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200 से अधिक केसों में गवाह है ये चाय वाला...

Surender Singh | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: October 12, 2017, 6:45 PM IST
200 से अधिक केसों में गवाह है ये चाय वाला...
अपनी चाय की दुकान में मनोहर.
Surender Singh | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: October 12, 2017, 6:45 PM IST
नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद एक बार फिर से कोई चाय वाला सुर्खियों में है. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तेलीबांधा इलाक़े में चाय की छोटी सी दुकान चलाने वाले मनोहर वर्ल्यानी 200 से अधिक अदालती मामलों में गवाह होने के कारण चर्चाओं में हैं. मुंबई-कोलकता नेशनल हाइवे पर संचालित चाय की दुकान के संचालक मनोहर शराबखोरी, सड़क दुर्घटना, दुष्कर्म और हत्या की कोशिश, गांजा तस्करी जैसे मामलों में महत्वपूर्ण गवाह हैं.

मनोहर बताते हैं कि उन्हें ठीक से याद नहीं कि वे कितने मामलों में गवाह हैं. फिर भी कहते हैं कि यही कोई 100 से 125 मामले हैं, जिसमें उन्हें गवाह बनाया गया है, लेकिन दस्तावेजों में रायपुर की अदालतों में कम से कम 231 मामले ऐसे हैं, जिनमें मनोहर गवाह हैं.

रायपुर के तेलीबांधा थाने के पीछे मनोहर वार्ल्यानी की चाय-समोसे की दुकान है.


इस व्यस्तम इलाके में वे पिछले दस-बारह सालों से दुकान चला रहे हैं. पुलिस थाने में भी चाय-पानी इसी दुकान से जाता है.

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक बीते सितंबर महीने में राजधानी रायपुर के अग्रसेन धाम इलाके में सुबह पांच बजे चार किलोग्राम गांजा जब्त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इस मामले में मनोहर मुख्य गवाह हैं. जब्ती की कार्रवाई भी इनके सामने हुई. इसी महीने राजधानी के वीआईपी चौक पर पुलिस ने पिस्तौल और गोलियों के साथ एक युवक को गिरफ़्तार किया. इस मामले में भी पुलिस की ओर से मनोहर ही गवाह बनाए गए हैं.

व्यस्त सड़क है, कोई दुर्घटना होती है तो गवाह के तौर पर मैं सामने रहता हूं. इसलिए पुलिस मेरा नाम दर्ज कर लेती है. यदि किसी घटना के समय वहां रहता हूं तो उससे मैं कैसे इनकार कर सकता हूं.
मनोहर


हर मामले को याद रखने की बात पर मनोहर कहते हैं कि पुराने मामलों में पुलिस या पक्षकार से थोड़ी जानकारी मिलने के बाद घटना याद आ जाती है. हालांकि दो सौ से अधिक मामलों में एक ही व्यक्ति को गवाह बनाए जाने को शक के नजरिये से भी देखा जा रहा है.

जानकार कहते हैं कि अधिकांश मामलों में आम आदमी, पुलिस और अदालत के पचड़े में नहीं फंसना चाहता. ऐसे में पुलिस मनोहर जैसे गवाहों पर ही निर्भर रहती है.

तेलीबांधा थाने के पीछे मनोहर वार्ल्यानी की चाय-समोसे की दुकान


रायपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता फैजल रिजवी बताते हैं कि मनोहर जैसे गवाहों को कानून की भाषा में पॉकेट विटनेस कहा जाता है. ज्यादातर मामलों में अदालत पॉकेट विटनेस के बयान को तवज्जो नहीं देती है. अधिवक्ता रिजवी कहते हैं कि यदि गवाह की गड़बड़ी का लाभ आरोपी को मिलता है तो फिर भारतीय दंड संहिता की धारा 211 के तहत पुलिस या गवाह पर मामला दर्ज होना चाहिए.

रायपुर के एडिशनल एसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि मनोहर को 200 से अधिक प्रकरणों में गवाह बनाए जाने के मामले में जांच के निर्देश दे दिए गए हैं. जांच रिपोर्ट के बाद ही तय हो पाएगा कि मनोहर को गलत तरीके से गवाह बनाया गया या नहीं.
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