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छत्तीसगढ़ में भाजपा-कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकता है महागठबंधन

छत्तीसगढ़ में भाजपा-कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकता है महागठबंधन

अजीत जोगी

अजीत जोगी

कांग्रेस से बगावत कर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाई थी. इस विधानसभा चुनाव में अजीत जोगी ने बसपा और सीपीआई के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का निर्णय किया है.

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में छजकां-बसपा और सीपीआई का महागठबंधन नए सियासी समीकरण बनाने के लिए चुनावी मैदान में ताल ठोंंक रहा है. यह महागठबंधन राज्य में दो मुख्य विरोधी दलों भाजपा और कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकता है.

बता दें कि सूबे में राजनीतिक समीकरण बहुत तेजी के साथ बन और बिगड़ रहे हैं. कांग्रेस से बगावत कर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी छत्‍तीसगढ़ जनता कांग्रेस बनाई थी. इस विधानसभा चुनाव में अजीत जोगी ने बसपा और सीपीआई के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है.  महागठबंधन के बीच सीटों के बंटवारे में छजकांं को 55, बसपा को 33 और सीपीआई को 2 सीटें मिली हैं. सभी दलों ने अपने प्रत्याशियों ने नाम की घोषणा कर दी है.

इस दौरान सीपीआई ने बस्तर संभाग में बगावती तेवर दिखाते हुए बंंटवारे में मिली 2 सीटों के अलावा भी 3 सीटों पर प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है. ऐसे में माना जा रहा है कि सीपीआई का यह बगावती तेवर महागठबंधन के लिए परेशानी का सबब हो सकता है.

चुनावी पंडितों का मानना है कि महागठबंधन सूबे में करीब 30 से 35 विधानसभा सीटों पर सीधा असर डाल सकता है. सूबे में सामान्य वर्ग की 51 सीटें, एसटी वर्ग की 29 सीटें और 10 सीटें एससी वर्ग के लिए आरक्षित हैं. एसएसी और एसटी वर्ग की सीटों पर महागठबंधन का प्रभाव साफ तौर पर देखा जा सकता है. फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव में महागठबंधन कितना असर दिखा पाता है.

यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ चुनाव: भाजपा, कांग्रेस और गठबंधन, जानिए, किस सीट से कौन है प्रत्याशी

Tags: Chhattisgarh news

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