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कृषि मेले में आकर्षण का केंद्र बने करण और बादशाह, 'खास खूबी' है मुर्रा नस्ल के इन सांडों में
Raipur News in Hindi

Devwrat Bhagat | News18 Chhattisgarh
Updated: February 24, 2020, 4:42 PM IST
कृषि मेले में आकर्षण का केंद्र बने करण और बादशाह, 'खास खूबी' है मुर्रा नस्ल के इन सांडों में
इस वजह से खास है ये दो सांड.

दोनों की उम्र 5 साल है और आरंग के एक डेयरी संचालक इन्हें पाल रहे हैं. प्रदर्शन के लिए रखे गये इन सांडों की जोड़ी लोगों को खासी आकर्षित कर रही है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजधानी रायपुर (Raipur) में चल रहे राष्ट्रीय कृषि मेले (Agricultural Fair) में करण और बादशाह लोगों के आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं. मुर्रा नस्ल (Murra breed) के इन सांडों को देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी हुई है. दरअसल, पशुधन विकास विभाग (Livestock Development Department) के द्वारा कृत्रिम गर्भाधान के सफल प्रयास के बाद ये दोनों सांड पैदा हुए है. दोनों की उम्र 5 साल है और आरंग के एक डेयरी संचालक इन्हें पाल रहे हैं. प्रदर्शन के लिए रखे गये इन सांडों की जोड़ी लोगों को खासी आकर्षित कर रही है.


खास तरीके से हुए पैदा





राजधानी के बाराडेरा स्थित तुलसी गांव में 23 से 25 फरवरी तक राष्ट्रीय कृषि मेले का आयोजन किया गया है, जहां कृषि उत्पाद, यंत्रों के अलावा पशुधन के लिए भी अलग से जगह बनाई गई है. इस मेले में करण और बादशाह की जोड़ी भी प्रदर्शन के लिए रखी गई है. वैसे तो ये दोनों सांड हरियाणा के मुर्रा प्रजाति है लेकिन छत्तीसगढ़ में कृत्रिम गर्भाधान से ये पैदा हुए हैं. हरियाणा की इस प्रजाती के लिए छत्तीसगढ़ का भी माहौल अनुकुल बताया जा रहा है. करण और बादशाह का पालन सारागांव में रहने वाले शंकर टंडन कर रहे हैं.


ये है खासियत


सारागांव के पशु चिकित्सक डॉ. दासगुप्ता ने न्यूज़ 18 को बताया कि बादशाह की मां मुर्रा नस्ल की भैंस थी जो लगभग 20 लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन किया करती थी. कृत्रिम गर्भधान से 20 नवंबर 2014 को पैदा हुए बादशाह के जरिए उन्नत नस्ल के कई पाड़ा और पड़िया का उत्पादन हुआ है. वहीं करण की मां भी मुर्रा नस्ल की भैंस थी जो लगभग 18 लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन किया करती थी. वर्तमान में बादशाह और करण पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में टंडन डेरी फॉर्म सारागांव में पाले जा रहे है. इनकी कीमत इस वक्त 80 लाख से 1 करोड़ के बीच है. डॉ. दासगुप्ता का कहना है कि बादशाह अभी तक 80 भैंसों को गाभिन कर चुका है. इसकी 50 संतानें मादा हैं. बादशाह से पैदा हुई भैंसे दस से पंद्रह लीटर दूध दे रही रही है. वहीं करण ने 65 भैंसों को गाभिन कर चुका है. इनसे 40 बच्चे हुए हैं. इसकी भी मादा संताने काफी दूध दे रही है. छत्तीसगढ़ का माहौल भी इन प्रजातियों के लिए काफी अनुकुल है और इन प्रजातियों के सांड और भैसों के पालन से किसानों की आय में काफी वृद्धि हो सकती है.







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First published: February 24, 2020, 4:31 PM IST
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