भूपेश बघेल: हार की हताशा के बीच कांग्रेस के लिए ऐसे बने 'संजीवनी'

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल. फाइल फोटो.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल. फाइल फोटो.

छत्तीसगढ़ में पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल साल 2013 में हार की हैट्रिक से हताश हो चुकी कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हुए थे.

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छत्तीसगढ़ की मौजूदा राजनीति में सबसे बड़े किरदारों में एक हैं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल. भूपेश बघेल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी हैं. सूबे में 15 सालों तक सत्ता का बनवास काटने वाली कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव में इतिहास रचा. इस चुनाव में कांग्रेस को कुल 90 में से 68 सीटों पर जीत मिली. राज्य बनने के बाद पहली बार किसी भी दल को इतना जनाधार मिला. कांग्रेस की इस जीत का मुख्य नायक भूपेश बघेल को माना गया है और उन्हें आला कमान ने कांग्रेस पार्टी की राज्य सरकार का मुखिया बना दिया.

छत्तीसगढ़ में पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल साल 2013 में हार की हैट्रिक से हताश हो चुकी कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हुए थे. छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के परिणाम ने इनका कद राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा दिया है. आइए एक नजर डालते हैं बघेल के अब तक के सामाजिक और राजनीतिक सफर पर.

भूपेश बघेल और उनकी पत्नी मुक्तेश्वरी बघेल. फाइल फोटो.




नंदकुमार बघेल और विंदेश्वरी देवी बघेल के बेटे भूपेश बघेल का जन्म 23 अगस्त 1961 को दुर्ग जिले के पाटन तहसील में हुआ था. भूपेश के पिता नंदकुमार बघेल भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं. भूपेश और उनकी पत्नी मुक्तेश्वरी बघेल की तीन पुत्री स्मीता बघेल, दीप्ती बघेल और दिव्या बघेल और एक पुत्र चैतन्य बघेल हैं. कुर्मी समाज में इनका खासा जनाधार देखने को मिलता है. तेज तर्रार राजनीति और बेबाक अंदाज के लिए पूरे छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल जाने जाते हैं. किसानों के मुद्दों पर आक्रामक कौशल के लिए वे काफी फेमस भी हैं.
यूथ कांग्रेस से कॅरियर की शुरुआत
साल 1985 में भूपेश बघेल ने यूथ कांग्रेस ज्वॉइन किया. साल 1993 में जब मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए तो पहली बार पाटन विधानसभा से वे विधायक चुने गए. इसके बाद अगला चुनाव भी वे पाटन से ही जीते, जिसमें उन्होने बीजेपी के निरुपमा चंद्राकर को हराया. इसके बाद जब मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह की सरकार बनी, तो भूपेश बघेल पहली बार कैबिनेट मंत्री बने.

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भूपेश बघेल साल 1990-94 तक जिला युवा कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के अध्यक्ष रहे. 1994-95 में मध्य प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष चुने गए. साल 1999 में मध्य प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री और साल 1993 से 2001 तक मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के डायरेक्टर की जिम्मेदारी भूपेश बघेल ने संभाली.

साल 2000 में जब मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बना और कांग्रेस की सरकार बनी तब जोगी सरकार में भूपेश कैबिनेट मंत्री रहे. भूपेश बघेल को राजस्व मंत्रालय जैसी बड़ी जिम्मेदारी मिली. साल 2003 में कांग्रेस जब सत्ता से बाहर हुई तो भूपेश को विपक्ष का उपनेता बनाया गया. साल 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में पाटन से उन्होने जीत दर्ज की. 2008 में बीजेपी के विजय बघेल से भूपेश चुनाव हार गए. फिर साल 2013 में पाटन से उन्होंने विजय बघेल को हराकर जीत दर्ज की. इसके बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया.

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कांग्रेस के लिए बने संजीवनी
तेज़तर्रार और आक्रामक छवि वाले नेता भूपेश बघेल को दिसंबर, 2013 में कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया. इस समय विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी हार के बाद कांग्रेसी कार्यकर्ता हताश और निराश थे. इसके बाद भूपेश बघेल ने तब की बीजेपी सरकार के खिलाफ लगातार मोर्चा खोलकर कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करने का काम किया. फिर राशन कार्ड में कटौती का मुद्दा हो या किसानों की धान खरीदी और बोनस का मुद्दा, वह नसबंदी कांड का विरोध हो या फिर चिटफंड कंपनियों के पीड़ितों के साथ खड़े होने का मामला, भूपेश ने कांग्रेस को सरकार के खिलाफ सड़क पर उतार दिया.

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कथित भ्रष्टाचार के मामले एक के बाद एक उजागर किए, जिस तरह से उन्होंने शक्तिशाली नौकरशाहों को खुले आम चुनौती दी उससे राज्य में कांग्रेस की छवि बदली. हालांकि इस बीच जमीन घोटाले, एक मंत्री के सेक्स सीडी कांड को लेकर भूपेश सरकार के निशाने पर भी रहे. सीडी कांड में जब उन्हें न्यायिक रिमांड पर लिया गया तो वे जमानती धाराएं होने के बाद भी जमानत लेने से इनकार कर दिए और विधानसभा चुनाव 2018 से ऐन पहले उन्हें कुछ दिन जेल में रहना पड़ा. बाद में पार्टी के आला नेताओं के कहने पर उन्होंने जमानत अर्जी लगाई.

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जोगी के खिलाफ कार्रवाई
साल 2014 में अंतागढ़ उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की ख़रीद फ़रोख़्त के मामले में जिस तरह से भूपेश बघेल ने अपनी ही पार्टी के कद्दावर नेता अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी को घेरा और फिर अमित जोगी को पार्टी से निष्कासित किया उसके बाद प्रदेश में यह धारणा बन गई कि बघेल 'हिम्मत वाले' नेता तो हैं. क्योंकि पहले कांग्रेस में दो गुट काम करते थे एक संगठन कांग्रेस और दूसरा जोगी कांग्रेस. कांग्रेस के दिग्गज नेता भी जोगी के खिलाफ खुलकर नहीं बोलते थे.

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ताबड़तोड़ फैसले
सरकार बनने के कुछ घंटों में ही राज्य सकरार ने जनघोषणा पत्र में किए वायदे के अनुसार प्रदेश में किसानों का कर्ज माफ करने और 25 सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर पर धान खरीदने का निर्णय ले लिया. फिर कुछ दिन बाद बस्तर के लोहांडीगुडा में टाटा इस्पात संयंत्र के लिए अधिग्रहित आदिवासी किसानों की जमीन वापस करने का फैसला लिया. छत्तीसगढ़ में सरकार में आते ही कांग्रेस ने पूर्व की सरकार की संचार क्रांति योजना बंद कर दी. इसके अलावा 4 हजार 493 विकास कार्यों पर ब्रेक लगा दिया.

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कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही झीरम नरसंहार, नान घोटाला, अंतागढ़ टेपकांड में नए सिरे से जांच के लिए एसआईटी का गठन किया. नान घोटाला मामले में आईपीएस मुकेश गुप्ता, रजनेश सिंह को निलंबित कर दिया गया. अंतागढ़ टेपकांड मामले में पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह के दामाद पुनित गुप्ता, पूर्व मंत्री राजेश मूणत, पूर्व सीएम अजीत जोगी, अमित जोगी, मंतू पंवार जैसे बड़े और चर्चित नामों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. डीकेएस अस्पताल में 50 करोड़ रुपये के गड़बड़झाला के आरोप में डॉ. पुनीत गुप्ता पर एक और एफआईआर दर्ज कर लिया गया.

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लोकसभा चुनाव में बने 'वन मैन आर्मी'
विधानसभा चुनाव में मिली बंपर जीत के बाद लोकसभा चुनाव 2019 में भूपेश बघेल सूबे में कांग्रेस के लिए लगभग व मैन आर्मी की भूमिका में थे. छत्तीसगढ़ में तीन चरणों में 11, 18 और 23 अप्रैल को मतदान कार्य हुए. तीसरे चरण के मतदान से पहले एक दिन राहुल गांधी प्रचार के लिए आए. इनके अलावा राष्ट्रीय कद के बड़े नेताओं में नवजोज सिंह सिद्धू के अलावा कोई बड़ा नाम प्रचार के लिए नहीं आया. लोकसभा चुनाव में नामांकन से मतदान तक भूपेश बघेल धुआंधार रैली और सभाएं करते रहे. लगभग हर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन के दौरान वे खुद मौजूद रहे. प्रदेश में चुनाव समाप्त होने के बाद वे लगातार यूपी और मध्यप्रदेश में प्रचार कर रहे हैं.

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