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छत्तीसगढ़: मनचलों के लिए दिल्लगी का जरिया बना पुलिस का यह हेल्पलाइन नंबर, कॉलर्स करते हैं मोहब्बत की बातें
Raipur News in Hindi

Raghwendra Sahu | News18 Chhattisgarh
Updated: February 12, 2020, 11:53 AM IST
छत्तीसगढ़: मनचलों के लिए दिल्लगी का जरिया बना पुलिस का यह हेल्पलाइन नंबर, कॉलर्स करते हैं मोहब्बत की बातें
छत्तीसगढ़ में पुलिस का हेल्पलाइन नंबर डॉयल 112 लोगों के लिए दिल्लगी का करने का साधन बन गया है. (सांकेतिक फोटो)

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) सरकार ने आपात परिस्‍थितियों में लोगों को त्‍वरित मदद मुहैया कराने के लिए डायल 112 हेल्पलाइन (Helpline) नंबर जारी किया था. अब इसका दुरुपयोग भी होने लगा है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में किसी भी आपात परिस्थिति में मदद के लिए पुलिस विभाग ने 'एक्के नंबर सब्बो बर' स्लोगन के साथ डायल 112 हेल्पलाइन नंबर जारी किया था. करीब डेढ़ साल पहले शुरू की गई इस सुविधा का लाभ अब तक हजारों लोगों ने लिया है. कई बार आपातकालीन स्थिति में लोगों की जान तक इस हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद बचाई गई है. लेकिन, पुलिस की इस हेल्पलाइन का उपयोग छत्तीसगढ़ में मनचले भी खूब कर रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में पुलिस का हेल्पलाइन नंबर डॉयल 112 लोगों के लिए दिल्लगी करने का साधन बन गया है. डॉयल 112 पर कॉल करने पर यदि कोई महिला स्टाफ कॉल रीसिव करती है तो मनचले प्यार-मोहब्बत की बातें करने लगते हैं. इतना ही नहीं यदि कोई पुरुष स्टाफ कॉल रीसिव करता है तो उनसे महिला स्टाफ से बात कराने को कहा जाता है. कई बार लफंगे कॉल कर स्टाफ के साथ गाली-गलौच भी करते हैं.

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डायल 112 का प्रदेश कार्यालय रायपुर में संचालित है.


700 से ज्यादा आ चुके हैं ऐसे कॉल

छत्तीसगढ़ के 11 जिलों में डायल 112 की शुरुआत करीब डेढ़ साल पहले 4 सितंबर 2018 को हुई थी. उस वक्‍त से फायर ब्रिगेड, पुलिस कंट्रोल रूम और एंबुलेंस सर्विस के लिए इस नंबर पर कॉल करके लोग सेवा का लाभ उठा रहे हैं. विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, डायल 112 में रोजाना 7,800 के करीब कॉल आते हैं. इनमें से 700 से अधिक कॉल रोजाना ऐसे होते हैं, जिनमें कॉ़ल करने वाला लड़कियों और महिला कर्मचारियों से बात कराने को कहता है. यदि महिला स्टाफ कॉल रीसिव करे तो उससे ​प्यार-मोहब्बत की बातें करने लगता है. इतना ही नहीं कई कॉल में गाली-गलौच भी की जाती है.

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डॉयल 112 के अधिकारी एडिशनल एसपी धर्मेन्द्र छवि.


...तो करते हैं गिरफ्तारडॉयल 112 के अधिकारी एडिशनल एसपी धर्मेन्द्र छवि ने बताया कि रोजाना करीब साढ़े 3 हजार कॉल्स तो ऐसे होते हैं, जिसमें कोई बात ही नहीं करता. केवल डायल करके छोड़ देते हैं. रोजाना 700 क्रैंक कॉल्स आते हैं. इन कॉल्स में लोग अभद्र भाषा और गंदी बातें करते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है. इतनी महत्वपूर्ण सेवा को लेकर लोगों की ऐसी सोच के कारण ही बहुत से जरूरतमंदों को इसका समय पर लाभ नहीं मिल पाता है. यही कारण है कि शरारती तत्वों के खिलाफ कुछ मामले दर्ज भी कराए गए हैं, लेकिन डेढ़ साल में इसकी संख्या महज 20 ही है.

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First published: February 12, 2020, 11:25 AM IST
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