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सात साल में साढ़े तीन सौ जवानों की शहादत देकर मारे 432 नक्सली
Raipur News in Hindi

निलेश त्रिपाठी | News18Hindi
Updated: January 25, 2018, 10:19 AM IST
सात साल में साढ़े तीन सौ जवानों की शहादत देकर मारे 432 नक्सली
छत्तीसगढ़: सात साल में साढ़े तीन सौ जवानों की शहादत देकर मारे 432 नक्सली

SATP में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में साल 2015 से 2017 के बीच नक्सल हिंसा में 152 जवानों ने अपनी शहादत दी है.

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  • Last Updated: January 25, 2018, 10:19 AM IST
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छत्तीसगढ़ में साल 2022 तक नक्सल समस्या पूरी तरह खत्म करने का दावा सुरक्षा बल व सरकार कर रही है. इन दावों के बीच साल 2018 के पहले महीने में ही नक्सलियों ने एक बड़ी वारदात को अंजाम दिया है. बस्तर संभाग में नक्सलियों ने 24 जनवरी को सुरक्षा बल के पांच जवानों की शहादत ली है. इसके अलावा 10 जवान गंभीर घायल भी हैं.

नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले नारायणपुर के अबूझमाढ़ के इरपानार के जंगल में पुलिस और नक्सलियों की मुठभेड़ हुई. मिली जानकारी के मुताबिक बुधवार 24 जनवरी की सुबह करीब 11 बजे हुई इस मुठभेड़ में डीआरजी के दो एसआई और दो आरक्षक शहीद हो गए. जबकि 9 अन्य जवान बुरी तरह घायल हो गये हैं. हालांकि इस घटना में नक्सलियों को भी गोली लगने का दावा पुलिस कर रही है, लेकिन नक्सलियों का कोई शव बरामद नहीं किया जा सका. इसके अलावा 24 जनवरी को ही बीजापुर में भी नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट किया. इसमें दो जवान बुरी तरह घायल हो गए. इसमें से एक की मौत जगदलपुर में इलाज के दौरान हो गई. नक्सलियों की इस घटना को छत्तीसगढ़ नक्सल आॅपरेशन के डीजी डीएम अवस्थी ने कायराना हरकत बताई है. नक्सलियों को मुहतोड़ जवाब देने की बात भी कही है.

South Asia Terrorism Portal (SATP)
Source ASTP




साल 2018 के शुरुआत में ही बड़ी घटना को अंजाम देकर नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर दबाव बनाने की कोशिश की है.
छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसाओं पर नजर डालें तो पता चलता है कि सुरक्षा बल नक्सलियों पर दबाव बनाने में कामयाब हुई है, लेकिन इसकी भारी-भरकम कीमत भी सुरक्षा बलों को चुकानी पड़ी है. साउथ एशिया टेरे​रिज्म पोर्टल (एसएटीपी) में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में साल 2011 से 2017 के बीच नक्सल हिंसा में 355 जवानों ने अपनी शहादत दी है. इसके बदले सुरक्षा बलों ने 432 नक्सलियों को मौत के घाट भी उतारा है. इसमें से साल 2015 से 2017 के बीच 152 जवान शहीद हुए और 248 नक्सली मारे गए.



छत्तीसगढ़ के सीएम डॉ. रमन सिंह सहित पुलिस के आला अधिकारी सार्वजनिक मंचों से नक्सल समस्या समाप्ती की ओर होने का दावा करते हैं.
साल 2018 की शुरुआत में नक्सलियों ने चार जवानों की शहादत लेकर सरकार को एक बार फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है. इतना ही नहीं एसएटीपी के आंकड़ों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या समाप्ती की ओर होने के सरकार के दावे सतही ही नजर आते हैं. क्योंकि आंकड़ों पर ध्यान दें तो पिछले सात सालों में छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसाओं में 230 आम लोगों को भी अपनी जान गवानी पड़ी है. वहीं साल 2018 में 24 जनवरी तक अलग-अलग घटनाओं में 15 से अधिक नक्सलियों को मार गिराने व तीस से अधिक नक्सलियों को पकड़ने का दावा पुलिस कर रही है. इस साल अब तक पांच जवान मुठभेड़ में शहीद व एक जवान की मौत मलेरिया से हुई है.

2 जनवरी 2018 को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गृह सचिव वीवीआर सुब्रमण्यम ने प्रेस वार्ता ली थी. इसमें दावा किया था कि साल 2022 तक प्रदेश से नक्सल समस्या खत्म हो जाएगी.
इसके कुछ दिन बाद बस्तर आईजी विवेकानंद सिन्हा ने जगदलपुर में प्रेस वार्ता ली. इसमें आईजी सिन्हा ने बताया कि साल 2017 बस्तर पुलिस के लिए काफी अच्छा रहा. आईजी के मुताबिक साल 2017 में बस्तर रेंज में कुंल 1235 नक्सल विरोधी अभियान चलाए गए, जिसमें 186 पुलिस नक्सली मुठभेड हुई. इन मुठभेडों में 68 माओवादियों के शव बरामद किए गए.

बस्तर पुलिस का दावा है कि साल 2017 में 1010 माओवादी गिरप्तार हुए. 368 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया. इसमें डीवीसी मेम्बर से लेकर एरिया और डिप्टी कमाडर जैसे माओवादी शामिल थे. हालांकि मुठभेड़, आत्म समर्पण और ​नक्सलियों की गिरफ्तारी को लेकर बस्तर पुलिस पर सवाल उठते रहे हैं. साल के शुरुआत में ही बीजापुर व कांकेर में हुए दो मुठभेड़ों को सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी व अन्य ने फर्जी बताया. इसके पर्याप्त सबूत होने का दावा भी किया.

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नक्सलियों के साथ ही बीमारी से भी जंग
छत्तीसगढ़ में माओवादियों के गढ़ बस्तर में नक्सलियों को चुनौती देने वाले जवान बीमारी का शिकार भी होते हैं. जंगलों में सर्चिंग पर निकले जवानों को जितना खतरा माओवादियों के एंबुश से रहता है, उससे कहीं ज्यादा खतरा मच्छर व अन्य मौसमी बीमारियों से होता है. सूत्रों से मिले आंकड़े के अनुसार साल 2015 से 15 जनवरी 2018 तक सुरक्षा बल के करीब तीस जवानों की मौत विभिन्न बीमारियों के चलते हुई है. इसके अलावा तीन सौ से अधिक जवान बीमारियों से पीड़ित हैं. इसमें मलेरिया, डेंगू, पीलिया, अवसाद व अन्य बीमारी शामिल है.

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First published: January 25, 2018, 10:04 AM IST
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