अब जमीन की अदला-बदली कर सकते हैं आदिवासी, सरकार ने शुरू की ये पहल

सलवा जुडूम के दौरान हिंसक वारदातों और घरों को जलाने की घटनाओं के बाद बस्तर छोड़ चुके आदिवासियों को जमीनी हक दिलाने के लिए लड़ाई चल रही है.

निलेश त्रिपाठी | News18 Chhattisgarh
Updated: July 3, 2019, 11:42 AM IST
अब जमीन की अदला-बदली कर सकते हैं आदिवासी, सरकार ने शुरू की ये पहल
छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम के दौरान हिंसा से परेशान होकर प्रदेश छोड़ने वाले आदिवासियों के लिए अच्छी खबर है.
निलेश त्रिपाठी | News18 Chhattisgarh
Updated: July 3, 2019, 11:42 AM IST
छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम के दौरान हिंसा से परेशान होकर प्रदेश छोड़ने वाले आदिवासियों के लिए अच्छी खबर है. विस्थापित आदिवासी अब अपनी जमीन का अदला बदली अपने या दूसरे राज्य में कर सकेंगे. वन अधिकार कानून के तहत आदिवासियों को जमीन की अदला बदली की सुविधा दी जाएगी. इसको लेकर केन्द्र की ओर से हरि झंडी मिल गई है. छत्तीसगढ़ के मुख्य अखबारों में से एक दैनिक भास्कर ने इस खबर को बुधवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

दैनिक भास्कर ने लिखा- सलवा जुडूम के दौरान हिंसक वारदातों और घरों को जलाने की घटनाओं के बाद बस्तर छोड़ चुके आदिवासियों को जमीनी हक दिलाने के लिए चल रही लड़ाई के बीच दिल्ली से एक बड़ी खबर आई है. मंगलवार को पांच राज्यों, गृह मंत्रालय, ट्राइबल मिनिस्ट्री के अफसरों की एक बैठक राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव लेने वाले थे। इसके लिए सुबह 11 बजे का टाईम निर्धारित किया गया था, लेकिन एन वक्त पर गृह मंत्रालय के अफसरों ने किसी कारणवश बैठक में शामिल नहीं होने पाने की सूचना भिजवाई तो बैठक को स्थगित करने प्लानिंग में काम शुरू हुआ, लेकिन इस बीच छत्तीसगढ़ के अफसरों के अलावा सेंट्रल ट्राइबल मिनिस्ट्री के अफसर यहां पहुंच चुके थे. ऐसे में बैठक को स्थगित नहीं किया गया और बैठक जारी रखी गई.

अब तक कहीं नहीं हुआ उपयोग
बैठक में ट्राइबल मिनिस्ट्री के ज्वाइंट सेक्रेटरी केएस कोनर जो अभी एफआरए के विभाग प्रमुख भी हैं ने छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की मांग पर कहा कि वन अधिकार कानून के तहत आदिवासी अपनी पैतृक जमीन के बदले दीगर राज्यों या फिर अपने ही राज्य में वन अधिकार पट्‌टे के तहत जमीन ले सकते हैं. इस कानून के तहत मिले इस प्रावधान का उपयोग कहीं नहीं किया गया है लेकिन छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए इस प्रावधान का उपयोग केंद्र की पहल पर करवाया जा सकता है और दीगर राज्यों से सीधे केंद्र सरकार के जरिए काम करवाया जाएगा. उन्होंने कहा कि आदिवासियों को राहत दिलाने के लिए हरसंभव पहल की जा रही है. आदिवासियों को जमीन के बदले जमीन देने के लिए सीधे केंद्र से निर्देश जारी करवाए जाएंगे.

खुद को जिंदा दफनाया
नईदुनिया ने लिखा है- पैसे की तंगी दूर करने के लिए एक व्यक्ति ने तंत्र-मंत्र का सहारा लिया. सुनसान जगह पर तपस्या करने बैठा और फिर खुद को जमीन में दफन कर लिया. वहां मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी और पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंच कर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया. विजय कुमार पहले सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी करता था. नौकरी चले जाने की वजह से वह बेहद तनाव ग्रस्त था. अपनी बदहाल आर्थिक स्थिति से उबरने के लिए उसने तंत्र-मंत्र का सहारा लिया। खुद को जमीन में जिंदा दफन कर दिया. यह पूरी घटना बालकोनगर थाना के नेहरू नगर में कूलिंग टावर के पास की है. रूमगरा शिवनगर का रहने वाला विजय कुमार अपने साथ एक फावड़ा, भगवान की फोटो के साथ पहुंचा था. उसने वहां अपनी ऊंचाई के मुताबिक गड्ढा किया और उसमें जा बैठा.

112 पर दी सूचना
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इस पूरे नाटकीय घटनाक्रम की सूचना किसी प्रत्यक्षदर्शी ने डायल 112 को दे दी. सूचना मिलते ही मौके पर 112 की टीम पहुंची और शख्स के दोनों हाथ खींचकर बाहर निकाला, जिसके बाद पुलिस उसे लेकर सीधे बालको थाना पहुंची. यहां टीआई पीके सिंह ने उससे बात की और उसका बयान दर्ज कराया. पूछताछ के बाद पुलिस ने विजय को तत्काल अस्पताल रवाना किया जहां उसका चिकित्सीय परीक्षण किया गया. मेडिकल जांच में वह पूरी तरह स्वस्थ पाया गया और फिर पूरी पुष्टि के बाद उसे उसके घर शिवनगर रवाना किया गया. पुलिस ने इस सम्बन्ध में विजय की नियोक्ता कंपनी पावरगेट के प्रभारी से भी बात करते हुए विजय के दिमागी हालत की जानकारी ली.

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First published: July 3, 2019, 8:11 AM IST
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