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छत्तीसगढ़ः ओबीसी वोट से होगा रमन सिंह के भाग्य का फैसला!

छत्तीसगढ़ः ओबीसी वोट से होगा रमन सिंह के भाग्य का फैसला!

रमन सिंह की फाइल फोटो

रमन सिंह की फाइल फोटो

जोगी ने जिस तरह के उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है उनकी वजह से बीजेपी को नुकसान हो सकता है.

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    जनवरी 2018 की शुरुआत से ही रमन सिंह की सरकार ने चुनाव प्रचार में काफी पैसा खर्च करना शुरू कर दिया था, क्योंकि उसे राज्य में सत्ता विरोधी भावनाओं का पता था. सरकार ने न तो किसानों को 300 सौ रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने वाली स्कीम ही शुरू की और न ही 2100 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का वादा पूरा किया. कांग्रेस ने भूपेश बघेल की अगुवाई में इस मुद्दे को काफी उठाया भी और इसे एक बड़ा मुद्दा बना दिया.

    मोदी सरकार द्वारा लाई गई नोटबंदी और जीएसटी की वजह से व्यापारी वर्ग भी काफी नाराज़ हो गया. व्यापारी वर्ग बीजेपी का पारंपरिक वोट बेस है. हालांकि बीजेपी का कहना है  कि उसके 15 साल के शासनकाल में 10 फीसदी की जीडीपी ग्रोथ हुई लेकिन वास्तव में ये ग्रोथ का फायदा सभी वर्ग के लोगों को नहीं मिला यह ग्रोथ खनन, ऊर्जा व स्टील इंडस्ट्री के कारण हुई थी.


    गौरतलब है कि इस सेक्टर से नौकरियां भी कम होती हैं और हज़ारों एकड़ खेती योग्य ज़मीन को अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के लिए अधिगृहीत कर ली जाती है. युवाओं में बेरोज़गारी की समस्या भी काफी बढ़ गई है और बाहरी लोगों को रोज़गार देने के आरोप भी सरकार पर लगातार लग रहे हैं, क्योंकि लोगों का मानना है कि सरकार में तमाम मंत्री बाहरी हैं.

    इन फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विकास यात्रा कार्यक्रम की शुरुआत की ताकि सरकारी योजनाओं के बारे में लोगों को जागरूक किया जा सके. इस कार्यक्रम के तहत सीएम रमन सिंह ने 80 दिनों के भीतर सभी विधान सभा क्षेत्रों में दौरा किया और करीब 300 जनसभाओं को संबोधित किया.

    बीजेपी के पास अजीत जोगी के रूप में 'वोट कटवा' हथियार भी है. मायावती से गठबंधन के बाद पारंपरिक रूप से कांग्रेस के पक्ष में रहा एससी वोट अब जोगी-माया गठबंधन के पक्ष में जा सकता है. इससे भी बीजेपी को फायदा होगा.

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एससी वोट कांग्रेस के पक्ष से हटने के बाद इसके ऊपर से एससी के पक्ष वाली पार्टी होने का तमगा भी हट जाएगा. जिससे ओबीसी का वोट कांग्रेस को मिल सकता है क्योंकि राजनीतिक रूप से छत्तीसगढ़ में ओबीसी और एससी के बीच विरोध की स्थिति है. जमीनी रिपोर्ट के अनुसार महानदी बेसिन में ओबीसी का वोट बीजेपी की ओर से खिसककर कांग्रेस के पक्ष में जा सकता है.

    दूसरी तरफ जोगी ने जिस तरह के उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है उनकी वजह से बीजेपी को नुकसान हो सकता है. इन सबके बीच ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि आचार संहिता लागू होने के बावजूद बीजेपी नेता सरकारी नीतियों के अंतर्गत मोबाइल फोन, टिफिन बॉक्स और शेविंग किट्स जनता को बांट रहे हैं.

    रिपोर्ट के अनुसार कुछ ऐसे समुदाय के लोग जो बीजेपी के खिलाफ वोट कर सकते हैं उनका नाम लिस्ट में नहीं था. हालांकि वोटिंग शांतिपूर्ण रही फिर भी ईवीएम खराब होने कई खबरें भी सुनने में आईं.

    नवागढ़ विधान सभा क्षेत्र में बीजेपी के एक मंत्री को एक पोलिंग बूथ पर पूजा करने की इजाज़त दी गई. इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ. मीडिया में बात उठी तो चुनाव आयोग ने कार्रवाई की और दो सरकारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया. लेकिन ऐसी तमाम छोटी घटनाओं की रिपोर्टिंग नहीं हो सकी.

    ये भी पढ़ें: Analysis: किसानों की नाराजगी और कांग्रेस की पंच लाइन से मुश्किल में है BJP!

    इसके अलावा पार्टी ने हर क्षेत्र से कम से कम एक प्रभावशाली व्यक्ति को पन्ना प्रभारी नियुक्ति किया गया जो कि पार्टी के लिए काम करे. इस मामले में करीब 100 व्यक्तियों को चिह्नित किया गया जिनसे पार्टी के लिए काम करने को कहा गया लेकिन कुछ लोगों ने ऐसा करने से मना कर दिया गया.

    कुल मिलाकर, बीजेपी का सारा दारोमदार जोगी-मायावती गठबंधन पर निर्भर करता है कि वह कांग्रेस के कितने वोट को बांट पाते हैं. लेकिन यह इतना आसान नहीं होगा. मैनेजमेंट से ज़्यादा कहीं न कहीं यह पार्टी के भाग्य पर भी निर्भर करेगा.

    Tags: Chhattisgarh Assembly Election 2018, General Election 2019, Lok Sabha 2019 Election, Raman singh

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