छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार में क्यों ठगा महसूस कर रहे हैं 'ईमानदार' किसान?

किसानों का आरोप है कि 'राज्य सरकार ने डिफाॅल्टर खाताधारक किसानों को राहत देने का फैसला लिया है, लेकिन ईमानदारी से कर्ज की किश्त जमा करने वाले किसानों को फिलहाल कोई राहत नहीं दी है.'

निलेश त्रिपाठी | News18Hindi
Updated: June 14, 2019, 8:37 AM IST
छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार में क्यों ठगा महसूस कर रहे हैं 'ईमानदार' किसान?
भूपेश सरकार ने 12 जून को कैबिनेट की बैठक में एक अहम निर्णय लिया. फाइल फोटो.
निलेश त्रिपाठी | News18Hindi
Updated: June 14, 2019, 8:37 AM IST
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ननकट्ठी गांव में किसानी करने वाले रवि प्रकाश ताम्रकार ने कृषि कार्य के लिए जुलाई 2018 में बैंक ऑफ इंडिया से 2 लाख रुपये कर्ज लिया था. रवि प्रकाश को उम्मीद थी कि प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनने के बाद उनका कर्ज माफ कर दिया जाएगा. रवि प्रकाश कहते हैं बैंक से लेन देन में आगे कोई दिक्कत न हो, इसलिए हर महीने ईमानदारी से ब्याज जमा कर रहे हैं.

दुर्ग में छत्तीसगढ़ किसान संगठन का नेतृत्व करने वाले रवि प्रकाश ताम्रकार का कहना है कि भूपेश सरकार ने राष्ट्रीयकृत बैंक के डिफाॅल्टर खाताधारक किसानों को राहत देने का फैसला कैबिनेट में लिया है, लेकिन हम जैसे ईमानदारी से कर्ज की किश्त व ब्याज जमा करने वाले किसानों के लिए फिलहाल कोई राहत नहीं दी गई है. ऐसे में हम जैसे किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं.



सफेद रंग की शर्ट पहने घर से बाहर खड़े किसान रवि प्रकाश ताम्रकार.


नया लोन लेने में दिक्कत

बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के हसदा गांव में करीब 4 एकड़ जमीन पर केला की खेती करने वाले दुर्गाशंकर परगनिया कहते हैं, 'मैंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से कृषि कार्य के लिए 4 लाख रुपये कर्ज लिए थे. भूपेश सरकार ने राष्ट्रीयकृत बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों का कर्ज भी माफ करने का ऐलान किया है. लेकिन अब तक कर्ज माफ नहीं किया गया. कर्जमाफी की उम्मीद में फरवरी में सरकार के ऐलान के बाद मैंने बैंक का ब्याज जमा नहीं किया. इसके चलते नया लोन मिलने में दिक्कत हो रही है. जबकि इससे पहले मैंने ईमानदारी से बैंक का ब्याज जमा किया.'

मंत्रालय में भूपेश सरकार की कैबिनेट बैठक. फाइल फोटो.


डिफाल्टर किसानों का सेटेलमेंट
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दरअसल भूपेश सरकार ने 12 जून को कैबिनेट की बैठक में एक अहम निर्णय लिया. इसके तहत लंबे समय से कर्ज जमा नहीं करने वाले 21 राष्ट्रीयकृत व एक निजी बैंक के डिफाल्टर खाताधारक किसानों को वन टाइम सेटेलमेंट का लाभ दिया जाएगा. इस निर्णय के तहत सरकार ऐसे नवंबर 2018 तक की स्थिति में डिफाल्टर खाताधारक किसानों के कर्ज का 50 प्रतिशत खुद जमा करेगी. ऐसे किसानों को विभिन्न बैंकों का 1175 करोड़ कर्ज है. इससे डिफाल्टर खाताधरक किसानों को नया लोन लेने में दिक्कत नहीं होगी.

किसान नेता रुपन चन्द्राकर.


क्यों ठगा महसूस कर रहे ईमानदार
छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय किसान नेता रुपन चन्द्राकर का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान किसी किसान ने कर्जमाफी की मांग नहीं की थी. कांग्रेस ने खुद पूर्ण कर्जमाफी का वादा किया था. राष्ट्रीयकृत बैंकों से लोन लेने वाले हमारे जैसे किसानों ने ईमानदारी से बैंकों का ब्याज जमा किया है. लेकिन हमारा राष्ट्रीयकृत बैंकों से लिया कर्ज अब तक माफ नहीं किया गया है. इसके चलते ह​में बैंकों में अनावश्यक ब्याज जमा करना पड़ रहा है. डिफाल्टर खाताधारकों का सेटेलमेंट का हम विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन ईमानदारी से बैंकों का ब्याज चुकाने वाले किसानों को लाभ मिलने वाला निर्णय जल्द करना चाहिए.

सांकेतिक फोटो.


'जबकि सम्मानित किया जाना चाहिए'
छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय किसान नेता डॉ. संकते ठाकुर कहते हैं कि हर महीने ईमानदारी से बैंकों के कर्ज की किश्त जमा करने वाले किसानों को सरकार को आर्थिक रूप से सम्मानित करना चाहिए. इसके तहत उन्हें अतिरिक्त बोनस राशि देकर सम्मानित करना चाहिए. इससे उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा. जबकि हरदम इसका उल्टा होता है. डिफाल्टर खाताधरकों को आर्थिक लाभ मिल जाता है. इससे ईमानदारी से किश्त जमा करने वाले ठगा महसूस करते हैं.

कर्ज जमा नहीं करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा
पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी कहते हैं सरकार ने डिफाॅल्टर खाताधारकों का 50 प्रतिशत कर्ज जमा करने का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन इसके लिए वित्तिय प्रावधान नहीं किया गया है, न ही बजट तय किया गया है. सरकार को बताना चाहिए कि बैंकों से सेटेलमेंट के लिए अभी तक क्या कार्य हुआ है. कितना क्या नेगोसिएशन किया गया है. केवल आदेश पारित करने से कुछ नहीं होगा.

पत्रकारों से चर्चा करते अमित जोगी.


अमित जोगी कहते हैं कि सरकार सिर्फ बड़े-बड़े ऐलान कर रही है, लेकिन उसे पूरा करने कोई समय सीमा तय नहीं है. डिफॉल्टर खाताधारकों को लाभ देकर सरकार एक तरह से कर्ज लेकर नहीं जमा करने वाली प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रही है. जबकि इनको लाभ से पहले ईमानदारी से कर्ज चुकाने वाले किसानों को प्राथमिकता से लाभ देना चाहिए. वर्तमान भूपेश सरकार नाकामी को पुरस्कृत और ईमानदारी करने वालों को तिरस्कृत कर रही है.

फाइल फोटो.


61 सौ करोड़ रुपये माफ
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 30 नवंबर 2018 तक की स्थिति में सभी किसानों की पूर्ण कर्जमाफी का वायदा किया था. 17 दिसंबर 2018 को शपथ लेने के तीन घंटे के भीतर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जिला सहकारी व ग्रामीण बैंकों के किसानों के कर्ज माफ करने का ऐलान कर दिया. इससे जिला सहकारी और ग्रामीण बैंकों से लिए गए करीब 6100 करोड़ रुपए माफ कर दिए गए, जिन किसानों ने तय समय सीमा तक का कर्ज जमा कर दिया था, उनके पैसे बैंक अकाउंट में वापस आ गए. इससे करीब 16 लाख किसानों को लाभ मिला.

5 हजार करोड़ रुपये का कर्ज
भूपेश सरकार बनने के शुरुआती दिनों में राष्ट्रीयकृत व निजी बैंकों से कर्ज लिए किसानों को राहत नहीं दी गई, लेकिन 22 फरवरी 2018 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई. इसमें 21 सार्वजनिक बैंकों से कर्ज लिए किसानों का कर्ज माफ करने का भी निर्णय लिया गया. एक अनुमान के मुताबिक इन बैंकों का प्रदेश के किसानों पर करीब 5 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है, लेकिन अब तक ऐसे किसानों का कर्ज माफ नहीं किया गया है.

सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीयकृत बैंकों ने किसानों का कर्ज माफ करने को लेकर नियम व शर्तें तय नहीं किया है. इसके चलते ही देरी हो रही है. हालांकि इसको लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है. एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश में कुल 36 लाख 50 हजार किसान हैं. इनमें से करीब साढ़े 12 लाख किसान सोसायटी में पंजीकृत हैं. राष्ट्रीयकृत बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों की संख्या ढाई लाख से अधिक है.

सांकेतिक फोटो.


वायदा पूरा नहीं किया
बीजेपी प्रवक्ता श्रीचंद सुंदरानी का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश के सभी किसानों का कर्जा माफ करने का वायदा कांग्रेस ने किया था, लेकिन उस वायदे को पूरा नहीं कर रही है. जब सभी किसानों की बात कही गई थी तो अब इन्हें वर्गीकृत कर लाभ क्यों दिया जा रहा है. कांग्रेस अपना वायदा पूरा नहीं कर रही है.

किसानों में अंसतोष बढ़ेगा
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार दिवाकर मुक्तिबोध कहते हैं कि सरकारी प्रक्रियाओं में समय लगता है. कांग्रेस की सरकार बनते ही जिला सहकारी और ग्रामीण बैंकों का कर्ज माफ किया गया. इससे तो साफ है कि सरकार की मंशा साफ है. किसानों से ठगी का इरादा नहीं लगता, लेकिन एक साथ सभी किसानों को लाभ नहीं मिलने से उन किसानों में असंतोष बढ़ेगा, जिनको लाभ नहीं मिल रहा है.

न्यूज 18 से चर्चा करते कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे. फाइल फोटो.


सरकार सभी को देगी लाभ
छत्तीसगढ़ की कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने न्यूज 18 को बताया कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में किये वायदे के अनुसार सभी किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा. तीन तीन श्रेणी में करीब 13 हजार 750 करोड़ का कर्ज माफ करने का ऐलान सरकार ने किया है. 61 सौ करोड़ रुपये का कर्जमाफी का लाभ किसानों को मिल चुका है. बाकी दो श्रेणियों में किये ऐलान का लाभ भी किसानों को मिलेगा. भूपेश सरकार किसानों की हितैषी सरकार है. वायदाखिलाफी की कोई बात ही नहीं है.

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