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क्या विधानसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण बन रहा इलेक्शन एजेंडा?

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर सियासत तेज हो गई है.

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर सियासत तेज हो गई है.

Chhattisgarh Politics: छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव (Chhattisgarh Assembly Election 2023) से पहले धर्मांतरण (Religious Conversion) के मामले में जमकर सियासत हो रही है. सूबे की पॉलिटिकल पार्टी इस मुद्दे को चुनावी एजेंडा बनाने की कोशिश कर रही है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में धर्मांतरण (Forced Religious Conversion) को लेकर बीजेपी लगातार हावी है. अब 28 सितंबर को बीजेपी जेल भरो आंदोलन करने जा रही है. हालांकि चुनाव को अभी काफी वक्त बाकी है, लेकिन फिलहाल छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने चुनाव (Chhattisgarh Assembly Election 2023) से पहले ही धर्मांतरण के मुद्दे को प्रमुख एजेंडा बना लिया है. छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर सियासत चरम पर है. विपक्षी दल बीजेपी लगातार इस मामले में सरकार को घेर रही है. धर्मांतरण के मुद्दे पर पूरे प्रदेश में बीजेपी के कार्यकर्ता सड़कों में उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

बस्तर में हुए पार्टी के चिंतन शिविर (Bastar BJP Chintan Shivir) में रणनीति बनी और उसके बाद से बीजेपी ने धर्मांतरण के मुद्दे को चुनावी एजेंडे की ही तरह ले लिया है. हर दिन इससे जुड़े कोई ना कोई प्रदर्शन देखे जा रहे हैं. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा कि धर्मांतरण सरकार की शह पर ही हो रहा है.

कांग्रेस ने किया पलटवार

धर्मांतरण के मामले में कांग्रेस (Congress) की तरफ से संसदीय सचिव विकास उपाध्याय का कहना है कि बीजेपी के पास इस वक्त कोई मुद्दा नहीं है और इसलिए धर्मांतरण को ही चुनावी एजेंडा ही मानकर चल रही है. लेकिन छत्तीसगढ़ शांत प्रदेश है और धर्मांतरण जैसे मुद्दों से बीजेपी सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रही है.

बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
इधर, बीजेपी नेता गौरीशंकर श्रीवास का कहना है कि धर्मांतरण कांग्रेस के लिए मुद्दा हो सकता है, लेकिन बीजेपी के लिए ये प्राथमिकता नहीं है. श्रीवास का कहना है कि सरकार कह रही है कि धर्मांतरण के मामलों में एफआईआर दर्ज की जाएगी, लेकिन प्रदेश में कहीं भी ऐसा नहीं हो रहा है. इतना ही नहीं बीजेपी ने स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के दिल्ली दौरे पर भी निशाना साधा.

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बीजेपी के इस रवैये से ये तो साफ है कि विपक्ष धर्मांतरण का मुद्दा छोड़ना नहीं चाहती, लेकिन इस मुद्दे को लेकर किए गए आंदोलनों और उसके असर से बीजेपी सियासी फायदा कितना उठा पाती है ये देखने वाली बात होगी.

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