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मेरा बेटा 'गे' है तो क्या करूं घर से निकाल दूं? पढ़ें- एक मां की दर्दनाक कहानी

मेरा बेटा 'गे' है तो क्या करूं घर से निकाल दूं? पढ़ें- एक मां की दर्दनाक कहानी

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई में एक समलैंगिक बेटे के अधिकार की लड़ाई लड़ रही है. News 18 Crietive.

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई में एक समलैंगिक बेटे के अधिकार की लड़ाई लड़ रही है. News 18 Crietive.

'' वो 18-19 साल का था, जब मुझे उसमें बाकी लड़कों से कुछ अलग होना महसूस हुआ. मैंने भी बेटे से खुलकर बात की. पहले तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ. उसके पापा और मैंने उसे खूब समझाया. बात नहीं बनी तो मैंने डॉक्टर से काउंसलिंग भी कराई. उसका भी कोई असर नहीं हुआ. फिर धीरे धीरे हमने उसकी बात को समझा, हालत को जाना. फिर उसे हमने उसी रूप में स्वीकार किया, जैसा वो रहना चाहता है.''

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रायपुर. पिछले नवंबर महीने की बात है, अचानक मेरे घर कुछ पुलिस वाले आए. उनका कहना था कि मेरे ही स्ट्रीट के एक शख्स ने अलग-अलग समय पर तीन लिखित शिकायतें मेरे बड़े बेटे पंकज (बदला हुआ नाम) के खिलाफ की है. उनका कहना था कि मेरे बेटे की वजह से मोहल्ले का नाम खराब हो रहा है और उसका गलत असर उनके बच्चों पर भी पड़ रहा है. इसलिए मेरे बेटे को मोहल्ले में रहने की इजाजत न दी जाए. मैंने भी पुलिस वालों से कह दिया- मेरा बेटा गे (Gay Son) है तो क्या करूं, उसे घर निकाल दूं. प्रकृति ने उसे जैसा बनाया है, वो वैसा ही है. इसमें कोई भी क्या कर सकता है?

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दुर्ग (Durg) जिले के भिलाई के बैकुंठधाम (Baikunth Dham) में रहने वाली निशा बजारी (बदला हुआ नाम) की आखें बात करते हुए भर जाती हैं. निशा कहती हैं- मेरा बेटा दूसरे लड़कों से अलग है, लेकिन बुरा नहीं है. मोहल्ले वाले उसे बुरा कहते हैं. पिछले महीने 7 नवंबर को जब मेरे घर पुलिस आई तो मैंने भी एक लिखायत उनके खिलाफ छावनी थाने में कर दी, जिसने बेटे को मोहल्ले से बाहर निकालने के लिए कहा था. अगर किसी को तकलीफ है तो वो अपने घर में ताला लगाकर रहे, मैं अपने बेटे को घर से बाहर क्यों निकालूं? आज भी लोग खुलकर तो नहीं, लेकिन दबी जुबान में हमें कोसते हैं. हमारे घर आना-जाना तक पसंद नहीं करते. छावनी थाना से साहब लोग आए थे, मोहल्ले वालों को समझाए हैं, तब से थोड़ी राहत है.

लड़की नहीं, लड़के पसंद हैं
बातचीत में निशा कहती हैं- मेरा बेटा जब भी कहीं जाता है तो लोग उसे चिढ़ाते हैं. कहते हैं…वो देखो हिजड़ा जा रहा है. मैं उसकी मां हूं, मुझे मालूम है कि वो हिजड़ा नहीं है. हां बस उसे लड़कियों की जगह लड़के अच्छे लगते हैं. मेरे बेटे पर कई बार उसपर हमला भी हो चुका है. 30 अक्टूबर 2018 को रायपुर के गुढ़ियारी में पंकज पर 6 लड़कों ने हमला कर दिया था. उन्होंने पहले मेरे बेटे को खूब पीटा. इसके बाद मोहल्ले में ये कहकर घुमाया कि ऐसे लोग लड़कों को बिगाड़ रहे हैं.

दोनों पक्षों को समझाइश
मामले में छावनी थाना पुलिस का कहना है कि एक लिखित शिकायत मिली थी. शिकायत के आधार पर पुलिस की एक टीम मोहल्ले में गई. एक पक्ष का कहना था कि पंकज की वजह से मोहल्ले के दूसरे बच्चों पर गलत असर पड़ रहा है, लेकिन उनकी ओर से कोई ऐसा तथ्य नहीं दिया जा सका. हमने दोनों पक्षों को समझाइश दी.

Tags: Chhattisgarh news, Homosexual Relation, Human rights

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