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लोकसभा चुनाव 2019: भाजपा के गढ़ रायपुर में सालों से जीत के लिए तरस रही है कांग्रेस

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रायपुर छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा शहर और राजधानी है. छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में से एक रायपुर सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है. बीजेपी के रमेश बैस अब तक के आम चुनावों में यहां से 7 बार जीत चुके हैं.

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रायपुर छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा शहर और राजधानी है. छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में से एक रायपुर सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है. आजादी के बाद 1952 से अब तक यहां कुल 16 चुनाव संपन्न हुए हैं. 1999 तक यह लोकसभा सीट मध्य प्रदेश के अंतर्गत आती थी. साल 2000 में मध्य प्रदेश के विभाजन के बाद बने छत्तीसगढ़ के अंतर्गत आने के बाद तीन लोकसभा चुनाव हो चुके हैं.

1952 और 1957 में निर्वाचन क्षेत्र के लिए दो सीटें थीं, इसलिए प्रथम और द्वितीय उम्मीदवार दोनों को विजेता घोषित किया गया था. वरिष्ठ कांग्रेस नेता और इंदिरा गांधी के करीबी सहयोगी विद्याचरण शुक्ल ने इस निर्वाचन क्षेत्र का दो कार्यकाल तक प्रतिनिधित्व किया. बीजेपी के रमेश बैस अब तक के आम चुनावों में यहां से 7 बार जीत चुके हैं, उन्हें केवल 1991 में हार का मुंह देखना पड़ा था और साल 1996 से 2014 तक उन्होंने लगातार छह बार जीत दर्ज की है.

सांसद रमेश बैस.




रायपुर जिला ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण है. यह जिला कभी दक्षिणी कौशल का हिस्सा था और मौर्य साम्राज्य के अधीन माना जाता था. रायपुर शहर लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के पारंपरिक किलों को सहेजे राजाओं की राजधानी रहा. रायपुर शहर 9वीं शताब्दी के बाद से अस्तित्व में आया. रायपुर लोकसभा के अंतर्गत विधानसभा की नौ सीटें आती हैं. इनमें से एक अनूसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. जिनमें बलौदा बाजार, भाटापार, धारसिवा, रायपुर ग्रामीण, रायपुर शहर दक्ष‍िण, रायपुर शहर पश्चिम, रायपुर शहर उत्तर, अभनपुर और आरंग (एससी) शामिल है.
छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के लिए जिला प्रशासन स्वीप कार्यक्रम चला रही है.


इस लोकसभा सीट पर 2014 में पुरुष मतदाताओं की संख्या 979,133 थी, जिनमें से 659070 ने वोटिंग में भाग लिया. वहीं पंजीकृत 925097 महिला वोटर्स में से 591775 महिला वोटर्स ने वोट डाला था. इस तरह कुल 1,904,230 मतदाताओं में से 1,250,845 ने चुनाव में अपनी हिस्सेदारी की. 2019 के सत्रहवें लोकसभा चुनाव में 1904460 से ज्यादा मतदाता अपने क्षेत्र के सांसद का चुनाव करेंगे. आम चुनाव के दृष्टिकोण से यह संसदीय क्षेत्र साल 1996 से भाजपा का गढ़ बना हुआ है. यहां कांग्रेस को जीत का इंतजार है.

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