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स्टील कारो​बारियों के 30 ठिकानों पर आयकर की दबिश, करोड़ों रुपयों के टैक्स चोरी की आशंका

छत्तीसगढ़ के अलग अलग शहरों में आयकर की टीम ने दबिश दी.(फाइल फोटो)

छत्तीसगढ़ के अलग अलग शहरों में आयकर की टीम ने दबिश दी.(फाइल फोटो)

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के विभिन्न स्टील कारोबारियों (steel Industrialists) के ठिकानों पर आयकर अन्वेषण विभाग (Income Tax Investigation Wing) ने दबिश दी है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के विभिन्न स्टील कारोबारियों (steel Industrialists) के ठिकानों पर आयकर अन्वेषण विभाग (Income Tax Investigation Wing) ने दबिश दी है. प्रदेश के अलग अलग शहरों में आयकर की डेढ़ सौ से अधिक अधिकारी व कर्मचारियों की टीम ने बीते 26 नवंबर की शाम को दबिश दी. इनके साथ करीब 100 पुलिस कर्मी भी हैं. टीम ने सरिया, स्टील और स्पंज आयरन कारोबारियों के तीन समूहों के 30 ठिकानों पर दस्तावेजों की जांच शुरू की. इसमें कोलकाता, रायपुर और दुर्ग () स्थित 13 फैक्ट्री, दफ्तर और घर शामिल हैं.

सूत्रों के मुताबिक आयकर विभाग (Income Tax) की टीम रायपुर (Raipur) के उरला, सिलतरा स्थित दफ्तर और फैक्ट्री के साथ ही चौबे कॉलोनी, समता कालोनी और टाटीबंध के उदया सोसाइटी स्थित घरों में जांच कर रही है. स्टील कारोबारियों के कुछ साझेदारों एवं एजेंटों को भी जांच के दायरे में लिया गया है. प्राथमिक जांच में करोड़ों रुपयों के टैक्स चोरी से संबंधित दस्तावेज टीम को मिले हैं. इसमें मिले हिसाब का मिलान किया जा रहा है. लेनदेन के दस्तावेज, कम्प्यूटर और स्टॉक रजिस्टर की छानबीन की जा रही है. मिली जानकारी के मुताबिक सार्थक टीएमटी, सौरभ रोलिंग मिल, अलंकार एलाइज, त्रिदेव इस्पात, जोरावर इंजीनियरिंग, हनुमंत रिंगार्ड, सौरभ सरिया, सागर और पंकज इस्पात के ठिकानों पर जांच चल रही है.

एमपी और गुजरात की टीम
सूत्रों के मुताबिक छापेमारी के लिए एक दिन पहले ही करीब 150 अधिकारियों की टीम बड़े ही गोपनीय रूप से मध्यप्रदेश और गुजराज के अलग-अलग शहरों से पहुंची थी. दबिश देने के पहले टीम ने संबंधित ठिकानों का निरीक्षण किया. जांच के दौरान बड़ी संख्या में लूज पेपर और डायरियां मिली हैं, लेकिन इसका उल्लेख रोकड़ बही और वार्षिक बैलेंस शीट में नहीं किया गया है. वहीं करोड़ों रुपए का लाभ अर्जित करने के बाद भी कारोबार को नुकसान में चलना दिखाया जा रहा था. उत्पादन कम होने और नुकसान का हवाला देने के बाद भी करोड़ों रुपयों के कच्चे माल की खरीदी की जा रही थी. इसके बाद से वह आयकर विभाग के निशाने पर आ गए थे.

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