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घरों को मिलेगी डिजिटल पहचान, सबकी होगी अपनी यूनिक आईडी, आसानी से मिलेंगी ये सरकारी सुविधाएं

रायपुर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत यूनिक आईडी जारी करने की कवायद की जा रही है.

रायपुर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत यूनिक आईडी जारी करने की कवायद की जा रही है.

स्मार्ट सिटी में घरों की अपनी यूनिक आईडी होगी. मकानों को डिजिटल पहचान दी जाएगी. इतना ही नहीं कई सरकारी सुविधाएं मकान मालिक को घर बैठे ही मिल जाएंगी. इसके लिए दफ्तरों का चक्कर नहीं लगाना होगा. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मकानों को यूनिक आईडी देने की कवायद शुरू कर दी गई है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मकानों को अपनी पहचान के लिए अब और इंतजार नहीं करना होगा. क्योंकि रायपुर स्मार्ट सिटी ने शहर के 3 लाख 15 हजार से ज्यादा घरों में डिजिटल कोर नंबर लगाने के लिए एक निजी बैंक से करार किया है. इसमें एक यूनिक आईडी नंबर सभी मकानों को मिलेगा, जिससे लोगों को टैक्स जमा करने के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे. इस डिजिटल नंबर के जरिए प्रापर्टी टैक्स के अलावा अन्य 24 तरह की सुविधाएं यूनिक डिजिटल प्लेट को स्कैन करने से बड़ी आसानी से मिलेगी.

रायपुर के स्मार्ट सिटी लिमिटेड के दफ्तर में महापौर एजाज ढेबर और स्मार्ट सिटी के एमडी की मौजूदगी में बैंक से ये एमओयू की गिया है. इसमें नगर निगम या स्मार्ट सिटी द्वारा किसी भी तरह का कोई खर्च नहीं किया जाएगा. महापौर एजाज ढेबर ने बताया कि डिजिटल डोर नंबर पूरे शहर को हाईटेक करने की दिशा में एक बड़ा कदम है और इस योजना के लिए वर्कआउट काफी समय से चल रहा था. अब एमओयू के बाद इस पर काम शुरू होगा और उम्मीद की जा रही है कि 15 अगस्त तक सभी घरों को ये डिजिटल डोर नंबर मिल जाएंगे.

मिलेंगी ये सुविधाएं
महापौर एजाज ढेबर ने बताया कि डिजिटल डोर नंबर के जरिए मकान मालिक को ई गर्वर्नेंस से जुड़ी 24 सेवाएं घर पर लगे यूनिक डिजिटल प्लेट को स्कैन करने से बड़ी आसानी से मिल जाएगी. रायपुर के सभी मकानों का एक यूनिक नबंर तैयार कर क्यूआर कोड के साथ प्लेट हर घर में लगाया जाएगा और इस तरह से यूनिक नंबर से प्रापर्टी टैक्स, डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, नल कनेक्शन, नामांतरण, भवन अनुज्ञा, नियमितीकरण समेत जरूरी सेवाओं के साथ पुलिस, एम्बुलेंस,फायर ब्रिगेड की आपातकालीन सेवाएं घर बैठे सुगमता से मिलेगी. घर की जरूरी पहचान होने से डोर टू डोर डिलीवरी भी हो पायेगी. इसके अलावा गुगल मैप पर भी घर का सही लोकेशन लोगों को पता चल पायेगा.

36 साल पहले मकानों को दिया गया था नंबर
रायपुर में मकानों को नंबर बांटने का सिलसिला राजधानी में 1986 यानि करीब 36 साल पहले बंद कर दिया गया था. तब तक जिन मकानों को नंबर आवंटित किये गये थे, वे 10 से 20 साल तक चले और फिर वो भी बंद हो गये. इसके बाद एक बार और घरों को यूआईडी देने की कवायद की गयी, लेकिन निगम टेंडर ही नहीं कर पाया. अब जाकर फिर एक बार फिर नगर निगम ने एमओयू किया है और अब उम्मीद की जानी चाहिए कि घरों को अपना यूनिक आईडी नंबर जल्द ही मिल जाएगा.

Tags: Chhattisgarh news, Raipur news

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