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भूपेश सरकार के खास रहे IPS जीपी सिंह कैसे बने मुसीबत? छापा-FIR से गिरफ्तारी तक जानें सबकुछ

भूपेश सरकार के खास रहे IPS जीपी सिंह कैसे बने मुसीबत? छापा-FIR से गिरफ्तारी तक जानें सबकुछ

भूपेश बघेल सरकार में आईपीएस जीपी सिंह को एसीबी और ईओडब्ल्यू का प्रमुख बनाया गया था.

भूपेश बघेल सरकार में आईपीएस जीपी सिंह को एसीबी और ईओडब्ल्यू का प्रमुख बनाया गया था.

Suspended IPS GP Singh News: छत्तीसगढ़ के निलंबित आईपीएस जीपी सिंह की गिनती एक समय भूपेश बघेल सरकार के गुड बुक में शामिल अधिकारियों में होती थी. नई सरकार बनने के 2 महीने के भीतर ही उन्हें एसीबी और ईओडब्ल्यू का प्रमुख बना दिया गया. लेकिन करीब डेढ़ साल बाद उन्हें वहां से हटा दिया गया. कभी सरकार के करीबियों में शामिल जीपी सिंह के घर व अन्य ठिकानों पर जुलाई 2021 में छापे मारे गए. 11 जनवरी 2022 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ कैडर के 1994 बैच के आईपीएस जीपी (गुरजिंदर पाल) सिंह की चर्चा पूरे देश में हो रही है. तेज तर्रार ऑफिसर जीपी सिंह इन दिनों पुलिस रिमांड पर हैं. इसी महीने 11 तारीख को जीपी सिंह दिल्ली के पास गुरुग्राम से गिरफ्तार किए गए थे. 12 जनवरी की शाम को रायपुर की ईओडब्ल्यू टीम ने उन्हें कोर्ट में पेश किया, तब से 18 जनवरी की दोपहर 2 बजे तक वे पुलिस रिमांड पर रहे. इसी दिन दोपहर में उन्हें फिर से कोर्ट में पेश किया गया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया. जीपी सिंह पर आय से अधिक संपत्ति से लेकर राजद्रोह जैसे संगीन मामलों में केस दर्ज है. कभी भूपेश बघेल सरकार के खास रहे जीपी सिंह आखिर कैसे सरकार के लिए ही मुसीबत बन गए?

निलंबित आईपीएस जीपी सिंह 14 जनवरी को 2 दिन की रिमांड पूरी होने के बाद रायपुर कोर्ट में जब पेश किया गया तो उन्होंने मीडिया से बातचीत में गंभीर आरोप लगा दिए. जीपी सिंह ने दावा किया कि एसीबी औ ईओडब्ल्यू प्रमुख रहते हुए उनपर पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह और उनकी पत्नी वीणा सिंह को फंसाने का दबाव बनाया जा रहा था. उन्होंने इससे इनकार कर दिया. इसलिए ही बनावटी केस में उन्हें फंसाया जा रहा है. जीपी के आरोपों पर प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल ने कहा कि ‘मैं निलंबित आईपीएस के संबंध में कुछ भी नहीं कहना चाहूंगा, वो गिरफ्तार हो गए हैं. अब बचने के लिए कुछ भी बयान दे रहे हैं.’

यूं बढ़ीं दूरियां
बता दें कि सत्ता में आने के 2 महीने के भीतर ही बाद भूपेश बघेल सरकार ने आईपीएस जीपी सिंह को एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्ल्यू जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील विभाग का मुखिया बनाया था. कहा जाता है कि सरकार की गुड बुक में शामिल ऑफिसर को ही इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाती है. हालांकि जून 2020 में जीपी सिंह को एसीबी और ईओडब्ल्यू से हटा दिया गया. यहां से उन्हें एडीजी पुलिस अकादमी बनाया गया. इसके करीब एक साल तक सार्वजनिक तौर पर कोई हलचल नहीं हुई.

छापा-एफआईआर और अब गिरफ्तारी
1 जुलाई 2021 की सुबह अचानक ही मीडिया जगत में बिग ब्रेकिंग टैग के साथ एक खबर प्रसारित हुई. खबर थी आईपीएस जीपी सिंह के घर एसीबी और ईओडब्ल्यू का छापा. पुलिस विभाग के साथ ही सियासी गलियारों में भी हलचल तेज हो गई. तीन दिन तक जीपी सिंह के रायपुर स्थित घर समेत 15 ठिकानों पर जांच की गई. जांच में आय से अधिक संपत्ति मिलने का दावा किया गया. मामले में ईओडब्ल्यू ने एफआईआर भी दर्ज की. लेकिन हैरान करने वाला मामला तब सामने आया, जांच टीम ने दावा किया कि जीपी सिंह के निवास से डायरी के कुछ पन्ने मिले हैं, जिसमें सरकार को अस्थिर करने की साजिश रचने के सबूत हैं. इसके अलावा कुछ अन्य प्रमाण मिलने का दावा भी किया गया. इस मामले में जीपी सिंह पर राजद्रोह का केस भी दर्ज किया गया. सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया.

राजद्रोह का केस दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी से बचने जीपी सिंह ने पहले हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई, लेकिन दोनों ही जगहों से राहत नहीं मिली. इसके बाद 11 जनवरी 2022 को गुरुग्राम से जीपी सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया.

36 हजार करोड़ के कथित घोटाले से जुड़े तार
जीपी सिंह की गिरफ्तारी के बाद अचानक फिर से छत्तीसगढ़ की सियासत में भूचाल मचाने वाले कथित 36 हजार करोड़ रुपयों के नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले की भी चर्चा  शुरू हो गई. जीपी सिंह ने दावा किया कि इस घोटाले में पूर्व सीएम डॉ. रमन और उनकी पत्नी को फंसाने के लिए उन्हें कहा गया था. जबकि सूत्रों के मुताबिक ईओडब्ल्यू टीम ने अपनी रिपोर्ट में नान घोटाले से जुड़े कागजात जीपी सिंह के घर से बरामद करने का दावा किया है.

Tags: Bhupesh Baghel, Raipur news

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