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लोकसभा चुनाव 2019: बीजेपी को आईना दिखाकर छत्तीसगढ़ में बदलेगी कांग्रेस की तस्वीर?
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निलेश त्रिपाठी | News18Hindi
Updated: April 3, 2019, 11:35 AM IST
लोकसभा चुनाव 2019: बीजेपी को आईना दिखाकर छत्तीसगढ़ में बदलेगी कांग्रेस की तस्वीर?
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल. फाइल फोटो.

विधानसभा चुनाव में बंपर जीत और उसके बाद किए फैसलों के बूते कांग्रेस बीजेपी को आईना दिखाकर लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की सभी 11 सीटें जितने का दावा कर रही है.

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छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव 2019 के तहत मतदान तीन चरणों में होने हैं. चुनावी तैयारियों के बीच कांग्रेस ने सूबे में एक अभियान चलाकर मतदाताओं का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश की है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पीएम नरेन्द्र मोदी को उपहार में एक आईना भेजा और खुला पत्र लिखा. इसमें उन्होंने पीएम मोदी पर कटाक्ष करते हुए लिखा है कि बार-बार आईने में देखें और अपनी असली तस्वीर पहचानने की कोशिश करें. मुख्यमंत्री के इस कदम के बाद पूरे कांग्रेस ने इसे अभियान के रूप में ले लिया है और बीजेपी के अलग नेताओं और पूर्व सरकार का हिस्सा रहे लोगों को आईना भेजा जा रहा है.

छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद अब तक हुए साल 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में सूबे की 11 में से सिर्फ 1 सीट जितने में कांग्रेस कामयाब हो पाई थी. तब और अब में बड़ा अंतर ये है कि उन चुनावों के दौरान प्रदेश में बीजेपी सत्ता में थी और अब कांग्रेस विधानसभा की 90 में से 68 सीटों को अपने कब्जे में कर चार महीने से सत्ता पर काबिज है. विधानसभा चुनाव में बंपर जीत और उसके बाद किए फैसलों के बूते कांग्रेस बीजेपी को आईना दिखाकर लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की सभी 11 सीटें जितने का दावा कर रही है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि 15 साल बाद सरकार बनाने वाली कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में ऐसा क्या किया है, जिससे लोकसभा में उसकी तस्वीर बदलेगी?
File Photo.

बहुसंख्यक वोटर्स को साधने की कोशिश



छत्तीसगढ़ में 15 साल बाद सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सरकार ने सबसे पहले बहुसंख्यक वोटर्स को साधने की कोशिश की. सरकार बनने के कुछ घंटों में ही राज्य सकरार ने जनघोषणा पत्र में किए वायदे के अनुसार प्रदेश में किसानों का कर्ज माफ करने और 25 सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर पर धान खरीदने का निर्णय ले लिया. फिर कुछ दिन बाद बस्तर के लोहांडीगुडा में टाटा इस्पात संयंत्र के लिए अधिग्रहित आदिवासी किसानों की जमीन वापस करने का फैसला लिया. इन फैसलों का सीधा असर लोकसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है. इसके अलावा नरवा, गरवा, घुरवा बाड़ी के लिए विशेष बजट देकर सरकार गांव, जंगल और जमीन से जुड़े लोगों को साधने की कोशिश की है.
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4493 विकास कार्यों पर ब्रेक
छत्तीसगढ़ में सरकार में आते ही कांग्रेस ने पूर्व की सरकार की संचार क्रांति योजना बंद कर दी. इसके अलावा 4 हजार 493 विकास कार्यों पर ब्रेक लगा दिया. इसके साथ ही केन्द्र की आयुष्मान भारत योजना को छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनते ही बंद कर दिया गया और उसके बदले हेल्थ फॉर ऑल स्कीम लागू करने की बात कही गई, लेकिन उसको अब तक अमली जामा नहीं पहनाया गया है. इसके अलावा सवर्णों को दस फिसदी आरक्षण पर भी प्रदेश सरकार ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है.
File Photo.

तबादला उद्योग और बदलापुर
सूबे में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद ही बड़े प्रशासनिक फेरबदल किए गए. करीब हर विभाग में ताबड़तोड़ तबादले हुए. नई सरकार बनने के दो महीने के भीतर ही रायपुर में दो बार पुलिस कप्तान बदल दिए गए. इनके अलावा डेढ़ महीने के भीतर सुकमा एसपी का दो बार तबादला और दुर्ग आईजी भी दो बार बदले गए. प्रशासनिक अधिकारियों के भी तबादले किए गए. लगभग हर जिले के कलेक्टर, एसपी, जिला शिक्षा अधिकारी, कॉलेज के प्रचार्य, यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार बदल दिए गए. विपक्ष ने नई सरकार पर पैसे लेकर तबादला उद्योग चलाने का आरोप लगाया.

कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही झीरम नरसंहार, नान घोटाला, अंतागढ़ टेपकांड में नए सिरे से जांच के लिए एसआईटी का गठन किया. नान घोटाला मामले में आईपीएस मुकेश गुप्ता, रजनेश सिंह को निलंबित कर दिया गया. अंतागढ़ टेपकांड मामले में पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह के दामाद पुनित गुप्ता, पूर्व मंत्री राजेश मूणत, पूर्व सीएम अजीत जोगी, अमित जोगी, मंतू पंवार जैसे बड़े और चर्चित नामों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. डीकेएस अस्पताल में 50 करोड़ रुपये के गड़बड़झाला के आरोप में डॉ. पुनीत गुप्ता पर एक और एफआईआर दर्ज कर लिया गया. विपक्ष ने कांग्रेस सरकार पर बदलापुर की राजनीति करने का आरोप लगाया. हालांकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इसे बदलावपुर की राजनीति कहते हैं.

कल्लूरी और अडानी 'प्रेम'
छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने 2 जनवरी 2019 पुलिस विभाग में बड़े फेरबदल किए. इसमें रमन सरकार में बस्तर आईजी की जिम्मेदारी निभाते हुए विवादों और कांग्रेस के निशाने पर रहे आईपीएस शिवराम प्रसाद कल्लूरी को बड़ी जिम्मेदारी दी. एसआरपी कल्लूरी को एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्ल्यू जैसे महत्वपूर्ण विभाग का आईजी बनाया गया. इसके बाद नागरिक आपूर्ति निगम घोटाला मामले में गठित की गई एसआईटी का मुखिया भी बनाया. सरकार के इस निर्णय का चौतरफा विरोध हुआ तो 27 फरवरी 2019 को सरकार ने आईपीएस कल्लूरी का तबादला कर दिया. कल्लूरी को ईओडबल्यू से हटाकर परिवहन विभाग में अपर परिवहन आयुक्त बना दिया गया.

छत्तीसगढ़ की कांग्रेस पार्टी की सरकार ने कोरबा ज़िले में गिधमुड़ी और पतुरिया कोयला खदान को गौतम अडानी की कंपनी को सौंपने का फ़ैसला किया है. अडानी की कंपनी कुछ दूसरी कंपनियों के साथ मिल कर इस कोयला खदान में एमडीओ यानी माइन डेवलपर कम ऑपरेटर के तौर पर कोयला खनन का काम करेगी. विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस पार्टी एमडीओ के तौर पर कोयला खनन का विरोध करती रही है और इसे बड़ा भ्रष्टाचार बताती रही है. हालांकि इसके पीछे सरकार के अधिकारियों का तर्क है कि मामले में निविदा आमंत्रित कर नियमानुसार योग्य कंपनियों को ठेका दिया गया है.
पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह. फाइल फोटो.

'कांग्रेस का काला चेहरा'
छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह का कहना है कि प्रदेश में चुनाव की दृष्टि से वसूली अभियान चल रहा है. तबादला उद्योग और बदलापुर की राजनीति के तहत काम किया जा रहा है. कांग्रेस आईना इसलिय भेज रही है क्योंकि उनका चेहरा काला हो गया है. कांग्रेस की सरकार में जमीन से लेकर आसमान तक घोटाला हुआ. उन्हें आईना देखने की जरूरत नहीं है इसलिए अपने घर से आईना फेंक रहे हैं और पड़ोसी को दे रहें.

कांग्रेस के प्रदेश संचार विभाग प्रमुख शैलेष नितिन त्रिवेदी का कहना है कि बीजेपी ने राज्य में 15 साल और केन्द्र में 5 सालों तक जो भ्रष्टाचार किया, उस भ्रष्टाचार से दूषित चेहरा देखने के लिए हमने आईना भेजा है. बेशक वो हमारे भेजे गए आईने को न देखें, लेकिन देश और प्रदेश की जनता ​उनको लोकसभा चुनाव 2019 में आईना दिखाने वाली है.
File Photo.

तस्वीर बदलनी तय!
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक दिवाकर मुक्तिबोध कहते हैं कि कांग्रेस का भाजपा के बड़े नेताओं को आईना भेजना प्रतीकात्मक विरोध का एक तरीका मात्र है. बात अगर प्रदेश में इस आम चुनाव में कांग्रेस की राजनीतिक तस्वीर बदलने की है तो पिछले आंकड़ों पर गौर करना चाहिए. साल 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान केन्द्र में एनडीए और 2009 और 2014 के चुनाव के दौरान यूपीए की सरकार थी, लेकिन तीनों चुनावों में कांग्रेस को प्रदेश में सिर्फ एक और भाजपा को 10 सीटें मिलीं. क्योंकि राज्य में उस दौरान भाजपा की सरकार थी. छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के कुछ महीने बाद ही लोकसभा चुनाव होते हैं. ऐसे में यहां की जनता राज्य सरकार की नीतियों और योजनाओं से केन्द्र की अपेक्षा ज्यादा प्रभावी रहती है. इस चुनाव में वैसे भी कांग्रेस के लिए खोने के लिए बहुत कुछ नहीं है और पिछले विधानसभा चुनाव में उसे बंपर जीत मिली है. इससे साफ है कि लोकसभा चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस की तस्वीर बदलेगी और उसकी सीटें बढ़ने की संभावना काफी प्रबल है.
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First published: April 3, 2019, 11:35 AM IST
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