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छत्तीसगढ़ी में पढ़ें: 'खइरखा डांड़ के खेलई कूदई अउ बगइचा कोती के किंदरई'

सबसे बढ़िया छत्तीसगढ़िया News 18 की श्रृंखला में पढ़िए ये इंट्रेस्टिंग ब्लॉग- खइरखा डांड़ के खेलई कूदई अउ बगइचा कोती के किंदरई. (News 18)

सबसे बढ़िया छत्तीसगढ़िया News 18 की श्रृंखला में पढ़िए ये इंट्रेस्टिंग ब्लॉग- खइरखा डांड़ के खेलई कूदई अउ बगइचा कोती के किंदरई. (News 18)

Chhattisgarh Blog: चलव फेर उही कोती चले जाए जेन कोती से लड़कपन मा ऊर्जा मिलत रिहिस हे. आज का गांव का शहर घरो घर मा नवा जमाना के मनोरंजक समान हा खुसर गेहे.

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चलव फेर उही कोती चले जाए जेन कोती से लड़कपन मा ऊर्जा मिलत रिहिस हे. आज का गांव का शहर घरो घर मा नवा जमाना के मनोरंजक समान हा खुसर गेहे. सबो झन के पचपन के ठिकाना परगेहे. दाई ददा घलो भुला गेहें अपन जमाना के खेलई कूदई ला. घरेच मा रहिके एके जगा मा सबो परिवार बइठे ठाल्हे टाईम पास मा लगे हांवय. आजो घर ले बाहिर निकलना जरूरी हावय.

चिकचिक ले घाम उवय तहां तरिया नंदिया गदगदा जावय

होत बिहिनिया घरोघर खरर - खरर अउ ढकरस ढकरस बाजय ढेंकी मूसर. कमिया अपन काम के सुध मा खेती खार कोती चल देंवय. दाऊ पारा एक भांवर अपन खार के लगा डारय अउ दतुवन चाबत तरिया कोती अमावय. डुबक - डुबक के लइका सियान अपन गोठ बात मा घलो लगे राहंय. दिन भर के समाचार एही बेरा मा सुनाए अउ सुने जावय. दिन चढ़िस तहां सबके अपन - अपन काम बुता. पनिहारिन अपन काम मा. बनिहारिन अपन काम मा. बासी पेज के चुक्ता इंतजाम अउ दिन भर हा मिहनत के काम. वाह रे जीव कतक आनंद ला पावत रेहे. आज के आज सबो कोती खलखलावत हांसत दिन ला पहा डारन इही रिहिस जिनगी के सार.

बचपन कहूं गंवावय झन

रहिते जिनगी मा नानपन के सुरता आथे. वो दिन लहुट के आ जातिस का अइसे लागथे. सबो के अपन घर बार अउ परिवार तेमा हांसी खुशी के तिहार. बिमारी दुःखी मा गांव भर एक दूसर के मददगार. अइसे गोठियाबे त कहानी किस्सा असन लागथे. इसकूल मदरसा के दिन मा दउड़त खेलत खावत लईका मन के झुंड ला का कहिबे. निस्फिकर जिनगी ईही ला केहे गेहे. फेर आज का होगे हे तेन चिंता ला नेवता देवई के बुता करथे. दिन बादर कइसनहो राहय बेरा के चढ़ती ले सुते रहना रहना आम बात होगे हे. सुरूज नारायण मा जल चढ़इया बचपन के साथी ला खोजत हे. सोंच ला अपन फेर वापस लाए ला परही नाव नियाव के रद्दा मा चले के जुगत लगाए ला परही. हमर सबो के जिम्मेदारी हे बचपन ला बचपन असन जीना परही तभे समाज स्वच्छ रइही.

असमंजस के बेरा तोला निरनय लेना सिखोही

खेले कूदे , घूमे फिरे सबो जगा ले शिक्षा पाए इही सार हरय. असमंजस के समय मा इही हिम्मत देहे मा काम आही. कइसे जुरियाके खेलन खेलत निरनय लेवन. बने फरियाके गोठियाए बताए के दिन राहय. कोनो किसम के मनसा पाप हा नइ घेरय. चोर चिहाट के डर नइ राहय सबो हरहिंछा राहंय

सुलोती सुलोती जिनगी चलत राहय. अपनेच अपन सबो डाहर के सियानी सिखोनी आवय जावय. नियम नियाव के बारो महिना पालन होवय. हूंम धूप देवइया , जग जंवारा बोवइया सबो के अपन काम राहय. खेले के उमर मा तीज तिहार मा पूरा गांव माते राहय. एकठन नरियर बर कतका जुगत लगाना परय. उही दिन के सुरता मा आजो चलन हो जातिस. कहिके सपनावत हावन एहू सपना पूरा होवय.

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