लाइव टीवी

भीड़ के बीच कंधे पर बैठकर स्टेज तक पहुंचे थे महात्मा गांधी, इस तरह अंग्रेजों को दी थी मात

Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: October 1, 2019, 7:36 PM IST
भीड़ के बीच कंधे पर बैठकर स्टेज तक पहुंचे थे महात्मा गांधी, इस तरह अंग्रेजों को दी थी मात
महात्मा गांधी अछूतों के अलग निर्वाचन का अधिकार मिलने का विरोध कर रहे थे

कंडेल नहर सत्याग्रह में शामिल होने के लिए 20 दिसंबर 1920 को महात्मा गांधी रायपुर पहुंचे थे.

  • Share this:
रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के बीच काफी पुराना रिश्ता रहा है. दरअसल, जिस असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) को पूर्ण स्वराज्य प्राप्ती की राह मानी जाती है, उसकी अलख छत्तीसगढ़ के कंडेल नहर सत्याग्रह से जगी थी. साल 1920 में छत्तीसगढ़ के धमतरी (Dhamtari) में बने माडम सिल्ली बांध के कंडेल नहरों से गुजरने वाले पानी की चोरी के आरोप में अंग्रेजी हुकूमत (British Government) ने ग्रामीणों पर जबरन टैक्स (Tax) लगा दिया था. टैक्स न देने पर कंडेन नामक गांव में रहने वाले ग्रामीणों (Villagers) के जानवर उठा ले गए. इसकी खिलाफत आस-पास के किसान और ग्रामीणों ने की. ग्रामीणों के इस खिलाफत को आंदोलन का रूप देने में पंडित सुंदरलाल शर्मा, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव और नारायण राव मेघावाले जैसे नेताओं ने अहम भूमिका निभाई. इतना ही नहीं आंदोलन को विस्तार देने बिहार के चम्पारण आंदोलन से देशभर में प्रसिद्ध हुए महात्मा गांधी को बुलाने का निर्णल लिया गया. फिर, पंडित सुंदरलाल शर्मा ने कोलकाता जाकर 20 दिसंबर 1920 को महात्मा गांधी को अपने साथ रायपुर लेकर आए.

जब गांधी जी को सुनने इकट्ठा हो गए लाखों लोग

गांधी जी से जुड़ा एक वाक्या याद करते हुए वरिष्ठ ईतिहासकार आचार्य रमेंद्रानाथ मिश्र कहते हैं कि कंडेल नहर सत्याग्रह में शामिल होने के लिए 20 दिसंबर 1920 को जब महात्मा गांधी रायपुर पहुंचे तो रायपुर के गांधी मैदान में एक समूह देखते ही देखते विशाल सभा बन गया जिसे संबोधित बापू ने किया.



अंग्रेजों को दी थी मात

वरिष्ठ पत्रकार गोपाल वोरा बताते हैं कि रायपुर के संबोधन के बाद जब महात्मा गांधी धमतरी पहुंचे तो उन्हें सुनने के लिए इतनी भीड़ आ गई कि उमर सेठ नामक व्यपारी ने गांधी जी को अपने कंधे पर बैठाकर मंच तक पहुंचाया. इसके बाद गांधी जी ने सभा को एक घंटे तक संबोधित किया. महात्मा गांधी के संबोधन की ही देन थी कि अंग्रेजों को न केवल अपना फैसला बदलना पड़ा बल्कि जिन किसानों के जानवर जब्त किए गए थे उसे भी लौटाना पड़ा. कंडेल नहर सत्याग्रह ने छत्तीसगढ़ को कई स्वतंत्रा संग्राम सेनानी (Freedom Fighter) और नेता दिए. इसमें महंत लक्ष्मीनारायण दास, केयूर भूषण, महादेव प्रसाद पाण्डेय प्रमुख नाम वो शामिल हैं, जो आगे चलकर न केवल स्वतंत्रा संग्राम में शामिल हुए बल्कि छत्तीसगढ़ का नाम पूरे भारत में पहुंचाया.

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती: राजस्थान में बनेगा रक्तदान का रिकॉर्ड ! 150 से ज्यादा रक्तदान शिविर लगेंगे 150th birth anniversary of Mahatma Gandhi-Blood donation records will be made in Rajasthan-More than 150 blood donation camps will be held
गांधी जी का छत्तीसगढ़ से काफी गहरा नाता रहा है.

Loading...

 

आज भी याद है बापू का वो 'कमाल'

वरिष्ठ ईतिहासकार आचार्य रमेंद्रानाथ मिश्र बताते हैं कि ऐसा नहीं हैं कि कंडेल नहर सत्याग्रह के बाद गांधी का वास्ता छत्तीसगढ़ से नहीं रहा हो. 1920 से लेकर 1947 में मिली आजादी की सुबह तक देशभर में हुए तमाम स्वतंत्रता संग्राम और आंदोलनों में छत्तीसगढ़ ने महात्मा गांधी को याद करते हुए बढ़-चढ़ कर भाग लिया. यति यतिन लाल, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, पंडित रामदयाल तिवारी, बैरिस्टर छेदीलाल, रत्नाकर झा, रणवीर शास्त्री, सुधीर मुखर्जी, देवीकांत झा, कुंज बिहारी चौबे, वामनराव लाखे जैसे नेताओं ने देशभर में छत्तीसगढ़ का बढ़चढ़ कर नेतृत्व किया. ये बाबू के बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा ही है जो छत्तीसगढ़ और बापू के इस रिश्ते को याद करते हुए खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने तमाम मंत्री-नेता और जनप्रतिनिधियों के साथ उनके जयंती पर कंडेल गांव से राजधानी रायपुर तक 72 किलोमीटर की पदयात्रा करने वाले हैं.

ये भी पढ़ें: 

चित्रकोट उपचुनाव: BJP ने जारी की 40 स्टार प्रचारकों की लिस्ट, ये 'खास' चेहरे करेंगे प्रचार 

मार्कफेड का असिस्टेंट मैनेजर गिरफ्तार, नाबालिग से छेड़छाड़ का आरोप 

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए रायपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 1, 2019, 5:25 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...