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'जिन नक्सलियों ने 17 जवानों की हत्या की, उनका सामना करना वाकई दिल दहलाने वाला था'
Raipur News in Hindi

News18 Chhattisgarh
Updated: March 25, 2020, 1:55 PM IST
'जिन नक्सलियों ने 17 जवानों की हत्या की, उनका सामना करना वाकई दिल दहलाने वाला था'
सुकमा मुठभेड़ के बाद नक्सलियों की एक कथित कमेटी द्वारा वायरल की गई फोटो.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बस्तर के उस पत्रकार की आपबीती, जिसे कवरेज के दौरान सुकमा (Sukma Naxal Attack) में 17 जवानों की हत्या करने वाले नक्सलियों ने 2 घंटे बंधक बनाए रखा.

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सुनील कश्यप.

किसी नक्सली घटना के बाद अक्सर पत्रकार अगले दिन ही घटनास्थल पर पहुंच पाते हैं. पत्रकारों की संख्या भी ज्यादा होती है, पुलिस भी होती है, लेकिन हमने थोड़ी देर कर दी. सुकमा में 17 जवानों की शहादत के दो दिन बाद हम घटनास्थल पर पहुंचे. अब न वहां पुलिस थी, न बड़ी संख्या में पत्रकार. सिर्फ मैं और मेरे तीन वरिष्ठ साथी थे. उम्मीद थी कि घटनास्थल से रिपोर्टिंग कर तुरंत लौट आएंगे, लेकिन घटनास्थल से जवानों के लौटते ही वहां फिर से नक्सलियों का जमावड़ा हो गया था.

जैसे ही हम मिनपा गांव से आगे पहुंचे उन नक्सलियों से सामना हो गया, जो जवानों की हत्या में शामिल थे. काली वर्दीधारी नक्सली, शायद वही नक्सली, जिन्हें नक्सलियों का बटालियन नंबर-1 कहा जाता है. हमारे वहां पहुंचते ही कई बंदूकधारी नक्सलियों ने हमें घेर लिया. हमारे कैमरे छीन लिए गए. मोबाइल जेब मे रखवा दिए गए. हालांकि उससे पहले नक्सलियों की कुछ सेकंड की तस्वीरें हमारे कैमरे में कैद हो गई थीं.

दो घंटे तक बनाया बंधक



कुल मिलाकर 2 घंटे के लिए बंधक बना दिया गया. नक्सलियों की मौजूदगी वैसे ही खतरनाक होती है, लेकिन ये और खौफनाक तब हो जाती है जब फोर्स के पहुंचने का अंदेशा हो. और ऐसा ही कुछ हुआ भी. हुआ यूं कि जंगल से 2 बैल तेजी से दौड़ते हुए हमारी ओर आने लगे और नक्सलियों को लगा कि फोर्स पहुंच चुकी है.

सोचा क्रॉस फायरिंग में मारे जाएंगे

अफरातफरी मच गई और सभी नक्सली भागते हुए अपना हथियार तैयार करने लगे. हमारी धड़कन बढ़ गई और लगा कि आज हम भी क्रॉस फायरिंग में मारे जाएंगे. क्योंकि क्रॉस फायरिंग में चली गोलियां यह नहीं पूछेंगी कि आप पत्रकार हैं या नक्सली. खैर 2 घंटे बंधक रहे. इस दौरान कई बार नक्सलियों से इंटरव्यू देने की गुजारिश भी की, लेकिन हमारी यह मांग हमसे कुछ दूर बैठे नागा नाम के नक्सली नेता ने खारिज कर दी. शायद वो नक्सली नेता नागेश होगा. नक्सली करीब दो घंटे घटनास्थल से बचे गोलियों के खोखे और दूसरे सामान इकट्ठा करते रहे. इसके बाद हमें इस हिदायत के साथ छोड़ दिया गया कि अगली बार सोच समझ कर यहां आएं.

(लेखक बस्तर में सक्रिय युवा पत्रकार हैं, सुकमा मुठभेड़ के बाद ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग के बाद उन्होंने न्यूज 18 से अपने अनुभव साझा किए)

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First published: March 25, 2020, 12:35 PM IST
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स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 09 (05:00 PM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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