ISBM में फर्जीवाड़ा: जेल में बंद कैदी को जारी कर दी रेगुलर कोर्स में फर्स्ट डिविजन की मार्कशीट

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में निजी विश्वविद्यालय द्वारा डिग्री बींटने को लेकर चल रहे फर्जीवाड़े के बीच एक बड़ा खुसाला हुआ है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में निजी विश्वविद्यालय द्वारा डिग्री बींटने को लेकर चल रहे फर्जीवाड़े के बीच एक बड़ा खुसाला हुआ है. गरियाबंद जिले में स्थित एक निजी विश्वविद्यालय ISBM ने हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी बलराम साहू पिता चेतनराम साहू को जेल से बाहर आने से पहले ही डीसीए (डिप्लोमा ऑफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन) की सर्टिफिकेट दे दिया. ना केवल साधारण सर्टिफिटेक दिया गया बल्की बलराम साहू को प्रथम श्रेणी में भी उत्तीर्ण घोषित किया गया. गरियाबंद जिले के ग्राम नवापारा कोसमी में जिले के एकमात्र विश्वविद्यालय ISBM में पैसे लेकर फर्जी तरीके से मार्कशीट बनाने का पूरा फांडाफोड़ वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता संजीव अग्रवाल ने किया है.

न्यूज़ 18 के पास उपलब्ध दस्तावेजों से यह प्रमाणित होता हैं कि बलराम साहू हत्या के मामले में धारा 304/34 के तहत निर्णय दिनांक 29 जनवरी 2004 से आजीवन कारावास की सजा काट रहा था, जिसके अच्छे आचरण की वजह से 14 अगस्त 2019 को सेंट्रल जेल रायपुर से रिहा किया गया. जबकि ISBM विश्वविद्यालय ने 29 अगस्त 2018 को ही मार्कशीट जारी किया था. वह भी पूरे एक साल के नियमित छात्र के रूप में. पूरे मामले को लेकर वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता संजीव अग्रवाल ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, उच्च शिक्षामंत्री को लिखित में शिकायत कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

कैसे बनी मार्कशीट

पैसे देकर फर्जी तरीके से मार्कशीट बनवाने के लिए ढाई साल का वक्त लगाने वाले संजीव अग्रवाल बताते हैं कि उन्हें फर्जी मार्कशीट के गोरखधंधे का पता चला जिसके बाद उन्होंने ISBM विश्वविद्यालय से संपर्क कर दोस्त के बैंगलोर में नौकरी करने की बात कह कर सिर्फ दसवीं और बारहवीं की मार्कशीट देकर डीसीए की मार्कशीट बनवा ली. जबकि नियम कहता हैं कि डीसीए के डिग्री के लिए नियमित छात्र और अन्य दस्तावेजों का होना जरूरी है, संजीव अग्रवाल मानते हैं कि इन्ही सब गोरखधंधों की वजह से आज देशभर में बेरोजगारी दर बढ़ता जा रहा है.
क्या कहते हैं विश्वविद्यालय के कुलपति

पूरे मामले में ISBM विश्वविद्यालय के कुलपति विनय अग्रवाल जिनका नाम ट्रूकॉरल में सीएम चीफ मिनस्टर के नाम से सेव है, जब उनसे फोन पर बात की गई तो उन्होनें बाइट देने से इंकार करते हुए फोन पर इतना ही कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है वे अभी इसे देख रहे हैं. साथ ही यह भी कहा कि यह मार्कशीट उनके विश्वविद्यालय की नहीं है. जबकि न्यूज़ 18 के पास उपलब्ध दस्तावेज से प्रमाणित होता हैं कि यह मार्कशीट ISBM विश्वविद्यालय की ही है.

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