ICMR पोर्टल पर तय सीमा में जानकारी नहीं देने वाले 7 कोविड टेस्ट लैब को नोटिस जारी

तीन सौ लोगों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है. ( news18 English AP illustration)

तीन सौ लोगों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है. ( news18 English AP illustration)

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में कोरोना संक्रमण (Corona Infection) के भीषण प्रकोप के इस दौर में कई निजी लैब पर कोविड जांच (Covid Test) की रिपोर्ट को लेकर कई गंभीर आरोप लग रहे हैं.

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रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में कोरोना संक्रमण (Corona Infection) के भीषण प्रकोप के इस दौर में कई निजी लैब पर कोविड जांच (Covid Test) की रिपोर्ट को लेकर कई गंभीर आरोप लग रहे हैं. यह भी कहा जा रहा है कि निजी लैब और निजी अस्पतालों में कोविड जांच की रिपोर्ट को लेकर कई तरह की धांधली की जा रही है. वहीं स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना की आरटीपीसीआर जांच के 48 घंटे बाद याने की तय समय-सीमा में आईसीएमआर पोर्टल पर जानकारी दर्ज नहीं करने वाले सात लैबों को नोटिस जारी किया है. इनमें राजधानी रायपुर के छह और भिलाई का एक लैब शामिल है. विभाग ने इन लैबों के प्रबंधकों को नोटिस जारी कर दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने कहा है.

विभाग ने यह भी कहा है कि तय समय पर  स्पष्टीकरण नहीं मिलने की स्थिति में छत्तीसगढ़ पब्लिक एक्ट, 1949 तथा छत्तीसगढ़ एपिडेमिक डिजीज कोविड-19 रेगुलेशन, 2020 के अंतर्गत अनुमति रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी. स्वास्थ्य विभाग ने रायपुर के मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर, पैथकाइंड डायग्नोस्टिक, एसआरएल लैब, लाइफवर्थ डायग्नोस्टिक, एएम पैथलैब, रिवारा लैब और भिलाई के श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज को नोटिस जारी कर दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने कहा है.

बरत रहे लापरवाही

विभाग ने इन लैबों को जारी नोटिस में कहा है कि कोविड-19 सैंपल की जांच के 48 घंटों के बाद भी आईसीएमआर पोर्टल में डॉटा एंट्री नहीं की जा रही है. इसके कारण समय पर मरीजों की कॉन्टेक्ट-ट्रेसिंग नहीं हो पा रही है, जिससे समुदाय में संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है. जानकारी उपलब्ध नहीं होने से अस्पताल में भर्ती एवं उपचार प्रक्रिया सुचारू रुप से नहीं हो पाती है. छत्तीसगढ़ में कोरोना के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं. इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्री भी चिंता जता चुके हैं. माना जा रहा है कि जांच के नतीजों में देरी की वजह से भी संक्रमण बहुत तेजी से बढ़ रहा है. वहीं मौतों के आंकड़े भी बढ़ रहे हैं. देर से नतीजे मिलने से मरीजों को सही समय पर इलाज नहीं मिल पाता है.
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