रायपुर में तालाबों के बीच महादेव का अनोखा धाम, संतान प्राप्ति की पूरी होती है मनोकामना!

भोलेनाथ के इस मंत्र का जाप करने से खोया हुआ आत्मविश्वास लौट आता है.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजधानी रायपुर (Raipur) के पास सरोना इलाके में 300 साल पुराना प्राचीन पंचमुखी शिवलिंग है. ऐसी मान्यता है कि यहां संतान प्राप्ति की कामना भगवान शिव के आशीर्वाद से पूरी होती है.

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रायपुर. देवों के देव महादेव के जितने रूप उतनी ही उनसे जुड़ी मान्यताएं भी हैं. हम आपको शिव के एक ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जिसका निर्माण संतान प्राप्ति की कामना से किया गया था और आज भी भोलेनाथ की कृपा यहां लोगों पर बरसती है. साथ ही इस मंदिर में अवतार के रूप में पूजे जाते हैं यहां के तालाब में रहने वाले मछली और कछुए. महाशिवरात्री व सावन के सोमवार को यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजधानी रायपुर (Raipur) के पास सरोना इलाके में 300 साल पुराना प्राचीन पंचमुखी शिवलिंग है. ऐसी मान्यता है कि यहां संतान प्राप्ति की कामना भगवान शिव के आशीर्वाद से पूरी होती है और उनकी सूनी गोद में किलकारियां खिल उठती हैं. ये मंदिर यहां के जमीदार ठाकुर गुलाब सिंह की निशानी है. मंदिर की स्थापना संतान प्राप्ति के लिए ही किया गया था.

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सरोना में महादेव का मंदिर.


..तो करवाया मंदिर निर्माण
ठाकुर परिवार के वंशजों का कहना है कि उनके पूर्वज निसंतान थे कई जगह दुआएं मांगी लेकिन औलाद का सुख नसीब नहीं हुआ, लेकिन एक नागा साधु द्वारा नया मंदिर स्थापना के लिए कहा गया और मंदिर स्थापना के साथ ही पुत्र की प्राप्ति हुई. तभी से इस पंचमुखी शिव का जागृत रूप विख्यात हो गया. यहां ना सिर्फ छत्तीसगढ़ से बल्कि दूसरे राज्यों से भी लोग संतान प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं. ठाकुर परिवार के वंशज सुभाष सिंह ठाकुर का कहना है कि ना सिर्फ छत्तीसगढ़ से बल्कि दूसरे राज्यों से भी भक्त यहां शिव की महिमा जानकर महादेव को पूजने आते हैं.

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मंदिर परिसर में तालाब के कछुए और मछलियों की पूजा की जाती है.


पूजे जाते हैं कछुए
यह मंदिर जितना प्राचीन है उतने ही पुराने इस तालाब में रहने वाली मछलियां और कछुए भी हैं, जो इस मंदिर के इतिहास के गवाह हैं. आपने कई ऐसे तालाब देखे होंगे जहां मछलियों को पकड़ा जाता है और मछली खाने के शौकिन इसे बड़े चाव से खाते भी हैं, लेकिन यहां से पकड़ी गयी मछलियों की दावत महंगी पड़ सकती है. यहां के पुजारी शंकर गोस्वामी का कहना है कि यहां के तालाब में मछलियां और कछुए भगवान शिव का ही अवतार हैं और इन्हें नुकसान पहुंचाने वालों के साथ गंभीर दुर्घटना हो सकती है. इसलिए यहां आसपास रहने वालों ने  कभी इस तालाब की मछलियां या कछुए पकड़ने की कोशिश ही नहीं की और किसी बाहरी व्यक्ति ने ऐसा करने की कोशिश भी की तो अंजाम बुरा होता है. लोग यहां मछली और कछुए को भगवान का अवतार मानकर उनकी पूजा करते हैं और उन्हें प्रसाद के रूप में आटा खिलाते हैं ।

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सरोना मंदिर के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग.


अलग है गभगृह
इस मंदिर का गर्भगृह भी काफी अलग है. यहां पंचमुखी शिवलिंग के साथ महादेव, पार्वती और भगवान गणेश की ऐसी प्रतिमा है जिसमें महादेव ने अपनी गोद में भगवान गणेश को लिया हुआ है. ऐसी मान्यता है कि शिव की पूजा करने से हर मनोकामना पूरी हो जाती है. दूर-दूर से निसंतान यहां संतान प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं और हर साल महाशिवरात्री और सावन में यहां विशेष पूजा की जाती है. लोगों की आस्था यहां शिव से जुड़ी हुई है. रायपुर की श्रद्धालु रोमा कटकवार का कहना है कि वो हर हफ्ते इस मंदिर में आती हैं और भगवान शिव ने अब तक उनकी हर मनोकामना पूरी की है. दो तालाबों के बीच बना ये मंदिर अपनी मान्यताओं के लिए तो प्रसिद्ध है ही, लेकिन यहां का प्राकृतिक वातावरण, मछलियां और कछुए यहां आने वालों को अपनी ओर बरबस ही आकर्षित कर लेते हैं और शिव की आस्था से श्रद्धालु यहां खींचे चले आते हैं.

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