पॉलिटिक्स के धुरंधर अजीत जोगी, ऐसा था 'सपनों के सौदागर' का राजनीतिक करियर
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पॉलिटिक्स के धुरंधर अजीत जोगी, ऐसा था 'सपनों के सौदागर' का राजनीतिक करियर
अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री हैं. (File Photo)

छत्तीसगढ़ की राजनीति के धुरंधरों में गिने जाते रहे अजीत जोगी (Ajit Jogi) को सपनों का सौदागर भी कहा जाता रहा है. अजीत जोगी ने खुद अपने आप को 'सपनों का सौदागार' बताया था.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के पहले मुख्यमंत्री अजीत प्रमोद कुमार जोगी (Ajit Jogi) का आज निधन हो गया. छत्तीसगढ़ की राजनीति के धुरंधरों में गिने जाते रहे अजीत जोगी को सपनों का सौदागर भी कहा जाता रहा है. अजीत जोगी ने खुद अपने आप को 'सपनों का सौदागार' बताया था. साल 2000 में जब अजीत जोगी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उन्होंने कहा था, ''हां, मैं सपनों का सौदागर हूं. मैं सपने बेचता हूं''. लेकिन 2003 में हुए विधानसभा चुनावों में अजीत जोगी को हार का सामना करना पड़ा. फिर 2008 में और 2013 में भी वो 'सपने' नहीं बेच पाए. अजीत जोगी के राजनीतिक सफर की बात करें तो उन्होंने शुरुआती दिनों में काफी चुनौतियों का सामना किया.

अजीत जोगी 1986 से 1998 के बीच दो बार राज्‍यसभा के सांसद चुने गए. 1998 में वे रायगढ़ से सांसद चुने गए. 1998 से 2000 के बीच वे कांग्रेस के प्रवक्‍ता भी रहे. छत्तीसगढ़ राज्‍य बनने के बाद वे 2000 से 2003 के बीच राज्‍य के पहले मुख्‍यमंत्री रहे. 2004 से 2008 के बीच वे 14वीं लोकसभा के सांसद रहे. 2008 में वे मरवाही विधानसभा सीट से चुन कर विधानसभा पहुंचे और 2009 के लोकसभा चुनावों में चुने जाने के बाद जोगी ने लोकसभा सदस्य छत्तीसगढ़ के महासामुंद निर्वाचन क्षेत्र के रूप में काम किया.  हालांकि जोगी 2014 के लोकसभा चुनावों में अपनी सीट बरकरार रखने में असफल रहे और बीजेपी के चंदू लाल साहू से 133 मतों से हार गए.

ऑडियो टेप, उपचुनाव और जोगी



2014 में छत्तीसगढ़ के अंतागढ़ में उपचुनाव होना था. कांग्रेस की ओर से मंतूराम पंवार प्रत्याशी थे. उन्होंने नामांकन दाखिल कर दिया. वापस लेने के आखिरी दिन मंतूराम ने पार्टी को बिना बताए नाम वापस ले लिया. 2015 के आखिर में एक ऑडियो टेप सामने आया जिसमें खरीद-फरोख्त की बातें थीं. आरोप लगे कि टेप में अजीत जोगी, उनके बेटे अमित जोगी और तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद पुनीत गुप्ता की आवाज थी. ये बातचीत मंतूराम पंवार के नाम वापस लेने के बारे में थी. इस टेपकांड के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ की प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बेटे अमित जोगी को छह साल के लिए पार्टी से निकाल दिया. इसके साथ ही अजीत जोगी को भी पार्टी से निकालने की सिफारिश कर दी गई.



अजीत जोगी अपने परिवार के साथ. (File Photo)


2016 में बनाई अपनी पार्टी

फिर अजीत जोगी ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया और साल 2016 में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी (JCCJ) के नाम से अपनी नई पार्टी बनाई. छत्तीसगढ़ की राजनीति में दो मुख्य खिलाड़ी ही रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी. किसी मजबूत और जमीनी पकड़ रखने वाले क्षेत्रीय दल की कमी की वजह से प्रदेश के लोगों के पास बस ये दो ही विकल्प थे. अजीत जोगी ने जनता को वो विकल्प देने के लिए पार्टी का गठन किया. वो भी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले.

फिर उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन करते हुए खुद के बारे में कहा कि इन चुनावों में वो 'किंगमेकर' की भूमिका निभाएंगे, यानी जिसे वो चाहेंगे उसके हाथों में छत्तीसगढ़ की सत्ता की बागडोर होगी. लेकिन उनका ये गठबंधन 'फ्लॉप' साबित हुआ और कांग्रेस की आंधी में भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी का भी प्रदर्शन निराशाजनक रहा. अजीत जोगी की पार्टी को 5 सीटे ही उनकी पार्टी की झोली में आ पाई. फिलहाल अजीत जोगी मरवाही विधानसभा से विधायक हैं.

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