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पंचायतों में अब साक्षर भी लड़ सकेंगे पंच और सरपंच का चुनाव, BJP ने लगाए ये आरोप

Devwrat Bhagat | News18 Chhattisgarh
Updated: November 25, 2019, 12:00 PM IST

भूपेश बघेल सरकार (Bhupesh Baghel Government) ने पंचायत चुनाव के लिए शिक्षा (Education) की बाध्यता को खत्म कर दिया है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की भूपेश बघेल सरकार (Bhupesh Baghel Government) ने केवल साक्षरों (Literate) को भी पंचायत चुनाव (Panchayat Election) लड़ने का अधिकार दे दिया है. भूपेश कैबिनेट ने बीते 23 नवंबर को सर्वसम्मति से इस फैसले पर मुहर लगाई है. अब तक कक्षा 5वीं और 8वीं पास को ही चुनाव लड़ने का अधिकार था. अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार का ये फैसला क्या आदिवासी नेतृत्व (Tribal Leadership) को मजबूत करने के लिए लिया गया है या फिर इसके पीछे कांग्रेस (Congress) सरकार की कोई और ही मंशा है.

भूपेश बघेल सरकार (Bhupesh Baghel Government) ने पंचायत चुनाव के लिए शिक्षा (Education) की बाध्यता को खत्म कर दिया है. यानी अब केवल अक्षर ज्ञान रखने वाले साक्षर भी पंचायत के चुनाव लड़ सकेंगे. पहले सरपंच के लिए 8वीं पास और पंच के लिए 5वीं पास होना जरुरी था, जिसे हटाकर सरकार ने चुनाव लड़ने के लिए केवल साक्षर होने का ही दायरा चुनाव के लिए रखा है. भूपेश सरकार के इस फैसले पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं. विपक्षी दल बीजेपी (BJP) इसको लेकर कांग्रेस (Congress) सरकार पर अलग ही आरोप लगा रही है.

बीजेपी का आरोप
पंचायत चुनाव को लेकर सरकार के इस फैसले पर बीजेपी का कहना है कि लोगों को साक्षर बनाने की भी जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए और ऐसे में कांग्रेस केवल अपना दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रही है. बीजेपी के प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करने की बात कही है. इस पर कांग्रेस के प्रदेश संचार प्रमुख शैलेष नितिन त्रिवेदी का कहना है कि लोकतंत्र में चुनाव लड़ने का अधिकार सभी को होना चाहिए और सरकार का ये फैसला लोकतंत्र को मजबूत करने वाला है.

मंत्री भी हैं साक्षर
राजनीति और शिक्षा से जुड़े मसले पर सूबे के मंत्री कावसी लखमा का नाम सबसे पहले सामने आता है, जिन्होंने स्कूल का मुंह तक नहीं देखा, लेकिन सियासी दांव-पेच बखूबी समझते हैं. अन्य भी कई विधायक हैं, जो महज साक्षर ही हैं अब पंचायतों में साक्षर को चुनाव लड़ने का अधिकार देने के बाद विश्लेषकों की माने तो सरकार के इस फैसले से दोनों ही पार्टियों का दायरा बढ़ेगा. राजनीतिक विश्लेषक रविकांत कौशिक का कहना है कि शिक्षा की बाध्यता बड़े सदनों में नहीं है और पंचायत स्तर पर ये बाध्यता कई लोगों को चुनाव लड़ने से रोकती थी.

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First published: November 25, 2019, 12:00 PM IST
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