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मिशन पानी: कहानी उस कुम्हार की, जिसने पानी बचाने अपनाया ये अनोखा तरीका
Kondagaon News in Hindi

Vivek Shrivastava | News18 Chhattisgarh
Updated: July 4, 2019, 3:57 PM IST
मिशन पानी: कहानी उस कुम्हार की, जिसने पानी बचाने अपनाया ये अनोखा तरीका
पानी की समस्या से निपटने के लिए जुगाड़ तकनीक का उपयोग कोंडागांव में किया जा रहा है.

जल संरक्षण के लिए काम करने वाले छत्तीसगढ़ के एक कुंभकार के बारे में हम आपको न्यूज 18 के 'मिशन पानी' के तहत बताने जा रहे हैं.

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आज जहां पूरा विश्व धरती के गिरते वाटर लेबल से चिंतित होकर उसे बचाने के लिए कई वैज्ञानिक तरीके खोजने में लगा है. गिरते भू-जल स्तर के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को सही तरीका बताया जाता है, पर वाटर हार्वेस्टिंग की आधुनिक तकनीकियों के महंगे होने से कई लोग इस सिस्टम को अपनाने से पीछे हटते है. ऐसे में छत्तीसगढ़ ​के कोंडागांव जिले में एक कुंभकार ने पानी बचाने के लिए जुगाड़ से देशी वाटर हार्वेटिंग सिस्टम तैयार किया है. जल संरक्षण के लिए काम करने वाले छत्तीसगढ़ के एक कुंभकार के बारे में हम आपको न्यूज 18 के 'मिशन पानी' के तहत बताने जा रहे हैं.

कोंडागांव के कुम्हारपारा में रहने वाले कक्षा चौथी पास अशोक चक्रधारी ने अपनी इस खोज के जरिये हजारों लीटर पानी बचा लिये हैं. पेशे से कुम्हार इस युवक ने जुगाड़ से देशी सिस्टम तैयार कर नई तकनीकों को पीछे छोड़ दिया है. जुगाड़ से बने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम देखकर लोग आश्चर्यचकित होने के साथ ही अशोक चक्रधारी की तारीफ़ करते नहीं थकते हैं. वाटर हार्वेस्टिंग से जल स्त्रोत को बढ़ाने के साथ ही पानी बचाने के लिए विभिन्न देशी-विदेशी कंपनियों व संस्थाएं नई तकनीक का उपयोग करते हुये पानी बचाने का दावा करती हैं. कंपनियों के महंगे हार्वेंस्टिंग सिस्टम के जवाब में कोण्डागांव जिले में देशी तरीके व जुगाड़ से जल संरक्षण करने की तकनीक एक कुम्हार इजाद ने की है.

छत के पानी को कुएं में पहुंचाने का जुगाड़.




जुगाड़ की तकनीक



जुगाड़ू तकनीक से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम इजाद करने वाले मसोरा के कुम्भकार परिवार के कक्षा चौथी तक की पढ़ाई करने वाले युवा अशोक चक्रधारी ने कर दिखाया है. पेशे से कुम्हार अशोक चक्रधारी ने बताया कि काम के दौरान पानी की दिक्कतों का सामना करना पडता था. उनकी रोजी-रोटी मिट्टी के कामों से ही चलती है. जिसमें पानी की खपत भी बहुत होती है. पानी की कमी उनके रोजगार में बाधा बन रही थी. इस परेशानी से बचने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अपनाने का फैसला लिया.

बारिश में छत से गिरने वाले पानी को इस तरह स्टोर कर सीधे कुएं में डालने की व्यवस्था की गई है.


इस तरह बचाते हैं पानी
अशोक चक्रधारी ने बताया कि लेकिन जब इसकी लागत के बारे से सुना तो वे इससे पीछे हट गये और देशी तरीके से जुगाड़ से ही यह पूरा सिस्टम तैयार कर लिया. छत से गिरने वाली पानी को नाली में एकत्रित कर उसे पीपा में भरते हैं, जिसे वे पाईप के माध्यम से कुआं में गिरा देते है. इसमें केवल पाईप की लागत ही लगी बाकी सब जुगाड़ से हो गया. इनके कुआं में अब सालभर पानी रहता है.

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First published: July 4, 2019, 3:57 PM IST
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