्डियां टूट गई थीं. यह अजीत जोगी की पांचवीं बड़ी जंग मौत के साथ हुई थी. इस घटना के बाद अजीत जोगी के शरीर का निचला हिस्सा पैरालाइज्ड हो गया था और वो व्हील चेयर पर आ गए थे. 4 सितंबर 2005 को भी कुछ ऐसा ही मंजर आया जब अजीत जोगी का बीपी कंट्रोल में नहीं आ रहा था, तो लगा कि अब वो रिकवर नहीं कर पाएंगे लेकिन रिकवर हुए. साल 2013 की घटना मई महीने की, कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान बस्तर में चुनावी सभा थी. सभी नेताओं को वापस जगदलपुर आना था, लेकिन झीरम की घटना हुई. अजीत जोगी उन नेताओं के साथ ना आकर हवाई मार्ग से सभास्थल से वापस आ गये थे और इस बार भी वो बाल-बाल बच गए. और फिर साल 2018 में भी मौका ऐसा आया जब अजीत जोगी बहुत ही क्रिटिकल कंडीशन में पहुंच गए फिर उन्हें दिल्ली ले जाया गया, जहां उनका लंबा इलाज चला और वो ठीक हुए.



मौत को बार-बार मात देने वाला महारथी हार गया
लेकिन इस बार 9 मई 2020 को अजीत जोगी को कार्डियक अरेस्ट (cardiac arrest) आया. इस बार भी लग रहा था कि ये महारथी मौत को टाल देगा. हालांकि उनके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था और वो लाइफ सपोर्ट सिस्टम (Life support system) पर थे. उनका इलाज कर रहे डॉक्टर्स को उनके बचने की उम्मीद कम थी लेकिन उनको जानने वाले इस बार भी चमत्कार की उम्मीद कर रहे थे. 9 मई को उनको रायपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वो 19 दिन तक  मौत से जंग लड़ते-लड़ते आखिरकार हार गये. 29 मई 2020 की दोपहर 3.30 बजे ये मनहूस खबर आई कि मौत को बार-बार मात देने वाला महारथी हार गया.

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