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नक्सल प्रभावित इलाके में किसान उगा रहा केरल का स्पेशल केला, 4 गुनी बढ़ी कमाई

नक्सल प्रभावित इलाके में किसान उगा रहा केरल का स्पेशल केला, 4 गुनी बढ़ी कमाई

राजनांदगांव में केले की खेती करने वाले किसान की अलग पहचान क्षेत्र में बनी है.

राजनांदगांव में केले की खेती करने वाले किसान की अलग पहचान क्षेत्र में बनी है.

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में केरल के स्पेशल केले की खेती की जा रही है. केले की इस खेती से किसान ने आय चारा गुना ज्यादा होने का दावा किया है. किसान का कहना है कि इस स्पेशल केले की डिमांड इतनी है कि उसे बेचने के लिए अलग से मार्केट जाने की जरूरत नहीं पड़ती है. बाड़ी से ही सारा केला बिक जाता है. केरल से तीन साल पहले केले के इस बीज को लाकर उसने मानपुर में खेती शुरू की थी. इस केले की खेती के कारण क्षेत्र में उसकी अलग पहचान बन गई है.

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राजनांदगांव. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर दूर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बसा गांव मानपुर इन दिनों स्पेशल केले की खेती की वजह से चर्चा में हैं. यहां बिज्जू नामक किसान द्वारा पिछले 3 सालों से केले की खेती की जा रही है. यह कोई समान्य केला नहीं, केले की खास प्रजाति है. इस केले का बीज केरल से लाकर यह किसान यहां लगाया है और उसकी उपज देखते ही बन रही है. इस केले की खासियत यह है कि इस केले से चिप्स तैयार किया जाता है. साथ ही बच्चों के लिए सेरेलैक्स तैयार किया जाता है, जिससे दूध के रूप में या पौष्टिकता के रूप में बच्चों को खिलाया जाता है.

किसान बिज्जू का कहना कि क्षेत्र में इस खास केले की मांग ज्यादा है. समान्य केले के मुकाबले इसमें 400 प्रतिशत ज्यादा आय होती है. केरल के इस केले की खास डिमांड है. लोग  इसे लेने पहुंचते हैं और साथ ही इसकी मांग अधिक होने के कारण बाड़ी से ही और खेतों से ही केले की बिक्री हो जाती है और किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं. विजू कहते हैं कि केरल में इस केले को एटेकेया और नेत्रपेडम के नाम से जाना जाता है और इसमें पौष्टिकता अधिक मात्रा में रहती है. जिसके कारण इस केले की डिमांड अधिक है. यह केला चिप्स बनाने के लिए ज्यादा फेमस है. साथ ही इस केले की कीमत 70 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम है. जबकि समान्य कच्चा केला 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिलता है.

जलवायु का मिल रहा फायदा
बिज्जू कहते हैं छत्तीसगढ़ और केरल की जलवायु मानपुर में थोड़ी बहुत मिलती जुलती है. इसके कारण इसका उत्पादन क्षेत्र में अधिक हो रहा है और किसान इससे आर्थिक रूप से संपन्न हो रहे हैं. केला खरीदने आए ग्राहक रज्जू जान का कहना है कि यह केला बहुत ही पौष्टिक है और इस केले की खेती के बारे में जो जानकारी मिली तो हम यहां केले की खरीदी करने पहुंचे हैं. इस केले की केरल में अलग ही पहचान है जो अब धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ में भी अपनी पहचान बनाता हुआ नजर आ रहा है. बहरहाल केरल की केले का स्वाद अब राजनांदगांव के मानपुर में मिल रहा है और इस केले के स्वाद में और ही मीठा तब कर दिया जब किसान इसकी फसल लेकर आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं.

Tags: Farming in India, Rajnandgaon news

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