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मेडिकल कॉलेज अधिग्रहण: क्या व्यापारी की तरह 'सौदा' करेगी भूपेश सरकार, जानें- हंगामा है क्यों बरपा?

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा करते सीएम भूपेश बघेल. फाइल फोटो.

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा करते सीएम भूपेश बघेल. फाइल फोटो.

CG Politics: चंदूलाल चन्द्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (Chandulal Chandrakar Memorial Medical College) के अधिग्रहण में छत्तीसगढ़ सरकार कितनी राशि खर्च करेगी, इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, वहीं मामले को लेकर सियासत गर्म है.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) की नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार (Congress Government) एक निजी मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण करने जा रही है. दुर्ग जिले के भिलाई नगर निगम क्षेत्र के कचांदुर गांव में संचालित चंदूलाल चन्द्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज को अधिग्रहित करने का विधेयक विधानसभा में 28 जुलाई को पेश कर दिया गया. हालांकि इसका ऐलान सीएम भूपेश ने इसी साल 2 फरवरी को कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे चन्दूलाल चन्द्राकर की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कर दिया था.

सरकार द्वारा निजी मेडिकल कॉलेज (Medical College) की इस खरीदारी को लेकर राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक चर्चाओं का दौर जारी है. मेडिकल कॉलेज की सौदेबाजी को लेकर सियासी हंगामा भी मचा है. लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि निजी मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण किन नियमों के तहत होगा और इसके एवज में सरकार कितना भुगतान निजी संस्था के मालिकों को करेगी?

क्या व्यापारी की तरह व्यवहार करेगी सरकार?
भिलाई के जिस निजी मेडिकल कॉलेज को छत्तीसगढ़ सरकार अधिग्रहित कर रही है, उसे खरीदने का लिखित अनुबंध दुर्ग जिले के संतोष रूंगटा, कॉलेज समूह द्वारा फरवरी 2018 में किया गया था. तब कॉलेज नियमित संचालित हो रहा था. हालांकि सत्र 2018-19 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) अब एनएमसी (नेशनल मेडिकल काउंसिल) ने मापदंडों को पूरा नहीं करने के कारण कॉलेज में आगे एडमिशन की इजाजत नहीं दी थी. तब से लेकर अब तक नए एडमिशन कॉलेज में नहीं हुए हैं.

मेडिकल कॉलेज के रूंगटा समूह के साथ डील से जुड़े एक विश्वसनीय सूत्र ने न्यूज 18 को बताया कि शुरुआती दौर में कॉलेज की बिल्डिंग, इक्यूपमेंट, अन्य संसाधन और अतिरिक्त करीब 25 एकड़ जमीन का लिखित सौदा 165 करोड़ रुपयों में तय हुआ था. लेकिन समय पर राशि का भुगतान नहीं होने के कारण खरीदारी की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी. हालांकि इस बीच अनुबंध निरस्त नहीं हुआ. इसी दौरान 2 बार बैंक द्वारा मेडिकल कॉलेज की नीलामी का विज्ञापन जारी किया गया, लेकिन बात नहीं बनी. तब कॉलेज पर बैंक का कर्ज करीब 141 करोड़ रुपये था.

सूत्र ने बताया कि जनवरी 2021 तक चन्दूलाल चन्द्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के मालिकान पर बैंकों की देनदारी करीब 81 करोड़ रुपये बची थी. बैंक में मेडिकल कॉलेज के अलावा भिलाई के ही नेहरू नगर में संचालित चंदूलाल चन्द्राकर मेमोरियल अस्पताल भी गिरवी है. मेडिकल कॉलेज मालिकान से बात बिगड़ती देख रूंगटा समूह ने सीधे बैंकों से संपर्क किया. बैंक सेटेलमेंट के लिए राजी हो गया. ये मौखिक राजीनामा सरकार के कॉलेज अधिग्रहण की घोषणा से करीब 15-20 दिन पहले हुआ.

विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक रूंगटा समूह का बैंकों से 75 करोड़ रुपये में सेटेलमेंट हुआ था. इतनी रकम में बैंक कॉलेज के साथ ही अस्पताल भी देने को तैयार था. क्योंकि दोनों प्रॉपर्टी बैंक के पास गिरवी है. सेटलमेंट की जानकारी मेडिकल कॉलेज समूह को भी दी गई. मार्च 2021 तक सेटेलमेंट की कागजी प्रक्रिया पूरी होनी थी, लेकिन इसी बीच राज्य सरकार ने निजी मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण का ऐलान कर दिया. अब सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या सरकार एक व्यापारी की तरह फायदा देखते हुए सीधे बैंक से सेटलमेंट कर कॉलेज का अधिग्रहण कर लेगी? क्या बैंक को सेटेलमेंट राशि देकर कॉलेज के साथ ही नेहरू नगर अस्पताल का भी अधिग्रहण सरकार कर लेगी?

निजी मेडिकल कॉलेज पर कितना कर्ज?
सूत्रों के मुताबिक निजी कॉलेज की 2020 की बैलेंस शीट में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक को कचांदूर स्थित मेडिकल कॉलेज व नेहरू नगर स्थित अस्पताल को गिरवी रखकर करीब 72 करोड़ रुपये की देनदारी है. रूंगटा समूह को करीब 37 करोड़ रुपये देने हैं. इसके अलावा डायरेक्टर व परिवार के लोगों के 49 करोड़ रुपये व अन्य के करीब 9 करोड़ रुपयें हैं. एक साल में बैंक का करीब 10 करोड़ रुपये ब्याज बढ़ा है. वर्तमान स्थिति में संस्था पर करीब 175 करोड़ रुपयों का कर्ज है.

क्या पूरा कर्ज चुकाएगी सरकार?
कॉलेज के अधिग्रहण में सरकार कितनी राशि खर्च करेगी, इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है. 28 जुलाई को विधेयक पेश करते समय सदन में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा- “मैं छत्तीसगढ़ चंदूलाल चन्द्राकर चिकित्सा महाविद्यालय, दुर्ग (अधिग्रहण) विधेयक की पुन:स्थापना करता हूं. साथ ही विश्वास दिलाता हूं कि किसी की लेनदारी व देनदारी में कोई विपरित प्रभाव नहीं पड़ेगा”.

सदन में विधेयक पेश होने के दूसरे दिन छत्तीसगढ़ सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा एक विज्ञप्ति जारी कर बताया गया कि ”शासन स्तर पर अधिग्रहण के सभी पहलुओं का परीक्षण करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों की समिति बनाई गई. समिति की अनुशंसा के बाद विधि विभाग से परीक्षण और परिमार्जन करके कॉलेज का अधिग्रहण करने के लिए विधेयक तैयार किया गया. नए मेडिकल कॉलेज के निर्माण में 400 से 500 करोड़ रुपए और 3 से 4 वर्ष की अवधि लगती है.”

”मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण भू-अर्जन के नियमों के तहत किया जाएगा. भू-अर्जन के प्रावधानों के अंतर्गत ही संपत्ति का आंकलन किया जाना है. ग्रामीण क्षेत्रों में गाइडलाइन के चार गुना भुगतान के स्थान पर मंत्रिमंडल द्वारा 2 गुना तक मूल्यांकन करने का निर्णय किया गया. इस प्रकार निर्धारित राशि के अतिरिक्त ना तो कोई राशि का भुगतान किया जाएगा और ना अन्य कोई दायित्व होगा. इससे सरकार को कम राशि का भुगतान करना पड़ेगा. मेडिकल कॉलेज के प्रमोटर्स के अन्य विधिक, आर्थिक दायित्व का भार सरकार पर नहीं पड़ेगा. उनकी व्यक्तिगत जवाबदारी होगी.”

हंगामा है क्यों बरपा?
मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण का विधेयक के पेश होने के पहले और उसके बाद भी सदन व बाहर विपक्षी दल बीजेपी सरकार पर हमलावार है. विपक्ष का आरोप है कि सीएम अपने दामाद के परिवार वालों को आर्थिक नुकसान से उबारने के लिए निजी मेडिकल कॉलेज का सरकारी सौदा कर रहे हैं. सदन में बीजेपी सदस्य बृजमोहन अग्रवाल के संशोधन पर मत विभाजन मांगा गया, जिसके बाद मत विभाजन में संशोधन प्रस्ताव के पक्ष में 16 वोट पड़े और प्रस्ताव के विरोध में 56 वोट पड़े और विधेयक पारित हो गया. लेकिन सदन व उसके बाहर पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह समेत राज्य से राष्ट्रीय स्तर तक के बीजेपी नेता व केन्द्रीय मंत्री ने भूपेश बघेल सरकार पर अपने परिवार को आर्थिक लाभ पहुंचाने का आरोप लगा रहे हैं.

दरअसल, जिस चंदूलाल चन्द्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण सरकार कर रही है, उसी संस्था द्वारा भिलाई में चन्दूलाल चन्द्राकर मेमोरियल अस्पताल संचालित किया जाता है. सीएम भूपेश बघेल की बेटी दिव्या बघेल की शादी क्षितिज चंद्राकर से हुई है, जिनके पिता विजय चंद्राकर चंदूलाल चन्द्राकर मेमोरियल हॉस्पिटल के निदेशक मंगल प्रसाद चंद्राकर के छोटे भाई हैं. हालांकि इस संबंध में सीएम भूपेश बघेल का कहना है कि मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण का ऐलान छत्तीसगढ़ में छात्रों व स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बेहतरी को देखते हुए लिया गया है. विपक्ष के सारे आरोप निराधार हैं.

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