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एम्बुलेंस होती तो बच सकती थी कांग्रेस नेता शुक्ल की जान

एम्बुलेंस होती तो बच सकती थी कांग्रेस नेता शुक्ल की जान

 कांग्रेस के वकील ने कहा कि एम्बुलेंस होने पर हमले में घायल विद्याचरण शुक्ल, सियाराम सिंह को जल्द से जल्द इलाज मिल जाता और उन्हें बचाया जा सकता था.

कांग्रेस के वकील ने कहा कि एम्बुलेंस होने पर हमले में घायल विद्याचरण शुक्ल, सियाराम सिंह को जल्द से जल्द इलाज मिल जाता और उन्हें बचाया जा सकता था.

कांग्रेस के वकील ने कहा कि एम्बुलेंस होने पर हमले में घायल विद्याचरण शुक्ल, सियाराम सिंह को जल्द से जल्द इलाज मिल जाता और उन्हें बचाया जा सकता था.

  • Agencies
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    छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले में यदि एम्बुलेंस होती तो नक्सली हमले में घायल कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल और सियाराम सिंह की जान बचाई जा सकती थी.

    विशेष न्यायिक जांच आयोग के सामने गवाह के प्रतिपरीक्षण में यह बात सामने आई कि कई वीआईपी होने के बाद भी काफिले में एंबुलेस नहीं थी. विशेष न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा के सामने मंगलवार को बस्तर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मयंक श्रीवास्तव के बयान का प्रतिपरीक्षण हुआ.

    इस दौरान मुख्य रूप से मुख्यमंत्री की विकास यात्रा और कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा को लेकर प्रश्न किए गए. प्रतिपरीक्षण में यह बात सामने आई कि विकास यात्रा के सुरक्षा प्रभारी आईजी बस्तर हिमांशु गुप्ता थे.

    वहीं परिवर्तन यात्रा में सुरक्षा की कमान पुलिस अधीक्षक और उनके अधीनस्थ अधिकारी पर थी. बीजापुर जिले में परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा के संबंध में लिखित आदेश दिया गया. इसमें रोड ओपनिंग पार्टी, एरिया डामनेशन, मंच की सुरक्षा, काफिले के साथ एम्बुलेंस लगाई गई थी. वहीं बस्तर जिले में परिवर्तन यात्रा में लगाई गई सुरक्षा व्यवस्था के लिखित दस्तावेज नहीं हैं.

    प्रतिपरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि परिवर्तन यात्रा में एम्बुलेंस नहीं लगाई गई थी. इस पर कांग्रेस के वकील ने कहा कि एम्बुलेंस होने पर हमले में घायल विद्याचरण शुक्ल, सियाराम सिंह को जल्द से जल्द इलाज मिल जाता और उन्हें बचाया जा सकता था.

    गवाह एसपी श्रीवास्तव ने जिले में विकास यात्रा की सुरक्षा के संबंध में कहा कि इसमें सीएम की मौजूदगी के अलावा सभी विभागों की सहभागिता थी. इसमें ग्रामवासियों की भीड़ भी अधिक थी. इस कारण से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई. वहीं परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था की ब्रिफिंग उनके निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने की थी.

    मौखिक रूप से विकास यात्रा की तरह परिवर्तन यात्रा को सुरक्षा देने के निर्देश दिए गए थे. एसपी ने सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े दस्तावेज नहीं होने पर कहा कि सभी पुलिस अधीक्षकों के काम करने का तरीका अलग होता है. सुरक्षा व्यवस्था लगाने के संबंध में शासन का कोई निश्चित प्रोफार्मा नहीं है.

    सामान्यत: वीआईपी रैली में रोड ओपनिंग पार्टी, एरिया डामनेशन, रैली के बीच में कोई वाहन नहीं आए, यातायात पर निगरानी रखने के निर्देश दिए जाते हैं. उन्होंने बताया कि बस्तर से भैरमगढ़ तक जांच के लिए 15 किलोमीटर की दूरी पर चेकिंग के लिए तीन पार्टी लगाई गई थीं. वहीं दरभा थाने से सुकमा जिले की सीमा तक 28 लोगों की एक रोड ओपनिंग पार्टीए एक पार्टी दरभा थाने से कांगेर घाटी के लिए और एक फिक्स पाइंट झीरम मंदिर के पास रखी गई थी.

    इसे कांग्रेस के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने अपर्याप्त कहा. पुलिस अधीक्षक ने पूर्व के बयान में यह स्वीकार किया है कि पूरे मार्ग की सही तरीके से जांच एक दिन में नहीं हो सकती थी.

    Tags: Chhattisgarh news, Naxal attack

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