लोकसभा चुनाव: सीएम भूपेश बघेल के सहारे ही छत्तीसगढ़ में मिशन-11 फतह करेगी कांग्रेस?

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की ओर से वन-मैन-शो चल रहा है. बात चाहे चुनावी प्रचार-प्रसार की हो या फिर नामांकन रैली की. सभी जगहों पर सीएम भूपेश बघेल खुद ही मोर्चा संभाले हुए हैं.

Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: April 15, 2019, 2:17 PM IST
लोकसभा चुनाव: सीएम भूपेश बघेल के सहारे ही छत्तीसगढ़ में मिशन-11 फतह करेगी कांग्रेस?
सीएम भूपेश बघेल. फाइल फोटो.
Awadhesh Mishra | News18 Chhattisgarh
Updated: April 15, 2019, 2:17 PM IST
छत्तीसगढ़ में पहले चरण का मतदान कार्य 11 अप्रैल को होना है. सभी राजनीतिक दल प्रचार-प्रसार में पूरा दम-खम लगा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस की ओर से हर जगह सिर्फ और सिर्फ सीएम भूपेश बघेल ही दिखाई दे रहे हैं. पहले चरण में छत्तीसगढ़ की बस्तर सीट पर वोटिंग होगी. बात अगर अब तक के चुनावी प्रचार की करें तो जहां एक तरफ बीजेपी ने पीएम नरेन्द्र मोदी सहित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री से लेकर पूर्व मुख्यमंत्रियों तक को चुनावी प्रचार में झोंक रखा है. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की ओर से प्रदेश प्रभारियों के अलावा अब तक कोई भी स्टार प्रचारक या बड़ा चेहरा छत्तीसगढ़ नहीं पहुंचा है. चुनाव प्रचार की कमान सीएम और पीसीसी चीफ भूपेश बघेल ने ही संभाल रखी है.

मसलन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की ओर से वन-मैन-शो चल रहा है. बात चाहे चुनावी प्रचार-प्रसार की हो या फिर नामांकन रैली की या फिर प्रेसवार्ताओं की सभी जगहों पर सीएम भूपेश बघेल खुद ही मोर्चा संभाले हुए हैं. तभी तो पहले चरण के मतदान से पहले सीएम ने 50 के करीब चुनावी सभाएं की तो वहीं 10 के करीब नामांकन रैलियों में शामिल भी हो चुके हैं. चूंकि अब स्पष्ट हो चुका है कि पहले चरण से पूर्व कोई स्टार प्रचारक नहीं आएगा तो मतलब यह कि प्रचार समाप्ति तक सीएम बघेल ही मोर्चा संभाले रहेंगे. कांग्रेस के अजय साहू का कहना है कि बड़े नेताओं का शेड्यूल तय किया जा रहा है.

सीएम भूपेश बघेल. फाइल फोटो.


छत्तीसगढ़ में बीजेपी के प्रदेश स्तरीय नेताओं के अलावा पीएम नरेन्द्र मोदी, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास चुनाव प्रचार के लिए छत्तीसगढ़ का दौरा कर चुके हैं. 12 अप्रैल को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का शेड्यूल तय है. वह सरगुजा में सभा करेंगे. कांग्रेस मामलों के अंदरुनी जानकारों की माने तो सूबे में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री चयन से लेकर कैबिनेट गठन तक और फिर लोकसभा प्रत्याशी चयन तक में जो स्थिति बनी है, उसके बाद अधिकांश नेता-मंत्री अलग-थलग दिखाई दे रहे हैं. बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव का कहना है कि कांग्रेस में चेहरे का अभाव है. इसलिए कोई बड़ा नेता प्रचार करने नहीं आ रहा है.

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सीएम बघेल अकेले के दम पर मिशन 11 तय कर पाएंगे. सवाल यह भी कि क्या कांग्रेस में सच में वन-मैन-शो चल रहा है. सवाल यह भी कि क्या सच में कांग्रेस के नेता अलग-थलग पड़े हैं या फिर कोई अंदुरूनी खिचड़ी पक रही है. खैर लोकसभा के इस चुनावी बयार में बह रहे ऐसे तमाम सवालों का जवाब 23 मई को मिल ही जाएगा. बहरहाल जानते हैं कैसा रहा है भूपेश बघेल का सियासी सफर.

भूपेश बघेल का सियासी सफर
भूपेश बघेल का जन्म 23 अगस्त 1961 को दुर्ग जिले के पाटन तहसील में हुआ था. कुर्मी समाज में इनका खासा जनाधार देखने को मिलता है. तेज तर्रार राजनीति और बेबाक अंदाज के लिए पूरे छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल जाने जाते हैं. किसानों के मुद्दों पर आक्रामक कौशल के लिए वे काफी फेमस भी हैं. साल 1985 में उन्होंने यूथ कांग्रेस ज्वॉइन किया. 1993 में जब मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए तो पहली बार पाटन विधानसभा से वे विधायक चुने गए. इसके बाद अगला चुनाव भी वे पाटन से ही जीते, जिसमें उन्होने बीजेपी के निरुपमा चंद्राकर को हराया.
File Photo.


जब मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह की सरकार बनी, तो भूपेश बघेल कैबिनेट मंत्री बने. साल 1990-94 तक जिला युवा कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के वे अध्यक्ष रहे. 1994-95 में मध्य प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष चुने गए. साल 1999 में मध्य प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री और साल 1993 से 2001 तक मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के डायरेक्टर की जिम्मेदारी भूपेश बघेल ने संभाली. साल 2000 में जब छत्तीसगढ़ राज्य बना और कांग्रेस की सरकार बनी तब जोगी सरकार में वे कैबिनेट मंत्री रहे. 2003 में कांग्रेस जब सत्ता से बाहर हुई तो भूपेश को विपक्ष का उपनेता बनाया गया.

साल 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में पाटन से उन्होने जीत दर्ज की. 2008 में बीजेपी के विजय बघेल से भूपेश चुनाव हार गए. फिर साल 2013 में पाटन से उन्होने जीत दर्ज की. 2014 में उन्हें छत्तीसगढ़ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया. विधानसभा चुनाव 2018 में 90 से कांग्रेस को 68 सीटें मिलीं. इसका श्रेय जिन नेताओं को गया, उनमें भूपेश का नाम सबसे आगे था. यही वजह थी कि कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया.
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