क्या इस एक चूक की वजह से नक्सलियों का शिकार बने बीजेपी विधायक भीमा मंडावी?

छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से सामने आए बयान में महानिदेशक डीएम अवस्थी ने कहा है कि हमले से पहले भीमा मंडावी को अलर्ट किया गया था, लेकिन उन्होंने बात नहीं सुनी.

निलेश त्रिपाठी | News18 Chhattisgarh
Updated: April 10, 2019, 1:43 PM IST
क्या इस एक चूक की वजह से नक्सलियों का शिकार बने बीजेपी विधायक भीमा मंडावी?
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निलेश त्रिपाठी | News18 Chhattisgarh
Updated: April 10, 2019, 1:43 PM IST
छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव से ऐन पहले नक्सलियों ने बड़ा हमला कर दंतेवाड़ा को दहला दिया है. नक्सलियों ने बीते मंगलवार को दंतेवाड़ा के श्यामगिरी में ​बीजेपी विधायक भीमा मंडावी के काफिले को निशाना बनाया. विधायक की गाड़ी को आईईडी ब्लास्ट कर नक्सलियों ने उड़ा दिया. इस हमले में बीजेपी विधायक भीमा मंडावी समेत उनके ड्राइवर और तीन पीएसओ की मौत हो गई है. चुनाव से ऐन पहले विधायक के काफिले पर हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल किए जा रहे हैं. साथ ही इस बात का भी पता लगाया जा रहा है कि आखिर चूक कहां हुई?

अब तक सामने आई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को भीमा मंडावी ने हमले से पहले करीब तीस मिनट तक श्यामगिरी में एक मेले समय गुजारा. आशंका जताई जा रही है कि एक ही जगह पर इतना समय गुजारने के कारण नक्सलियों को एंबुश लगाने का मौका मिला और उन्होंने मेले से वापसी के दौरान हमले की घटना को अंजाम दिया. बताया जा रहा है कि बताया जा रहा है कि चुनाव प्रचार थमने के बाद भीमा मंडावी ने किरंदुल में बैठक ली. इसके बाद श्यामगिरी के मेले में समय बिताया.

हमले से भीमा मंडावी ने किरंदुल में ली थी बैठक.


छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से सामने आए बयान में भी पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी ने कहा है कि हमले से पहले भीमा मंडावी को अलर्ट किया गया था, लेकिन उन्होंने बात नहीं सुनी. डीएम अवस्थी ने मंगलवार को रात करीब 9 बजे पत्रकारों से चर्चा में बताया था कि बीजेपी विधायक भीमा मंडावी को जेड श्रेणी की सुरक्षा थी. चुनाव प्रचार के दौरान उनकी सुरक्षा और बढ़ा दी गई थी. डीआरजी के 50 अतिरिक्त जवान भीमा मंडावी की सुरक्षा में लगे थे, जो उनके साथ घटना के दिन दोपहर डेढ़ बजे तक थे. इसके बाद चुनाव प्रचार समाप्त होने का हवाला देकर खुद भीमा मंडावी ने उन्हें वापस लौटा दिया था.

पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी ने कहा था कि चुनाव प्रचार थमने के बाद वे अपनी जेड श्रेणी सुरक्षा के साथ ही रवाना हो गए थे. बीजेपी विधायक भीमा मंडावी किरंदुल पार्टी कार्यालय से बचेली की ओर आ रहे थे. इसकी जानकारी बचेली थाना प्रभारी आदित्य सिंह को हुई. आदित्य सिंह ने भीमा मंडावी को मोबाइल फोन पर करीब दोपहर 3 बजकर 50 मिनट पर कॉल किया और कहा कि यदि वे बचेली से कुआकोंडा मार्ग पर जा रहे हैं तो उस मार्ग पर आरओपी (रोड ओपनिंग पार्टी) नहीं है. पुलिस महानिदेशक अवस्थी के अनुसार पर्याप्त सुरक्षा नहीं होने के कारण उन्हें उस मार्ग पर जाने से थाना प्रभारी द्वारा मना किया गया, लेकिन वे आगे बढ़ गए. पहले से एंबुस लगाए नक्सलियों ने घटना को अंजाम दे दिया.



नक्सल हमले में भीमा मंडावी की मौत के बाद प्रदेश में सियासी हलचल भी बढ़ गई है. पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि इस घटना के पीछे राजनीतिक साजिश हो सकती है. इसकी जांच होनी चाहिए. बस्तर में बीजेपी के एकमात्र विधायक भीमा मंडावी थे, नक्सलियों ने उन्हें ही मारा. जबकि दूसरे विधायक भी चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं. डॉ. सिंह ने कांग्रेस और नक्सलियों के बीच सांठगांठ का भी आरोप लगाया है.दंतेवाड़ा में नक्सल हमले के बाद मंगलवार की रात करीब दस बजे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पत्रकारों से चर्चा की. मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि महेन्द्र कर्मा के बेटे छविन्द्र कर्मा को पुलिस ने जाने से रोका था, वे बात मान गए. भीमा मंडावी को भी थानेदार ने जाने से रोका था. यदि वे बात मान जाते तो हमारे बीच होते. इस घटना में कोई राजनीतिक षड्यंत्र नहीं है. भाजपा के पास यदि षडयंत्र की कोई जानकारी है तो उसे दें, जांच होगी.

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