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Toxic होती जा रही रायपुर की लाइफ लाइन खारुन नदी, प्रदूषण नहीं रोका गया तो....

अगर जल्द इसके कम करने को लेकर काम शुरु नहीं किया गया तो काफी बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है.

अगर जल्द इसके कम करने को लेकर काम शुरु नहीं किया गया तो काफी बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है.

मंत्री शिव कुमार डहरिया दावा है कि हमारी सरकार ने गंदे नालों के पानी को पहले उसका सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से ...अधिक पढ़ें

रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की खारुन नदी (Kharun River) को रायपुर (Raipur) का लाइफ लाइन माना जाता है. लेकिन लाखों की प्यास बुझाने वाली ये जीवनदायिनी नदी धीरे-धीरे जहरीली होती (Pollution) जा रही है. उद्योगों से निकलने वाला पानी खारुन नदी में मिल रहा है. इस नदी का पानी मुख्यमंत्री से लेकर आम लोग पीते हैं, लेकिन नदीं के जहर को रोक पाने में राज्य प्रशासन असफल होता दिख रहा हैं. यहां तक नदियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार के पास कोई नीति भी नहीं हैं. नदी में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है. अगर जल्द इसके कम करने को लेकर काम शुरु नहीं किया गया तो काफी बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है.

 

दूषित पानी..,बीमार होते लोग


मालूम हो कि प्रदेश की खारुन नदी शिवनाथ नदी की प्रमुख सहायक नदी है लेकिन खारुन नदी के अलावा अन्य नदियों का पानी प्रदूषित हो गया है. इसको लेकर एनजीटी ने भी राज्य सरकार को नसीहत दी है. प्रदेश की पांच नदियों में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (Biological oxygen demand) बढ़ जाने से नदियों के पानी को प्रदूषित माना गया है. नदियों के जानकार गौतम बंदोपाध्याय का कहना है कि राज्य सरकार के पास नदियों को लेकर कोई ठोस नीति नहीं है. इस वजह से नदियों का पानी दिन पर दिन प्रदूषित होता जा रहा है.


एक नजर इन आंकड़ों पर


0.. रायपुर के खारुन नदी में बुंदरी से रायपुर तक 3.3 से 7.2, 20 किलो मीटर तक स्ट्रेच पाया गया है.

0.. कोरबा के हसदेव नदी में कोरबा से उरगा 3.6 से 7.0, 20 किलो मीटर तक स्ट्रेच पाया गया है.

0.. महानदी में आरंग से सिहावा के बीच 3.3 व 8.0 राजिम तक 70 किलो मीटर तक स्ट्रेच पाया गया है.

0. शिवनाथ नदी  सिमगा से बेमेतरा 3.4व 8.4,  10 किलो मीटर तक स्ट्रेच पाया गया.

0. रायगढ़ के केलो नदी रायगढ़ से कनकतुरा 3.8  15 किलो मीटर तक स्ट्रेच पाया गया है.




नदियों के जानकार गौतम बंदोपाध्याय का कहना है कि राज्य सरकार के पास नदियों को लेकर कोई ठोस नीति नहीं है.




क्यों फेल हो रही सरकार


आस-पास के स्थानीय लोग आरके राय और प्रमोद कुमार का कहना है कि नदियों से शहर के लोग पानी पीते हैं लेकिन पानी को शुद्ध करने का काम राज्य सरकार नहीं कर पा रही है. अगर गंदे नालों का पानी नदियों में मिलेगा तो पानी पीने से कई तरह की बीमारियां हो जाएगी. नदियों में गंदे नालों का पानी मिलने से नदियां प्रदूषित हो रही हैं जिसको लेकर स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ने लगी है.




नगरीय प्रशासन मंत्री शिव कुमार डहरिया मानते हैं कि पिछली सरकार ने गंदे पानी के लिए कोई ठोक कदम नहीं उठाया हैं.




सरकार की दलील


नगरीय प्रशासन मंत्री शिव कुमार डहरिया मानते हैं कि पिछली सरकार ने गंदे पानी के लिए कोई ठोक कदम नहीं उठाया हैं. उनका दावा है कि हमारी सरकार ने गंदे नालों के पानी को पहले उसका सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से फिल्टर करते हैं और उसके बाद उसे नदियों में छोड़ा जाता है.






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Tags: Chhattisgarh news, Pollution, Raipur news

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