रायपुर में रसोई गैस की किल्लत, एजेंसियों के चक्कर लगाकर उपभोक्ता परेशान

गैस एजेंसियों के संचालकों की मनमानी के कारण उपभोक्ताओं को समय पर गैस नहीं मिल पा रहा है और लोगों को जरुरी काम छोड़कर ऐजेंसियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं.

Surender Singh | News18 Chhattisgarh
Updated: June 11, 2019, 10:26 AM IST
Surender Singh | News18 Chhattisgarh
Updated: June 11, 2019, 10:26 AM IST
राजधानी रायपुर में रसोई गैस उपभोक्ता इन दिनों गैस एजेंसी और डीलरों की मनमानी का शिकार हो रहे हैं. हालात ये है कि बुकिंग के बाद डिलेवरी के लिए 15 से 20 दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है. जिसके चलते कई घरों में चुल्हे नहीं जल पा रहे. बता दें कि प्रदेश में 20 लाख से ज्यादा एलपीजी ग्राहक हैं. जिसमें अकेले रायपुर में करीब साढ़े चार लाख उपभोक्ता हैं. जिनकी सुविधा के लिए राजधानी में 42 गैस एजेंसियां काम कर रही हैं. बावजूद इसके गैस एजेंसियों के संचालकों की मनमानी के कारण उपभोक्ताओं को समय पर गैस नहीं मिल पा रहा है और लोगों को जरुरी काम छोड़कर ऐजेंसियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं.

गैस एजेंसी  पेंडिंग ज्यादा होने का दे रहे हवाला

गैस की किल्लत की पड़ताल करने जब न्यूज 18 की टीम एक गैस एजेंसी के दफ्तर में पहुंची तो वहां मौजूद कर्मचारी ने पेंडिंग ज्यादा हो जाने का हवाला देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की.  जबकि इंडियन ऑयल समेत अन्य गैस कंपनियों के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कंपनियां एजेसियों की मांग पर तुरंत ही सप्लाई कर रही हैं. बावजूद उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है. वहीं खाद्य मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि उन्हें इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है. साथ ही उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी.

रसोई गैस की किल्लत, सियासत जारी

वहीं रसोई गैस की किल्लत को लेकर राजनीति भी शुरु हो गई है. कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी का कहना है कि केन्द्र की ओर से पर्याप्त गैस सिलेंडर की सप्लाई नहीं कराई जा रही है. जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ा रहा है. वहीं जोगी कांग्रेस भी इस मामले में कांग्रेस का समर्थन करती नजर आ रही हैं. वहीं बीजेपी के प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास प्रदेश में गैस की किल्लत से ही इंकार कर रहे हैं. उनकी नजर में ये कांग्रेस का दुष्प्रचार है.  बहरहाल एक तरफ राजधानी रायपुर के वाशिंदे गैस सिलेंडर की सप्लाई समय पर न होने से परेशन हो रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ इस मामले में राजनीतिक दल अपनी रोटी सेंकने में कतई पीछे नहीं हैं.

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