Home /News /chhattisgarh /

how salwa judum wounds changed identity of tribals untold story naxal violence in bastar cgnt

सलवा जुडूम: जख्म ने बदली आदिवासी की पहचान, बर्बरता जाननी है तो एक कान वाले रमेश से मिलिए

छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम के दौरान 55 हजार से ज्यादा लोगों को अपना घर गांव छोड़ शिविर में रहना पड़ा था.

छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम के दौरान 55 हजार से ज्यादा लोगों को अपना घर गांव छोड़ शिविर में रहना पड़ा था.

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में सलवा जुडूम से जुड़े कई किस्से हैं. सलवा जुडूम पर सुप्रीम कोर्ट के रोक के 11 साल बाद भी इसके विरोधी और समर्थक दोनों ही बड़ी संख्या में मिल जाएंगे. सलवा जुडूम के दौरान हिंसा और बर्बरता के कई किस्से हैं. इनमें से ही एक कहानी है आदिवासी ग्रामीण रमेश की. वो रमेश, जिसकी पहचान अब 'एक कान वाला रमेश' हो गई है.

अधिक पढ़ें ...

रायपुर. सलवा जुडूम के हिंदी अर्थ को समझें तो इसका मतलब है ‘शांति का कारवां’, लेकिन इसका चरित्र अपने नाम के अर्थ से बिल्कुल उल्टा था. बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ शुरू हुए सलवा जुडूम की हिंसा और बर्बरता के भी कई किस्से हैं.” बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के बासागुड़ा के रहने वाले 55 वर्षीय राजेंद्र झाड़ी सलवा जुडूम को कुछ इस तरह ही याद करते हैं. सलवा जुडूम प्रभावितों में शामिल राजेंद्र कहते हैं कि जुडूम के लोगों के दिए जख्मों के कई किस्से हैं, जुडूम पर रोक के इतने साल बाद भी यदि बर्बरता का सबूत देखना है तो एक कान वाले रमेश से ज़रूर मिलिएगा.

रमेश की तलाश में हम आवापल्ली के पास दुगईगुड़ा गांव पहुंचे. गांव में मुख्य सड़क के किनारे ही आंचल किराना स्टोर है. पूछने पर पता चला कि दुकान के सामने वाला घर ही रमेश का है, लेकिन फिलहाल वो घर में नहीं हैं. मछली पकड़ने तालाब गया है. दुकानदार के कहने पर गांव का एक लड़का रमेश को बुलाने गया. कुछ देर बाद रमेश हमारे सामने थे.

जख्म की कहानी, बर्बरता के निशान

42 साल के रमेश का पूरा नाम रमेश इरपा है, पूरे इलाके में वे एक कान वाले रमेश के नाम से ही जाने जाते हैं.. इसके पीछे की कहानी बताते हुए रमेश कहते हैं, “ये सलवा जुडूम के शुरुआत यानी साल 2005 के बारिश के दिनों की बात है. नक्सलियों के खिलाफ आदिवासियों के आंदोलन सलवा जुडूम से मैं भी प्रभावित था. तब मैं और मेरे जैसे कई युवा जुडूम से जुड़ना चाहते थे. सलवा जुडूम हमारे गांव की ओर आ रहा था. चेरामंगी तक जुडूम के लोग पहुंच चुके थे. अगली सुबह उन्हें हमारे गांव आना था.”

रमेश कहते हैं, “सलवा जुडूम का स्वागत करने वालों की अगुआई मैं खुद हाथ में फूलों की माला लेकर कर रहा था. जुडूम हमारे गांव के नजदीक पहुंचा ही था कि नक्सलियों ने बम ब्लास्ट कर दिया. अफरा-तफरी मची, मैं भी भागने लगा. इसी दौरान जुडूम के लोगों ने मुझे पकड़ लिया. उन्हें लगा मैं नक्सली हूं. मैंने बताया कि मैं तो जुडूम के स्वागत के लिए खड़ा था तो उन्होंने कहा कि स्वागत के लिए खड़े थे तो भाग क्यों रहे थे. जुडूम के ही कुछ लोगों ने कहा कि इसने ही नक्सलियों को हमारे बारे में बताया होगा. मैंने बहुत समझाने की कोशिश की, लेकिन वे मानने को तैयार ही नहीं थे. कुछ लोगों ने कहा कि इसे सजा मिलनी चाहिए. सजा के तौर पर जुडूम के लोगों ने मेरा बायां कान काट दिया. तब से मेरी पहचान रमेश इरपा से बदलकर एक कान वाला रमेश हो गई .”

Salwa Judum Ramesh Story, Naxalite violence in Bastar, exodus of tribals in Bastar, Villages were burnt during Salwa Judum, Lingagiri and Korsaguda News, Matwada camp murder case, Supreme Court's decision on Salwa Judum, Naxal movement in Bastar, untold story of the victim, Mukesh Chandrakar Story, सलवा जुडूम क्या है, what is salwa judum, Journalist murderd in Bastar, Salwa Judum naxal violence in tribal villag basaguda, Salwa Judum Relief Camp, Salawa Judum Untold Story, Bastar Salawa Judum Files, Atrocities on tribals like Kashmiri Pandit, Atrocities on tribals by Naxalite in Bastar, CRPF Camp in Bastar, Bijapur Salawa Judum Camp, Bastar News, Bijapur News, Bastar in Google, Google News Chhattisgarh, Raipur Google News, Google News Raipur, Raipur today News, Raipur ki Taza News, Raipur Latest News, Raipur News in Hindi, Raipur Asspas ki News, Raipur News, Other Cities News, Other Cities News in Hindi, Latest Other Cities News, Other Cities Headlines, छत्तीसगढ़ न्यूज, रायपुर न्यूज, बस्तर न्यूज, सलवा जुडूम

सलवा जुडूम में क्यों बदल गया जनजागरण?

बस्तर में सलवा जुडूम के संस्थापक नेताओं में शामिल बीजापुर के कुटरू निवासी मधुकर राव कहते हैं, “सलवा जुडूम का औपचारिक ऐलान 4 जून 2005 को यहीं कुटरू से हुआ. बड़ी सभा में 20 से ज्यादा गांवों के हजारों आदिवासी शामिल हुए. इस सभा में तत्कालीन राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, डीजीपी, कलेक्टर, एसपी समेत पक्ष विपक्ष के कई नेता पहुंचे थे. महेंद्र कर्मा सभा की अगुआई कर रहे थे. उन्होंने कहा कि नक्सलियों की हिंसा के खिलाफ ये शांतिपूर्ण आंदोलन है, लेकिन इसका नाम स्थानीय गोंडी भाषा में ही रखा जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे समझ सकें. महेंद्र कर्मा ने ही इसका नाम सलवा जुडूम रखा.”

हरदम सुरक्षा के घेरे में रहने वाले मधुकर राव कहते हैं, “ज्यादातर लोग मानते हैं कि नक्सलियों के खिलाफ आदिवासियों के आंदोलन की शुरुआत कुटरू से हुई थी, लेकिन इसकी पहली बैठक कुटरू नहीं बल्कि यहां से 20 किलोमीटर दूर इंद्रावती नदी के किनारे बसे करकेली गांव में हुई थी. वहां के कुछ युवकों को नक्सली अपने साथ जबरदस्ती ले गए थे. उन्हें छुड़ाने के लिए गांव के मिच्चा हुंगा, वाचम एवड़ा व कुछ अन्य लोगों ने बैठक की और नक्सलियों के खिलाफ आवाज उठाई. बैठक के बाद एक दिन जब नक्सली गांव में आए तो उनको लोगों ने पकड़ लिया. इसके बाद नक्सलियों ने वाचम एवड़ा समेत 7 लोगों की हत्या कर दी. तुमला गांव में लेखराम नाम के युवक की भी हत्या कर दी गई. इसके बाद लोगों का आक्रोश नक्सलियों के खिलाफ बढ़ा और छोटी व बड़ी करकेली में फिर से लोगों ने बैठक की.”

मधुकर राव बताते हैं, “इसी बीच नैमेड़ से कुटरू आने के रास्ते में नक्सलियों ने पुलिस वाहन को आईईडी ब्लास्ट से उड़ा दिया. इस मामले में पुलिस कुटरू गांव से 4 युवकों को नक्सलियों का सहयोगी बताकर उठा ले गई. हमने पुलिस वालों को बताया कि वे नक्सली नहीं हैं, लेकिन वे नहीं माने. इस तरह ग्रामीण दोनों ओर से परेशान थे. इसी बीच एक दिन नक्सल संगठन के कुछ सदस्य गांव आए. मैंने कुछ लोगों के सहयोग से उन्हें पकड़ लिया और पुलिस के पास ले गए. हमने बताया कि आप जिन्हें ढूंढ रहे हैं, वो ये लोग हैं, हमारे बच्चों को छोड़ दीजिए. इसके बाद हम भी नक्सलियों के निशाने पर आ गए. हम पर हमले शुरू हो गए. करकेली में नक्सलियों के खिलाफ बैठक की जानकारी हमें मिल गई थी. आस-पास के 4-5 गांव वालों ने तय किया कि अब नक्सलियों के खिलाफ हम लोगों को जागरूक करेंगे और युवाओं को संगठन में जाने से रोकेंगे. इसके तहत हमने गांवों में बैठकें शुरू कीं और उसे नक्सलियों के खिलाफ जन जागरण नाम दिया, जिसे बाद में बदलकर सलवा जुडूम कर दिया गया.”

Salwa Judum Ramesh Story, Naxalite violence in Bastar, exodus of tribals in Bastar, Villages were burnt during Salwa Judum, Lingagiri and Korsaguda News, Matwada camp murder case, madhukar rao, Supreme Court's decision on Salwa Judum, Naxal movement in Bastar, untold story of the victim, Mukesh Chandrakar Story, सलवा जुडूम क्या है, what is salwa judum, Journalist murderd in Bastar, Salwa Judum naxal violence in tribal villag basaguda, Salwa Judum Relief Camp, Salawa Judum Untold Story, Bastar Salawa Judum Files, Atrocities on tribals like Kashmiri Pandit, Atrocities on tribals by Naxalite in Bastar, CRPF Camp in Bastar, Bijapur Salawa Judum Camp, Bastar News, Bijapur News, Bastar in Google, Google News Chhattisgarh, Raipur Google News

क्यों बदनाम हुआ सलवा जुडूम?

बस्तर में हिंसा फैला रहे नक्सलियों के खिलाफ आदिवासियों के शांति कारवां को उस समय की सरकार और विपक्ष दोनों का साथ मिला. सरकार ने बिना प्रशिक्षण दी नक्सलियों से लड़ने के लिए स्थानीय आदिवासियों को एसपीओ (स्पेशल पुलिस ऑफिसर) बनाया और हथियार थमा दिए. तब नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस का राष्ट्रीय चेहरा महेंद्र कर्मा ने सलवा जुडूम का नेतृत्व किया. साल 2005 से शुरू हुए सलवा जुडूम पर 5 जुलाई 2011 को देश की सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी.

बीजापुर के कोर्सेगुड़ा गांव के सरपंच भीमा कहते हैं कि फरवरी 2006 में हमारे गांव के 125 से ज्यादा घर जला दिए गए. क्योंकि हमने सलवा जुडूम के शिविर में जाने से इनकार कर दिया था. सिर्फ कोर्सेगुड़ा ही नहीं लिंगागिरी, मनकेली व आसपास के अन्य गांवों में भी आगजनी की गई. सलवा जुडूम का हिस्सा बनते थे तो नक्सली हमें अपना शिकार बनाते थे. उस दौरान हम दो पाटों में पिस रहे थे.

Salwa Judum Ramesh Story, Naxalite violence in Bastar, exodus of tribals in Bastar, Villages were burnt during Salwa Judum, Lingagiri and Korsaguda News, Matwada camp murder case, madhukar rao, Supreme Court's decision on Salwa Judum, Naxal movement in Bastar, untold story of the victim, Mukesh Chandrakar Story, सलवा जुडूम क्या है, what is salwa judum, Journalist murderd in Bastar, Salwa Judum naxal violence in tribal villag basaguda, Salwa Judum Relief Camp, Salawa Judum Untold Story, Bastar Salawa Judum Files, Atrocities on tribals like Kashmiri Pandit, Atrocities on tribals by Naxalite in Bastar, CRPF Camp in Bastar, Bijapur Salawa Judum Camp, Bastar News, Bijapur News, Bastar in Google, Google News Chhattisgarh, Raipur Google News

कैंप में हत्याएं और हालात

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अविभाजित दंतेवाड़ा (अब दंतेवाड़ा, बीजापुर व सुकमा) जिले के 644 गांव खाली कराए गए थे. इन गांवों के 56 हजार से ज्यादा लोगों को विस्थापित कर सलवा जुडूम के राहत शिविरों में रखा गया. बीजापुर के मटवाड़ा राहत शिविर में रहने वाले 3 आदिवासियों की लाशें मार्च 2007 में कैंप से कुछ दूर मिली थीं. शव से उनकी आंखें निकाल ली गईं थीं और सिर पत्थर से कुचल दिया गया था. पुलिस जांच में सलवा जुडूम से जुड़े लोगों ने कहा कि नक्सलियों ने इस वारदात को अंजाम दिया है, लेकिन सामाजिक व मानवाधिकार के कार्यकर्ताओं के दबाव में मामला हाई कोर्ट तक गया.

मटवाड़ा की घटना को करीब से कवर करने वाले छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार आलोक प्रकाश पुतुल बताते हैं कि मामले में लंबी जांच के बाद हाईकोर्ट ने एक पुलिस एएसआई और 3 एसपीओ को ही हत्या का दोषी पाया. उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और पीड़ित परिवार वालों को मुआवजा भी मिला. इस घटना ने समाजिक कार्यकर्ताओं के उन आरोपों को बल दिया, जिसमें वे कहते थे कि जुडूम के असर्दार्व लोग अपने निजी हित के लिए आदिवासियों की बलि चढ़ा रहे हैं. मटवाड़ा कोई पहली घटना नहीं थी , इसके पहले और बाद में भी सलवा जुडूम के लोगों पर नक्सली होने का आरोप लगाकर मारपीट, महिला से दुष्कर्म, वनोपज की लूट, शिविरों में राशन सप्लाई की ठेकेदारी और भ्रष्टाचार के आरोप लगे. इन्हीं घटनाओं के चलते जुडूम बदनाम होता गया.

Salwa Judum Ramesh Story, Naxalite violence in Bastar, exodus of tribals in Bastar, Villages were burnt during Salwa Judum, Lingagiri and Korsaguda News, Matwada camp murder case, madhukar rao, Supreme Court's decision on Salwa Judum, Naxal movement in Bastar, untold story of the victim, Mukesh Chandrakar Story, सलवा जुडूम क्या है, what is salwa judum, Journalist murderd in Bastar, Salwa Judum naxal violence in tribal villag basaguda, Salwa Judum Relief Camp, Salawa Judum Untold Story, Bastar Salawa Judum Files, Atrocities on tribals like Kashmiri Pandit, Atrocities on tribals by Naxalite in Bastar, CRPF Camp in Bastar, Bijapur Salawa Judum Camp, Bastar News, Bijapur News, Bastar in Google, Google News Chhattisgarh, Raipur Google News

क्यों जाना पड़ा सुप्रीम कोर्ट?

सलवा जुडूम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर कहती हैं- जंगलों में आदिवासियों को मार कर फेंक दिया जाता था. महिलाओं के खिलाफ बर्बरता से दुष्कर्म किया जाता था. पूरे बस्तर में दहशत का माहौल था. स्कूल भवनों में पढ़ाई बंद करा कर उन्हें राहत शिविर कैंप बना दिया गया. इसके अलावा बगैर प्रशिक्षण एसपीओ के नाम पर आदिवासी युवाओं को लड़ने के लिए हथियार थमा दिए गए. हर तरफ से आदिवासी मारा जा रहा था. सलवा जुडूम की वारदात के सबूत हमने सुप्रीम कोर्ट में पेश किए. बस्तर में आदिवासियों की स्थिति पर शोध करने वाली प्रोफेसर नंदिनी कहती हैं कि आज भी हालत बहुत बेहतर नहीं है. सलवा जुडूम के प्रभावितों की परेशानी जस की तस है.

Salwa Judum Ramesh Story, Naxalite violence in Bastar, exodus of tribals in Bastar, Villages were burnt during Salwa Judum, Lingagiri and Korsaguda News, Matwada camp murder case, madhukar rao, Supreme Court's decision on Salwa Judum, Naxal movement in Bastar, untold story of the victim, Mukesh Chandrakar Story, सलवा जुडूम क्या है, what is salwa judum, Journalist murderd in Bastar, Salwa Judum naxal violence in tribal villag basaguda, Salwa Judum Relief Camp, Salawa Judum Untold Story, Bastar Salawa Judum Files, Atrocities on tribals like Kashmiri Pandit, Atrocities on tribals by Naxalite in Bastar, CRPF Camp in Bastar, Bijapur Salawa Judum Camp, Bastar News, Bijapur News, Bastar in Google, Google News Chhattisgarh, Raipur Google News

आज भी चुन-चुनकर मारे जा रहे लोग

सलवा जुडूम के जिंदा बचे कुछ संस्थापक सदस्यों में शामिल मधुकर राव अब भी जुडूम की कमी महसूस करते हैं. मधुकर कहते हैं कि सलवा जुडूम के लोगों ने कोई गलत काम नहीं किया. जुडूम के सहयोग से ही बस्तर में विकास हो सका. स्कूल बने, घोर नक्सल प्रभावित इलाकों उसूर, बेदरे, फरसेगढ़, गंगालूर सहित अन्य जगहों पर सड़कें बनीं. कुछ लोगों ने यदि गलत किया भी तो उसके लिए पूरे समूह को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता. सलवा जुडूम के कुछ लोगों ने यदि गलत किया तो दिल्ली से लेकर रायपुर तक कई लोग खड़े हो गए, कोर्ट गए. नक्सली आज भी हिंसा कर रहे हैं तो उनके खिलाफ कोई क्यों नहीं खड़ा हो रहा है.

Bastar Files: नक्सलियों के सामने मां जान बख्श देने के लिए गिड़गिड़ाती रहीं और मैं देखता रहा

मधुकर राव कहते हैं कि हमारी सबसे बड़ी भूल थी कि हमने राजनीति से जुड़े लोगों को अपने जनजागरण समूह में शामिल किया. महेंद्र कर्मा की नक्सलियों ने हत्या की. 2011 से अब तक सलवा जुडूम से जुड़े लोगों की नक्सली चुन-चुनकर हत्या कर रहे हैं. सुकमा के एर्राबोर में 32 लोगों की नक्सलियों ने हत्या की. घर जलाए. यदि नक्सलियों की लड़ाई सिर्फ सरकार व पुलिस से है तो आज भी सलवा जुडूम के राहत शिविर से गांव जाने वाले लोगों की हत्या वे क्यों कर रहे हैं. यदि नक्सल समस्या को खत्म करना है तो फिर से जनजागरण की जरूरत है.

Bastar Files: घर ही नहीं धन-दौलत और उम्मीदें सब जला दी गईं, बचा तो सिर्फ खौफ, सालों वीरान रहे गांव

सरकार क्या कर रही है?

सलवा जुडूम को करीब से कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार आलोक कहते हैं, “जुडूम के दौरान प्रभावित इलाकों के आदिवासियों के पास तीन ही रास्ते बचे थे. पहला कि वे जुडूम का हिस्सा बनें और उनके शिविरों में रहें, दूसरा वे नक्सल संगठन से जुड़ जाएं और तीसरा वे दूर कहीं ऐसे स्थान पर जाकर बस जाएं, जहां दोनों का ही प्रभाव न हो. लेकिन हर हाल में उन्हें अपना घर-गांव छोड़ना ही था. एक आंकड़े के मुताबिक उस दौरान 25 हजार से अधिक परिवार आंध्र प्रदेश व बस्तर के सीमावर्ती इलाकों में जाकर बस गए.”

सलवा जुडूम के दौरान दूसरे राज्यों में जाकर बसे आदिवासी अब अपने गांव वापस आना चाहते हैं. ऐसे ही आदिवासियों का एक समूह 4 अप्रैल 2022 को राजधानी रायपुर पहुंचा. यहां मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात कर वापस अपने गांव में बसने की इच्छा जताई. मुलाकात के बाद सीएम भूपेश ने कहा कि गांव वापस आने की इच्छा रखने वाले सलवा जुडूम के प्रभावितों को हर संभव मदद जाएगी. उनके लिए सुरक्षित माहौल तैयार किया जाएगा. सीएम भूपेश ने बताया कि इसके लिए एक टीम का गठन भी कर दिया गया है.

Tags: Bastar news, Chhattisgarh news, Naxal violence, News18 Hindi Originals

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर