Lockdown 2.0: कोरोना के कारण श्मशान में लॉक हुईं अस्थियां, मुक्ति का इंतजार
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Lockdown 2.0: कोरोना के कारण श्मशान में लॉक हुईं अस्थियां, मुक्ति का इंतजार
सांकेतिक फोटो.

कोरोना वायरस से बचाव के तौर पर लॉकडाउन के दौरान बहुत कुछ रुक सा गया है. यहां तक कि मरने वाले लोगो की अस्थियां भी नदियों में प्रवाह नहीं हो पा रही हैं.

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रायपुर. कोरोना वायरस से बचाव के तौर पर लॉकडाउन के दौरान बहुत कुछ रुक सा गया है. यहां तक कि मरने वाले लोगो की अस्थियां भी नदियों में प्रवाह नहीं हो पा रही हैं. यही वजह है कि श्मशान में दाह संस्कार होने के बाद अस्थियों को श्मशान में ही रखा जा रहा है. श्मशान घाटों में बने लॉकर में ही अस्थियों को रखा जा रहा है, जहां लॉकर की व्यवस्था नही है वहां पर पेड़ या फिर ओर कही रखा जा रहा है.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की श्मशान भूमि में कई सारे लॉकर अस्थि​यों से भर गये हैं. मृतकों के परिजन यहां लॉकर में अस्थियां रखकर गए हैं, लेकिन लॉकडाउन के चलते इन्हें अभी विसर्जित करना संभव नहीं हो पा रहा है. रायपुर और आस पास के लोग अलग अलग नदियों में अस्थियो को प्रवाह करते हैं. जैसे खारुन, शिवनाथ और महानदी इन नदियों में ही अधिकतर लोग अस्थियों को प्रवाह करते है, लेकिन लॉकडाउन के चलते एक जगह से दूसरी जगह जाने में दिक्कत हो रही है.

रेल और हवाई सेवा बंद
कुछ लोग हरिद्वार, काशी और प्रयागराज अस्थियों के विसर्जन को पुण्य का काम मानते हैं, लेकिन रेल गाड़ी और हवाई जहाज समेत आवागमन के पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद हैं. रायपुर समेत अन्य कई जिलो के आसपास के रहने वाले लोग मृत्यु हो जाने वाली पुण्य आत्मा की मुक्ति के लिए उसकी अस्थियों को गंगा घाट पर या हरिद्वार प्रयागराज के गंगा नदी में प्रवाहित करते हैं, लेकिन लॉकडाउन और कोरोना वायरस के संक्रमण के डर की वजह से फिलहाल इन अस्थियों को श्मशान घाटों में ही रखा जा रहा है.  लोगों का मानना है कि लॉकडाउन खुलने के बाद ही इन अस्थियों को प्रदेश की अलग अलग जगहो पर बहने वाली नदियों में और गंगा नदी में प्रवाह किया जा सकेगा.
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