सुर्खियां: भूपेश सरकार ने किसानों पर सबसे ज्यादा 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए, मरीज रहे परेशान

छत्तीसगढ़ सरकार के छह माह पूरे होने पर 17 जून को मंत्रियों ने सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया. 6 जिला मुख्यालयों में 6 मंत्रियों और एक विधायक ने पत्रकार वार्ता कर सरकार की बिंदुवार उपलब्धियां गिनाईं.

News18 Chhattisgarh
Updated: June 18, 2019, 8:41 AM IST
सुर्खियां: भूपेश सरकार ने किसानों पर सबसे ज्यादा 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए, मरीज रहे परेशान
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कार्यकाल को छह माह पूरा हो गया है.
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Updated: June 18, 2019, 8:41 AM IST
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कार्यकाल को छह माह पूरा हो गया है. 17 दिसंबर 2018 को भूपेश बघेल सहित दो अन्य मंत्रियों ने शपथ ली थी. सरकार के छह माह पूरे होने पर 17 जून को मंत्रियों ने सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया. 6 जिला मुख्यालयों में 6 मंत्रियों और एक विधायक ने पत्रकार वार्ता कर सरकार की बिंदुवार उपलब्धियां गिनाईं. इस खबर को सोमवार को छत्तीसगढ़ के सभी मुख्य अखबारों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

नईदुनिया ने लिखा है- छत्तीसगढ़ कर भूपेश सरकार के खजाने से सबसे ज्यादा 19 हजार 900 करोड़ रुपए किसानों के लिए निकले हैं. मंत्रियों ने कहा छह माह ज्यादा नहीं होते. पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने अपने पहले कार्यकाल के 13 महीने तो योजनाएं बनाने में निकाल दिए थे, जबकि कांग्रेस सरकार ने छह महीने में ही अपने घोषणापत्र के ज्यादातर बड़े वादों को पूरा करके दिखाया है.



मंत्रियों ने गिनाईं उप​लब्धियां
वरिष्ठ मंत्री टीएस सिंहदेव ने अंबिकापुर, कवासी लखमा व अनिला भेंड़िया ने राजधानी, मोहम्मद अकबर ने कवर्धा, जयसिंह अग्रवाल ने कोरबा, ताम्रध्वज साहू ने दुर्ग में पत्रकार वार्ता लेकर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं. वहीं बस्तर में विधायक लखेश्वर बघेल ने सरकार के कामकाज को बताया. मंत्रियों ने कहा कि किसानों की मदद से बनने वाली सरकार ने किसानों का पूरा ध्यान रखा है.

कहां कितना खर्च
नईदुनिया ने लिखा है- व्यापक ऋण माफी योजना में 11 हजार करोड़ रुपये, व्यवसायिक बैंकों का पांच हजार करोड़ कर्ज माफ, डिफाल्टर किसानों के ऋण माफी के लिए छह सौ करोड़ का वन टाइम सेटलमेंट और सिंचाई का 300 करोड़ कर्ज माफ किया गया. इस तरह सरकार का दावा है कि किसानों का कुल 16 हजार 900 करोड़ रुपए का कर्जमाफ किया गया है.

इसके अलावा सरकार ने 25 सौ स्र्पये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदकर किसानों के खाते में 3000 करोड़ रुपये डाले, वह अलग है. मंत्रियों का कहना है कि कांग्रेस सरकार ने हर वर्ग की चिंता की है. प्रदेश के किसानों, युवाओं, महिलाओं, व्यापारियों, आदिवासियों, गरीबों, सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों, वृद्धजनों को पहली बार लग रहा है, प्रदेश में अब उनकी सरकार है. इस खबर दैनिक भास्कर, पत्रिका, नवभारत, हरिभूमि ने भी आज के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया है.
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टीम नड्डा में मिल सकती है इनको जगह
दैनिक भास्कर ने लिखा है- भाजपा के नए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में छत्तीसगढ़ के नेताओं को अहम जगह मिल सकती है. क्योंकि उनका छत्तीसगढ़ से भी नाता रहा है और यहां के कई नेताओं से उनके करीबी संबंध रहे हैं. प्रो. रमाशंकर कठेरिया व डॉ. अनिल जैन के पहले वे ही प्रदेश भाजपा प्रभारी थे. इसके अलावा वे 2013 के विधानसभा चुनाव के भी प्रदेश प्रभारी थे. तब वे राष्ट्रीय महामंत्री भी थे.

नड्डा के कार्यकाल में राज्य में भाजपा संगठन के विस्तार का बड़ा अभियान चलाया गया जो राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा था. प्रदेश के कई नेताओं से उनके गहरे ताल्लुकात हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश बैस, प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, पूर्व मंत्री व विधायक बृजमोहन अग्रवाल, पूर्व मंत्री राजेश मूणत, पूर्व स्पीकर गौरीशंकर अग्रवाल, प्रवक्ता श्रीचंद सुंदरानी व सच्चिदानंद उपासने, प्रदेश कार्यालय प्रभारी सुभाष राव समेत कई नेता इनमें शामिल हैं.

20 हजार मरीज लौटे
पश्चिम बंगाल में डॉक्टर्स पर हुए हमले के विरोध की आग पूरे देश में फैल चुकी है. छत्तीसगढ़ में भी इसका खासा असर दिखाई दिया. शुक्रवार को प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर्स ने ओपीडी का बहिष्कार कर दिया था. अब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) ने भी आंदोलन शुरू कर दिया है. आइएमए की राष्ट्रीय इकाई के आव्हान पर सोमवार की सुबह छह बजे से प्रदेश के 700 निजी अस्पतालों की ओपीडी के ताले ही नहीं खुले. इस दौरान 20 हजार से अधिक मरीज अस्पताल के दरवाजे से ही लौटा दिए गए, वहीं 100 से अधिक ऑपरेशन टालने पड़े. सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं, इमरजेंसी ऑपरेशन ही किए गए. यह प्रदेश में पहली बार है जब डॉक्टर्स का इतना कड़ा रूख सामने आया है. इस खबर को नईदुनिया, दैनिक भास्कर, पत्रिका सहित अन्य मुख्य अखबारों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

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